धूमधाम से मनाया गुरु हुजूर स्वामी जी महाराज का जन्मोत्सव

जीवन अनमोल है , इसे आत्महत्या कर नष्ट नहीं करें !

सुबह की शुरुआत माता-पिता के चरण स्पर्श से करें !

अब सिर्फ 150 रुपए में साल भर घर मंगवाएँ "संस्कार सृजन" न्यूज़ पेपर ! 

संस्कार सृजन राम गोपाल सैनी 

चौमूं / जयपुर (संस्कार सृजन) राधा स्वामी सत्संग सहजो चौमूं ट्रस्ट डेरा बाबा मेघादास जी महाराज की तपोभूमि पर राधास्वामी मत के आदि गुरु हुजूर स्वामी जी महाराज का जन्मोत्सव संत सेवादास महाराज ने संगत व नई पीढ़ी के साथ केक काटकर बहुत ही खुशी से मनाया |


सत्संग में संत सेवादास महाराज ने प्रवचनों के दौरान फरमाया कि आज ही के दिन राधास्वामी मत के आदि गुरु हुजूर महाराज का जन्म 25 अगस्त सन 1818 को पन्नी गली आगरा उत्तर प्रदेश में हुआ था | आज के इस समय में हर जीव को किसी ने किसी प्रकार की मानसिक समस्या से ग्रस्त है | उसे इस लौकिक युग में कहीं भी इस प्रकार की कोई सांत्वना देने वाला कोई आस्था का केंद्र नहीं मिल पाया | जिस कारण जीव का मन बहुत ही विचलित रहता है | इसकी तलाश में वह हर जगह घूमता रहता है | जीव को परम शांति एवं आध्यात्मिक उन्नति के लिए संत महात्माओं के सत्संग में जाने से उसको कुछ राहत महसूस होती है |

लौकिक युग में जीव की मानसिक शांति के लिए संत महात्माओं के सानिध्य एवं सत्संग में होकर यह मार्ग निकलता है |राधास्वामी धरा रूप जगत में, गुरु होय जीव चिताये | जिन जिन माना वचन समझ के उनको संग लगाएं |

आध्यात्मिकता की पहली सीढ़ी संत - महात्माओं के सत्संग से शुरू होती है | जीव का सत्संग में जाने से इस लौकिक युग की वास्तविकता का पता लगता है |

कोई आवे भाव ले कोई आवे अभाव,साध दोउ को पोषते भाव गिने न अभाव | फिर जीव के मन में एक तड़प पैदा होती है | यह तड़प संत महात्माओं के शरण में जाने से शांत होती है | तन और मन के बुखार होने पर शरीर लाचार हो जाता है | जैसे हमें अपने घर में रोशनी के लिए बिजली का कनेक्शन लेना चाहते हैं तो है तो विद्युत विभाग में आवेदन करना पड़ता है | उसके पश्चात वह अपने मुख्य ग्रेड से अपना तार जोड़कर आवेदक के घर पर कनेक्शन कर बिजली के द्वारा रोशनी जला देते हैं, इस प्रकार आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी वक्त गुरु की शरण में जाकर नाम दान की प्रक्रिया करनी होती है बताये गई रास्ते के अनुस रण के पश्चात हमारे आत्मा का रूहानी मंडलों की तरफ सफर करना आसान हो जाता है | 

जब मलिक के नाम की तड़प होती है तो यह सब दुविधा मालिक की शरण में जाने से मिट जाती है | वक्त गुरु की शरण में जाने से जीव के मन में उठने वाले प्रश्न स्वतः ही समाप्त हो जाते हैं | हमारा प्रेम गुरु की प्रति एक चकोर की भांति होना चाहिए | स्वाति बूंद जस रटत पपीहा, अस धुन नाम लगाएं | पापिहे की भांति हमें नाम की रट की आदत बनानी चाहिए |

 जिस प्रकार हमें यात्रा करनी होती है तो निर्धारित स्थान के लिए हमें टिकट बनवाना पड़ता है | इस प्रकार हमारा मन सत्संग में जाने से मन निर्मल होता जाता है, जब जीव धीरे-धीरे पात्र बन जाता है तो वक्त गुरुद्वारा नाम की दीक्षा प्रदान की जाती है | 

 भेद मोहि गुप्त दिया जब ही, हरे मेरे मन बुद्धि तब ही | जब मा लिक शब्द का भेद देता है तो उसके मन व बुद्धि को हर लेता है जिसके द्वारा जीव की आध्यात्मिक उन्नति का द्वार खुलता है | गुरुद्वारा दिए गए शब्दों का भजन, सुमिरन, ध्यान के माध्यम से किया जाता किया जाता है जिससे जीव के रूहानी मंडलों का गुरुद्वारा बतायी गयी युक्ति के निरंतर अभ्यास से हमारा मन सांसारिक लज्जतों को छोड़कर गुरुद्वारा बताए गए मार्ग का अनुसरण कर अपनी आध्यात्मिक उन्नति को धीरे-धीरे आगे बढ़ता है | जिस प्रकार बैंक में खाता खोलने के बाद हम अपना पैसा उसमें जमा करते हैं तो वह हमारा बैंक बैलेंस होता है | इसी प्रकार परमात्मा के नाम की जितनी हम भजन सुमिरन ध्यान एवं अभ्यास के माध्यम से जितना समय मालिक की प्रार्थना में देते हैं वह हमारे खाते में जुड़ता है |

हमारे जीव की ऐसी अवस्था होनी चाहिए, कबीर मन निर्मल भया जैसी गंगा नीर, पाछे पाछे हरि फिरे कहत कबीर कबीर |

सत्संग में जाने से जीव के हमारे मन के साथ जो काम क्रोध लोभ मोह अहंकार ईर्ष्या की अधिकता का प्रभाव हमारे मन पर होता है, परंतु सत्संग में जाने से इनकी परिणीति शील, क्षमा,संतोष, दया एवं प्रेम में हो जाती है | जिससे आचार व्यवहार में निर्मलता व सौम्यता आती है |

संत महात्माओं ने कहा है कि बड़े भाग मानुष तन पावा, कोटी जन्म जब भटका खावा, बडे भाग्य से हमें यह मानव जन्म मिला है | इसे हमें वृथा नहीं खोना चाहिए, जो इस संसार में समस्त योनियों में सर्वश्रेष्ठ कृति माना गया है, और मालिक ने इसमें एक विशेष अतिरिक्त विशेषता प्रदान की है जिसे विवेक कहते है इसे मलिक की भक्ति में लगाने से हमारा लोक एवं परलोक दोनों सुधारते हैं | एक जन्म गुरु भक्ति कर जन्म दूसरे नाम, जन्म तीसरे मुक्ति मुक्ति पद, चौथे में निज धाम | हमारा यह शरीर एक कल्पवृक्ष की भांति है इसमें हम जैसा विचार करेंगे वैसे ही हमें फल की प्राप्ति होती है |

कार्यक्रम में हजारों की संख्या में संगत व श्रद्धालुओं ने पंगत प्रसादी की | यह जानकारी राधा स्वामी कोऑर्डिनेटर गुरचरण सैनी ने दी |


किसी भी कार्यक्रम को लाइव दिखाने के लिए संपर्क करें - 921499625870144685129587061004.

बहुत जरूरी सूचना :- शिपिंग और लॉजिस्टिक

दर्शनशास्त्र

1. रात को दुर्घटना से बचने के लिए अपनी गाड़ी को लो बीम में चलाएँ !

2. खुले कुओं और नलकूप को जल्द से जल्द बंद करवाएं !

हमसे जुड़े :-

Facebook :- https://www.facebook.com/RamGopalSainiofficial

Tweeter :- https://twitter.com/RamgGopal

Instagram :- https://www.instagram.com/ram_gopalsaini/

Youtube :- https://www.youtube.com/channel/UCDNuBdPbTqYEOA-jHQPqY0Q


1. हम सभी किसी ना किसी रूप में जरूरतमंदो की सेवा कर सकते हैं | 

2. पड़ोसी भूखा नहीं सोए इसका ध्यान रखें |
वीडियो साझाकरण

3. जीवन में आप इस धरती पर अपने नाम का एक पेड़ जरूर लगाएँ |

4. बेजुबानों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था जरूर करें !

विडियो देखने के लिए -https://www.youtube.com/channel/UCDNuBdPbTqYEOA-jHQPqY0Q 

अपने आसपास की खबरों , लेखों और विज्ञापन के लिए संपर्क करें - 9214996258, 7014468512,9929701157.सब्सक्रिप्शन बेचें

टीवी और वीडियो

टीवी शो स्ट्रीम


ज़्यादा जानें
फ़िल्में
विज्ञापन और मार्केटिंग
राजनीति

इमरजेंसी नंबर :- पुलिस कंट्रोल रूम- 100, चौमूं थाना - 01423-221009, डीसीपी पूर्व- 0141-2203400, एसीपी चौमूं -01423-221456, गोविंदगढ़ थाना-01423-230023, डीएसपी गोविंदगढ़-01423-230905, जयपुर ग्रामीण एसपी-0141-2206869, एंबुलेंस-108, सीएचसी चौमूं -01423-221424, सीएचसी गोविंदगढ़ - 01423-230077, सीएचसी सामोद-01423-240105, बिजली हेल्पलाइन-6376917467, एक्स ईएन चौमूं-01423-220069

Post a Comment

0 Comments