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नवचेतना का संचार - कविता

तू आशा का संचार है, तू नवचेतना भरने आई। तुमने तो मुर्दों को भी नवजीवन दिया, तुमने तो मुर्दों में भी नवजीवन फूँका। तुझे अब फिर से ज़िन्दगी में नवजीवन फूँकना है, उसे निडर, चंडी दुर्गा बनकर। दुनिया में इतिहास बदलना है, दुष्टों का सर…

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