आखिर कब खत्म होगा राजस्थान में तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादलों का इंतजार

जीवन अनमोल है इसे आत्महत्या कर नष्ट नहीं करें !

सुबह की शुरुआत माता-पिता के चरण स्पर्श से करें !

संस्कार सृजन राम गोपाल सैनी

जयपुर (संस्कार सृजन) जहां एक ओर अरब सागर से निकले बिपरजॉय चक्रवात या बवंडर ने मरूप्रदेश में तांडव मचा रखा है और शासन प्रशासन को अलर्ट मोड पर ला खड़ा किया है । वहीं दूसरी ओर राजस्थान में पिछले 4 सालों से तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादले नहीं होने से लाखों शिक्षक, उनके परिवारजन एवं शुभचिंतक आक्रोशित हैं, उद्वेलित है और आंदोलन की राह पर है । बार-बार धरना, प्रदर्शन, सद्बुद्धि यज्ञ, ज्ञापन और सीएमआर में मिले आश्वासन के बावजूद तथा शाला दर्पण पोर्टल पर 85000 तबादला आवेदन लिए जाने के बावजूद 2 साल गुजर जाने के बाद भी तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादले नहीं करना के कारण तृतीय श्रेणी शिक्षक संवर्ग में खासी नाराजगी है और इनकी इस नाराजगी के उफान/चक्रवात में सरकार को भी काफी नुकसान झेलना पड़ सकता है । 

वहीं दूसरी ओर उन डार्क जोन वाले सीमावर्ती जिलों, जहां पर शिक्षकों का पहले से ही टोटा है, उनमें से तबादला किए जाने के अंदेशे से वहां के जनप्रतिनिधि सरकार परतबादले नहीं किए जाने का दबाव बनाए हुए हैं और  दूसरी ओर लंबे समय से बनवास काट रहे शिक्षकों को उनके गृह जिले से संबंधित जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्रों में लाने का दबाव बनाए हुए हैं । ऐसे में सरकार के समक्ष एक तरफ कुआं तो दूसरी तरफ खाई वाली स्थिति है ।

शिक्षक नेता कैलाश सामोता रानीपुरा का कहना है कि सरकार लगातार और बार बार अन्य राज्यों की तबादला नीति का अध्ययन कर जल्द तबादले आरंभ करने की बात कह रही हैं, तो कभी प्रभारी मंत्री और शिक्षा मंत्री अपने रोज-रोज बयान जारी कर रहे हैं जिससे सरकार और सरकार के जिम्मेदार मंत्रियों प्रशासनिक अधिकारियों पर से तृतीय श्रेणी शिक्षक संवर्ग का विश्वास उठ गया है तथा तबादला प्रक्रिया आरंभ नहीं करने की स्थिति में सरकार की मंशा पर सवाल उठना लाजमी भी है । जबकि अन्य शिक्षक संवर्गों जैसे वरिष्ठ अध्यापक, प्राध्यापक, प्रिंसिपल एवं शिक्षा अधिकारियों के तबादले बिना मांग किए दो से तीन बार किए जा चुके हैं, जो शिक्षक संवर्गो में भेद करने का भाव है । 

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार शिक्षा निदेशालय, बीकानेर द्वारा तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादलों के लिए 21 सूत्री गाइडलाइन बनाई गई है, जिसका प्रस्ताव अभी सरकार के पास ठंडे बस्ते में पड़ा है । वहीं दूसरी ओर शिक्षकों के चंदे को चाटकर अपनी सस्ती राजनीति चमकाने में माहिर, सत्ता की गोद में खेलने वाले खरपतवार रूपी कुछ शिक्षक संगठन तथा उनके स्वयंभू शिक्षक नेता तबादलों को लेकर सोशल मीडिया पर कैंपेन चला रहे हैं तथा धरने प्रदर्शन की बात कह रहे हैं जो प्रदेश के लाखों तृतीय श्रेणी शिक्षकों को ठगने के षड्यंत्र का ही हिस्सा है । 

प्रदेशभर के अधिकांश तृतीय श्रेणी शिक्षको भी यही कहना है कि प्रदेश के बहुसंख्यक तृतीय श्रेणी शिक्षक संवर्ग के पास अपना कोई शिक्षक संगठन नहीं है । लेकिन, अब तक का सबसे बड़ा प्रदर्शन और मुख्यमंत्री आवास पर आमंत्रण और आश्वासन वाले कार्यक्रम ने तृतीय श्रेणी शिक्षक संवर्ग की शक्ति का आभास करवा दिया है । हमें यह नहीं समझ में आ रहा है कि सरकार पर ऐसा कौन सा दबाव है, जो इस सबसे बड़े शिक्षक संवर्ग की संख्या लगभग तीन लाख है, को तबादलों से वंचित रखा जा रहा है ? इस संवर्ग का दमन, कोई शिक्षक संगठन या कोई सरकार नहीं कर पाएगी । जिस प्रकार से अरब सागर से उठे बिपरजॉय चक्रवात को कोई सरकार नहीं रोक सकती, उसी प्रकार तृतीय श्रेणी शिक्षको के हक एवं अधिकारों को कोई नहीं छीन सकता । इसलिए सरकार को चाहिए बिना किसी भेदभाव के, बिना किसी लेनदेन के, बिना किसी दबाव व प्रभाव के परीक्षाकाल पूर्ण कर चुके सभी तृतीय श्रेणी शिक्षकों की तबादला प्रक्रिया आरंभ की जाए और उन्हें अपने अपने गृह जिले के उचित स्थान पर पदस्थापित करवाया जाए । साथ ही साथ ही झोलाछाप शिक्षक संगठनों की आड में और सत्ता के तलवे चाटने में माहिर उन शिक्षकों को भी जिला बदर किया जाए जो लंबे समय से जिला मुख्यालयों, नगर निकायों, नगर परिषद, नगर निगमों तथा नागरपालिकायो में जमे हुए हैं। 

शिक्षक नेता बाबूलाल ऐचरा, कालवाड़, जयपुर ने कहा है यदि तबादला प्रक्रिया में भेदभाव बरता गया तो हम और अधिक बनवास काट लेंगे, हम बिना तबादलों के रह जाएंगे, लेकिन सरकार का तबादला जरूर करवाकर दम लेंगे । ऐचरा ने आरोप लगाया है कि क्या मंत्री, विधायकों तथा अन्य छुटभैया नेताओं में जनप्रतिनिधियों के पास केवल एक ही काम शेष रह गया है कि तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादलों के लिए डिजायर करें ? क्या, प्रदेश की आम जनता के सारे काम और मांगे पूरी कर दी गई है, जो इनकी इन तबादलों में इतनी रुचि है ? 

शिक्षक नेता सूरजमल मीणा, कानपुरा, चौमू, जयपुर ने मांग की है कि शिक्षा निदेशालय, बीकानेर द्वारा जारी तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादला 21 सूत्रीय गाइडलाइन में पति पत्नी प्रकरण अथवा जो पति पत्नी दोनों शिक्षक या राजकीय कर्मचारी हैं, उन्हें इच्छित स्थान पर तबादला का अधिकार मिले ।  उस बिंदु को नहीं रखा गया है, जो प्रशासनिक अधिकारियों की कुटिलता का परिचायक है । इसलिए 21 सूत्रीय लाइन में जो पति एवं पत्नी दोनों राजकीय सेवा में है, उनको  तबादलो के बनी गाइडलाइन में शामिल किया जावे ।

इनका कहना है......

शिक्षा विभाग में विशेषकर तृतीय श्रेणी शिक्षक संवर्ग की विगत 3 वर्षों से पदोन्नतिया लंबित चल रही है जिसके कारण लगभग हर संभाग में 15000 शिक्षक पदोन्नति से वंचित चल रहे हैं, वही सरकार दूसरी ओर तबादलों से परहेज कर रही है ।इसलिए सरकार को चाहिए कि समयबद्ध पदोन्नति और स्थानांतरण प्रक्रिया को आरंभ करवाएं।

भोलूराम जाट, शिक्षक नेता, दूदू, जयपुर

इनका कहना है.....

प्रदेश सरकार को चाहिए कि टीएसपीएम नॉन टीएसपी के प्रकरण का समाधान कर, बगैर किसी नीति के परीक्षा कार्य पूर्ण कर चुके सभी शिक्षकों के लिए तबादला प्रक्रिया आरंभ करें । अन्यथा, सरकार को इसका भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है ।

सुनील विश्नोई, शिक्षक नेता, खींवसर, नागौर

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