सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा पति पत्नी का ये वार्तालाप,आपको भी रुला देगा

जीवन अनमोल है इसे आत्महत्या कर नष्ट नहीं करें !

सुबह की शुरुआत माता-पिता के चरण स्पर्श से करें !

संस्कार सृजन राम गोपाल सैनी

प्रतीकात्मक चित्र 

पत्नी - उठो सुबह हो गई चाय नहीं पीनी |

पति - नहीं मैंने सुबह की चाय पीनी छोड़ दी है | 

पत्नी - क्यों ?

पति - जब तुम थी तो सुबह - सुबह मेरे हाथ की बनी चाय पीती थी, हम दोनों खुली छत या बरामदे में चाय की चुस्की लेते थे, परंतु अब नहीं |

पत्नी - मगर क्यों ?

पति - क्योंकि वो चाय नहीं प्यार का ही एक रूप था, तुम्हारे चले जाने के बाद, अब चाय की प्याली का क्या महत्व ?

पत्नी - अरे ये क्या तुम बिस्तर झाड़ रहे हो,चादर ठीक कर रहे हो ? हां कर रहा हूं, मेरे होने पर तो नहीं करते थे |

पति - तब मैं यह काम तुम्हारा समझता था,एक बेफिक्री थी । अब तुम्हारे सारे काम में खुद ही करता हूं |

पत्नी - बहुत सुधर गए हो, अब क्या करोगे ?

पति - टहलने जाऊंगा |

पत्नी - वहीं जहां मेरे साथ जाते थे |

पति - हां वही ढूंढता हूं तुम्हें ,लेकिन तुम मिलती ही नहीं, निराश होकर लौट आता हूं |

पत्नी - फिर क्या करते हो ?

पति - थोड़ी देर बाद नहाने चला जाता हूं |

पत्नी - सुबह - सुबह पहले तो तुम 12 बजे के बाद नहाते थे ,तुम्हारे साथ - साथ मेरी भी तो देर से नहाने की आदत हो गई थी |

पति - हां मगर अब सुबह ही नहा लेता हूं |

पत्नी - क्यों ?

पति - क्योंकि अब जिंदगी के मायने बदल गये हैं |

पत्नी - नहाने के बाद क्या करते हो ?

पति - पूजा करता हूं, भगवान जी और तुम्हारे फोटो के सामने अगरबत्ती जलाता हूं |

पत्नी - मेरे फोटो के सामने !

पति - हां !

पत्नी - किसलिए ?

पति - भगवान से प्रार्थना करता हूं कि वह तुम्हारी आत्मा को शांति प्रदान करें |

पत्नी - मेरा इतना ख्याल रखते हो |

पति - पहले भी रखता था बस तुम समझती नहीं थी |

पत्नी - मैं भी तो रखती थी तुम ही कहां समझते थे |

पति - हां,कह तो ठीक ही रही हो |

पत्नी - अब क्या करोगे ? 

पति - अब मेडिटेशन ,प्राणायाम आदि करूंगा |

पत्नी - मेरे सामने तो नहीं करते थे |

पति - तब मन शांत था, अब मन को शांत करना होता है |

पत्नी - चाय भी नहीं पीई, कुछ खाया भी नहीं है ,नाश्ता नहीं करोगे ?  

पति - हां ,10 बजे करूंगा |

पत्नी - अरे, नाश्ते में ये क्या खा रहे हो ?

पति - जो बना है |

पत्नी - अब फरमाइश नहीं करते |

पति - अधिकतर तो नहीं, हाँ जब कभी तुम्हारी बनाई डिश की याद आती है तो कभी - कभी |

पत्नी - अक्सर क्यों नहीं ? 

पति - तुमसे ही तो करता था, क्योंकि तुम पर मेरा एक विशेष अधिकार था इसलिए,उसमें भी अधिकतर तो तुम बिना कहे ही मेरी पसंद की डिश बना लाती थी |

पत्नी - तो अब कहकर बनवा लिया करो |

पति - जो तुम बनाती थीं वो हर कोई थोड़े ही बना सकता है ? वैसे भी मेरे स्वाद और पसंद तो तुम्हारे साथ चले गए |

पत्नी - अच्छा,अब क्या करोगे ?

पति - अब 2 घंटे अखबार पढूँगा |

पत्नी - 2 घंटे ? 

पति - क्यों ? ऊपर जाने के बाद भी मेरे अखबार से तुम्हारा बैर खत्म नहीं हुआ ? 

पत्नी - मैं,शुरु शुरु में ही तो टोका करती थी बाद में तो टोकना बंद कर दिया था |

पति - हां बंद तो कर दिया था, लेकिन तुम्हारे मन में मेरा अखबार हमेशा सौत ही बना रहा, बस दिखावे के लिए चुप रहती थी |

पत्नी - अच्छा अब लड़ो नहीं, चलो पढ़ लो, तुम तो 2 घण्टे से भी ज्यादा देर तक पढ़ते रहे |

पति - हां ,तुम टोकने वाली नहीं थी ना |

पत्नी - अच्छा,अब भी उलाहना ,अब क्या करोगे ? 

पति - अब आंखें थक गई हैं थोड़ी देर आंखों को आराम दूंगा, आंख बंद करके लेटूंगा ।

पत्नी - अच्छा है, अरे सोते ही रहोगे 2:30 बज गए, तुम्हारा खाने का टाइम तो 2 बजे का है, उठो खाना खा लो, अच्छा क्या बना है ? 

पति - पता नहीं , देखता हूं |

पत्नी - यह सब्जी, यह तो तुम्हें कम पसन्द थी |

पति - लेकिन ,अब पसन्द है |

पत्नी - कैसे ?

पति - क्योंकि जब तुम थी तो मुझे चैलेंज करती थी ना कि मैं ही हूं जो तुम्हारे सारे नखरे बर्दाश्त करती हूं ,मैं चली जाऊंगी तब पता चलेगा, अब तुम चली गई अपने साथ-साथ मेरे सारे नखरे और तुनक मिजाजी भी ले गई, अब तो मैं तुम्हारे सारे चैलेंज स्वीकार कर चुका हूं | 

पत्नी - बहुत बदल गए हो |

पति - गलत ,बदल नहीं गया हूं, असल में जो मैं था वह तो तुम ले गई ,अब तो बस शरीर है, सांसे चल रही है ,कब तक चलेंगी,पता नहीं |

पत्नी - अरे देखो तुम्हारी कामवाली ने तुम्हारी पसंद का लाफिंग बुद्धा तोड़ दिया |

पति - टूट जाने दो |

पत्नी - अरे,तुम्हें गुस्सा नहीं आया |

पति - नहीं अब मुझे गुस्सा नहीं आता |

पत्नी - क्यों ?

पति - क्योंकि गुस्सा तो अपनों पर आता है, तुम तोड़ती तो जरूर आता, इस पर कैसा गुस्सा ?

पत्नी - काश ! तुम मेरे होते हुए भी ऐसे ही होते हैं ?

पति - हां, मैं भी यही सोचता हूं कि मैं तुम्हारे होते हुए ऐसा क्यों नहीं था ? क्यों हमने जिंदगी के कितने ही अमूल्य पल नोक झोंक में गंवा दिए ?

पत्नी - मुझे याद करते हो ?

पति - भूलता ही नहीं,तो याद करने की बात कहां से आ गई, हर समय मेरे चारों ओर जो घूमती रहती हो |

पत्नी - रात हो गयी है, चलो अब सो जाओ तुम्हारे सोने का समय हो गया है |

पति - अच्छा ठीक है |

पत्नी - अरे ! सोते-सोते उठ कर कहां जा रहे हो ?

पति - टीवी बंद कर दूँ ,अब तुम तो हो नहीं जो मेरे सोने के बाद बंद कर दोगी |

पत्नी - मैं तो अब चाह कर भी तुम्हारी मदद नहीं कर सकती, तुम्हें छू भी नहीं सकती । चलो, दूर से ही थपकी देकर सुला देती हूँ |

पति - चलो सुला दो, अब सो ही जाता हूं ..!!

साभार : सोशल मीडिया 

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