जीवन अनमोल है , इसे आत्महत्या कर नष्ट नहीं करें !
सुबह की शुरुआत माता-पिता के चरण स्पर्श से करें !
संस्कार सृजन @ राम गोपाल सैनी
गुरु ही तो रसखान है,
गुरु ही गुण की खान।
गुरु ही देता ज्ञान है,
गुरु से ही संज्ञान।।
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| लेखक :- विजय मेहंदी,जौनपुर (उ.प्र.) |
गुरु ही जीवन का दर्शक,
गुरु ही पथ प्रदर्शक।
गुरु ही माली फुलवारी का,
बालवाड़ी का आकर्षक।।
गुरु से ही कला उपजे,
उपजे गुरु से सदज्ञान।
गुरु से ही जीवनलीला,
गुरु से ही विज्ञान।।
गुरु स्वदेश की आन है,
गुरु ही देश की शान।
गुरु जीवन का मान है,
हो गुरु से जन कल्यान।।
गुरु की महिमा सर्वोपरि,
गुरु ही कृपानिधान।
गुरु-ज्ञान से हो परिपूर्ण,
कोउ बनता है विद्वान।।
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