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संस्कार सृजन @ राम गोपाल सैनी
जयपुर (संस्कार सृजन) किसान हित के लिए केंद्र सरकार द्वारा चालू किये गए महत्त्वकांक्षी योजना कृषक उत्पादक कंपनी FPO के शासन, प्रबंधन, अनुपालन तथा संचालन की विधि के विषय पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त देश के सबसे बड़े संस्थान बर्ड जोकि नाबार्ड का एक हिस्सा है जिसमें अध्ययन हेतु स्वैच्छिक संगठन इंडियन ग्रामीण सर्विस संस्था के कार्यकारी अधिकारी मनीष मिटावा को राज्य स्तर पर चुना गया।
केंद्र सरकार किसान और कृषि को आगे बढ़ाने के लिए अगले पांच साल के लिए 5000 करोड़ रुपये खर्च कर किसानों को आर्थिक सहायता देकर उन्हें समृद्ध बनाने की योजना चला रही है। इसके लिए उन्हें एक कंपनी बनाकर 10,000 नए किसान उत्पादक संगठन बनाने की मंजूरी भी मिल गयी है, एफपीओ यानी किसानी उत्पादक संगठन (कृषक उत्पादक कंपनी) किसानों का एक समूह होगा, जो कृषि उत्पादन कार्य में लगा हो और कृषि से जुड़ी व्यावसायिक गतिविधियां चलाएगा। इससे आम किसानों को होगा सीधा फायदा, एफपीओ लघु व सीमांत किसानों का एक समूह होगा, जिससे उससे जुड़े किसानों को न सिर्फ अपनी उपज का बाजार मिलेगा बल्कि खाद, बीज, दवाइयों और कृषि उपकरण आदि खरीदना आसान होगा। सेवाएं सस्ती मिलेंगी और बिचौलियों के मकड़जाल से मुक्ति मिलेगी।
एफपीओ का गठन और बढ़ावा देने के लिए अभी लघु कृषक कृषि व्यापार संघ और राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक काम कर रहे हैं। दोनों संस्थाओं के मिलाकर करीब पांच हजार एफपीओ रजिस्टर्ड हैं। केंद्र सरकार इसे और बढ़ाना चाहती है। इसलिए राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) को भी इसकी जिम्मेदारी दे दी गई है।
एफपीओ से छोटे, सीमांत और भूमिहीन किसानों को मदद मिलेगी। एफपीओ के सदस्य संगठन के तहत अपनी गतिविधियों का प्रबंधन कर सकेंगे, ताकि प्रौद्योगिकी, निवेश, वित्त और बाजार तक बेहतर पहुंच हो सके और उनकी आजीविका तेजी से बढ़ सके। छोटे और सीमांत किसानों की संख्या देश में लगभग 86 फीसदी हैं, जिनके पास औसतन 1.1 हेक्टेयर से कम जोत है। इन छोटे, सीमांत और भूमिहीन किसानों को खेती के समय भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिनमें प्रौद्योगिकी, उच्चगुणवत्ता के बीज, उर्वरक, कीटनाशक और समुचित वित्त की समस्याएं शामिल हैं। उत्पादक कंपनी के विभिन्न आयामो को धरातल पर मूर्त रूप देने हेतु प्रशिक्षण प्राप्त संस्थाओ के माध्यम से जमीनी स्तर पर बेहतर तरीके से क्रियान्वयित किया जायेगा |
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