भारतीय मार्शल आर्ट थांग-ता अब NCERT के पाठ्यक्रम में

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संस्कार सृजन राम गोपाल सैनी 

जयपुर (संस्कार सृजन) भारतीय मार्शल आर्ट थांग-ता अब NCERT के पाठ्यक्रम में शामिल कर ली  गयी है | राजस्थान थांग ता स्टेट एसोसिएशन राजस्थान में हर्ष की लहर है | थांग ता स्टेट एसोसिएशन राजस्थान की सचिव कोमल कंवर ने बताया कि भारतीय स्वदेशी खेलों और मार्शल आर्ट की दुनिया से एक बहुत ही गौरवशाली खबर सामने आई है। मणिपुर की प्राचीन और विश्व प्रसिद्ध युद्ध कला 'थांग-ता' (Thang-Ta) को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) द्वारा कक्षा नौवीं की शारीरिक शिक्षा (Physical Education) की पाठ्यपुस्तक में शामिल कर लिया  गया है। इस उपलब्धि पर थांग-ता स्टेट एसोसिएशन राजस्थान ने खुशी जाहिर करते हुए इसे खेल के भविष्य के लिए एक क्रांतिकारी कदम बताया है।

थांग-ता की उत्पत्ति और इतिहास :-

थांग-ता की उत्पत्ति उत्तर-पूर्व भारत के मणिपुर में हुई मानी जाती है। यह प्राचीन युद्ध कला मैतेई योद्धाओं द्वारा विकसित की गई थी, जिसमें तलवार (Thang) और भाला (Ta) के उपयोग से युद्ध कौशल सिखाया जाता था।

इतिहासकारों के अनुसार, यह कला सदियों पुरानी है और इसे पहले राज्य की रक्षा और युद्ध प्रशिक्षण के लिए प्रयोग किया जाता था। बाद में यह धीरे-धीरे आत्मरक्षा, फिटनेस और खेल के रूप में विकसित हुई। आज यह भारत की प्रमुख पारंपरिक मार्शल आर्ट्स में से एक बन चुकी है।

राष्ट्रीय स्तर पर विकास :-

देश में  थांग ता के प्रचार-प्रसार के लिए 31 राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं (National Championships) आयोजित की जा चुकी हैं। अलग-अलग राज्यों के हजारों खिलाड़ी इसमें भाग ले रहे हैं

राजस्थान भी लगातार अपनी मजबूत भागीदारी दर्ज करा रहा है :-

-SGFI, AIU और Khelo India में थांग ता 

-School Games Federation of India (SGFI)

-स्कूल स्तर पर थांग- ता को 2011 में शामिल कर लिया गया था 

- Association of Indian Universities (AIU)

कॉलेज और यूनिवर्सिटी स्तर पर भी थांग- ता को इसी सत्र मैं शामिल किया गया है | इसकी प्रतियोगिताएं 6 से 9 अप्रैल को मणिपुर यूनिवर्सिटी इंफाल मणिपुर में आयोजित की गई थी जिसमें कि प्रदेश की 7 यूनिवर्सिटी ने भाग लिया था और 2 गोल्ड , 6 सिल्वर , 16 ब्रोंज मेडल सहित कुल 24 मेडल अपने नाम किए ।

खेलो इंडिया :-

Khelo India के तहत पारंपरिक खेलों को बढ़ावा दिया जा रहा है। 2021 से थांग ता को खेलो इंडिया में शामिल है | अब तक खेलो इंडिया में थांग ता खेल से राजस्थान के 20 से भी ज्यादा बच्चे भाग ले चुके हैं |  ट्रेनिंग, स्कॉलरशिप, राष्ट्रीय मंचजैसी सुविधाएं मिल रही हैं।

प्रदेश सचिव कोमल कंवर ने कहा कि “NCERT की किताब में शामिल होना हमारे लिए ऐतिहासिक कदम है। इससे स्कूल स्तर पर लाखों बच्चे इस खेल से जुड़ेंगे और आत्मरक्षा के साथ अनुशासन भी सीखेंगे।”

प्रदेश अध्यक्ष ललिता कुछल ने कहा कि “थांग-ता  हमारी सांस्कृतिक धरोहर है। अब हम इसे राजस्थान के हर जिले तक पहुंचाने और राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत पहचान दिलाने के लिए काम करेंगे।”

प्रदेश टेक्निकल डायरेक्टर उम्मेद सिंह शेखावत ने कहा कि “यह खेल शरीर, मन और तकनीक का अद्भुत संगम है। यह खेल SGFI, AIU और Khelo India में शामिल  है, जिससे कि देश के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए चैंपियन त्यार हो रहे हैं | साथ ही एनसीईआरटी फिजिकल एजुकेशन विभाग को में बहुत-बहुत धन्यवाद देना चहूंगा कि उन्होंने भारतीय पारंपरिक खेल जैसे थांग ता, मलखंभ, गतका , योगासन ओर कल्लेरिपट्टू को शामिल किया |

थांग-ता स्टेट एसोसिएशन राजस्थान ने घोषणा की है कि राज्यभर में स्कूल और कॉलेज ट्रेनिंग कैंप लगाए जाएंगे |खिलाड़ियों को नेशनल और इंटरनेशनल स्तर के लिए तैयार किया जाएगा | सरकार से इस खेल को अधिकृत मान्यता और समर्थन दिलाने के प्रयास तेज़ किए जाएंगे | जल्द ही जयपुर में रेफरी सेमिनार और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताएं कराई जाएगी जिससे कि राज्य में खेल का विकास हो और अच्छे खिलाड़ी तैयार हो।


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