महिलाओं को समानता और समान अवसर ही महिला सशक्तिकरण की दिशा में निर्णायक कदम होगा - डॉ राकेश वशिष्ठ

जीवन अनमोल है , इसे आत्महत्या कर नष्ट नहीं करें !

सुबह की शुरुआत माता-पिता के चरण स्पर्श से करें !

अब सिर्फ 150 रुपए में साल भर घर मंगवाएँ "संस्कार सृजन" न्यूज़ पेपर ! 

संस्कार सृजन राम गोपाल सैनी 

जयपुर (संस्कार सृजन) महिलाओं को सशक्त बनाने की बातें तब बेमानी हो जाती हैं जब घर और कार्यस्थल में महिलाओं के साथ अधिकारों और कार्य क्षमता के आधार पर भेदभाव किया जाता है क्योंकि समाज पुरुष प्रधान है या पुरुष प्रधान मानसिकता के साथ हम महिला सशक्तीकरण की बात करते हैं जबकि धरातल पर कुछ और ही होता है इस बारे में चिंतन करने की आवश्यकता है। 

पूरी दुनिया में 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है. यह दिवस शिक्षा-प्रशिक्षण, रोजगार, वेतन-मानदेय, राजनीति, विज्ञान सहित अन्य सेक्टरों में महिलाओं की बराबरी के लिए आवाज बुलंद करने का दिन है. महिलाओं के विकास और बराबरी के रास्ते में आने वाली चुनौतियों को अवसरों में बदलकर सभी के लिए बेहतर भविष्य बनाने के लिए एकजुट होने का समय है |

हर साल 8 मार्च को पड़ने वाले अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर, आमतौर पर दुनिया भर में महिलाओं को बहु-कार्य करने की क्षमता या अपने घर को संभालने के बाद कमाई के साथ-साथ सामाजिक जीवन में पुरुषों के साथ समानांतर खड़े होने के प्रयास के लिए सम्मानित किया जाता है। बहुत कुशलता से और धैर्य से काम करें. लेकिन यहां उजागर करने वाला दुखद हिस्सा वही है, समानता के लिए उनकी लड़ाई और समानता के लिए उनकी मांग। 

जैसा कि हम विभिन्न क्षेत्रों में सांस्कृतिक, राजनीतिक और सामाजिक-आर्थिक महिलाओं द्वारा की गई उपलब्धियों को देखते हैं, यह दिन एक ऐसे समाज के लिए एक स्पष्ट आह्वान के रूप में भी कार्य करता है जो लिंग पूर्वाग्रह, रूढ़िवादिता और भेदभाव से मुक्त होना चाहिए और विविधता, समानता और समावेशन को महत्व देगा। बजाय। महिलाएं कई दशकों से समानता की मांग कर रही हैं और इस साल अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की कैंपेन थीम इंस्पायर इंक्लुजन है |

इंस्पायर इंक्लुजन का अर्थ है महिलाओं के महत्व को समझने के लिए लोगों को जागरूक करना | इस थीम का अर्थ महिलाओं के = लिए एक ऐसे समाज के निर्माण को बढ़ावा देना भी है | जहां महिलाएं खुद को जुड़ा हुआ महसूस कर सकें, सशक्त महसूस कर सकें | अगर किसी क्षेत्र विशेष में, जैसे किसी कंपनी में महिलाएं नहीं हैं, तो इंस्पायर इंक्लुजन कैंपेन के तहत मकसद यह है कि पूछा जाए कि अगर महिलाएं नहीं हैं तो क्यों नहीं हैं | 

अगर महिलाओं के साथ किसी तरह का भेदभाव हो रहा है तो उस भेदभाव को खत्म करना जरूरी है | अगर महिलाओं के साथ अच्छा बर्ताव नहीं होता है तो उसके खिलाफ कदम उठाना जरूरी है और यह हर बार करना जरूरी है | यही इंस्पायर इंक्लुजन है | इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की धीम इंस्पायर इंक्लुजन है, जो एक कदम आगे बढ़‌कर परिणामों की अधिक निष्पक्षता प्राप्त करने की आवश्यकता के आधार पर विभिन्न स्तरों के समर्थन की पेशकश करने को संदर्भित करता है। 

फइक्विटी सिर्फ एक अच्छा साधन नहीं है, बल्कि इसका होना जरूरी है। समानता का अर्थ है प्रत्येक व्यक्ति या लोगों के समूह को समान संसाधन या अवसर दिए जाएं। समानता मानती है कि प्रत्येक व्यक्ति की परिस्थितियों अलग-अलग होती हैं और समान परिणाम तक पहुँचने के लिए आवश्यक सटीक संसाधनों और अवसरों का आवंटन करती है, अंतर्राष्ट्रीय महिला वेबसाइट नोट करती है।

जबकि महिलाएं वर्षों से दुनिया भर में समानता और समानता की मांग कर रही है, भारत में चीजें अलग नहीं हैं जहां पुरुषों और महिलाओं के बीच राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक प्रणालियों में अंतर्निहित संबंधों, विश्वासों और मूल्यों की प्रणाली पितृसत्तात्मक है। यह लैंगिक असमानता की संरचना करता है। यह पुरुषों को सत्ता और प्रतिष्ठा वाले पदों पर रहने की इजाजत देता है, भले ही महिलाएं कितनी ही सफल क्यों न हों। 

कहने को तो इन दिनों भारत में पुरुषों और महिलाओं को समान नौकरी के अवसर दिए जाते हैं, लेकिन पुरुषों को महत्व दिया जाता है और उन्हें महत्वपूर्ण कार्य सौंपे जाते हैं, उन्हें अधिक भुगतान किया जाता है, उनकी राय को अधिक महत्व दिया जाता है, और वे अपने लिंग के कारण अधिक विशेषाधिकारों का आनंद लेते हैं। 

दूसरी ओर, महिलाओं को अक्सर ऊपर बताए गए हर मायने में कम महत्व दिया जाता है और अगर उन्हें काम पर पदोन्नति मिलती भी है तो उन्हें चरित्रहीन माना जाता है। जहां नौकरी पर रखते समय महिलाओं से अक्सर उनकी शादी और बच्चों की योजना के बारे में पूछा जाता है, वहीं पुरुषों से कभी ऐसा नहीं पूछा जाता। इसके अलावा यह भेदभावपूर्ण और निजता का घोर हनन है, यह अंतर्निहित पितृसत्तात्मक मानसिकता को भी दर्शाता है कि विवाह योग्य या बच्चे पैदा करने की उम्र वाली महिलाएं बच्चा पैदा करने के लिए कुछ महीनों, वर्षों तक नहीं रह पाती हैं और इसलिए परियोजनाओं से वंचित रह जाती हैं। 

कहीं तो शादी शुदा लड़कियों को नौकरी मिलना मुश्किल हो जाति है यां मिल भी गई तो प्रमोशन में कठिनाई आती है ऐसी नौकरी मिलना कठिन हो जाती है जहाँ उनका करियर संवर सकता हो। घर पर भी उनकी कहानी अलग नहीं है. वास्तव में, जो लोग कार्यालयों में काम नहीं करना चुनते हैं, उन्हें बड़े संप्रदायों में असमानता का सामना करना पड़ता है। उन्हें महत्व नहीं दिया जाता, उनके विचारों और राय पर विचार नहीं किया जाता और उन्हें केवल काम के बोझ के चश्मे से देखा जाता है। 

हां, भारत में अब भी ऐसा होता है और एक भारतीय होने के नाते मुझे आसपास महिलाओं के साथ हो रहे इस अन्याय पर शर्म आती है। हमने प्रगति की है, लेकिन समाज अभी भी पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग- अलग नैतिकता और मूल्य रखता है। वर्तमान में जिस तरह से लिंग की संरचना की गई है वह एक गंभीर अन्याय है। 

जब हम एक बेहतर समाज की कल्पना करते हैं जहां पुरुषों और महिलाओं के साथ समान व्यवहार किया जाता है, तो हमें अपनी लड़कियों और बेटों का समान रूप से पालन-पोषण करना चाहिए। हम अपने बेटों के मन में असुरक्षा और भय का भय पैदा करके उनके साथ अन्याय करते हैं। यहां इस सभी बिंदुओं को जेहन में रख गुढ़ता से विचार करना चाहिए कि वास्तव में नारी सशक्तिकरण तभी धरातल पर उतरेगा जब हम अपनी पुरुष प्रधान मानसिकता को त्याग महिलाओं को मुख्य धारा से सभी क्षेत्रों में समानता के साथ जोड़ें। 

आलेखः डॉ राकेश वशिष्ठ

किसी भी कार्यक्रम को लाइव दिखाने के लिए संपर्क करें - 9214996258,7014468512,9587061004.

सब्सक्रिप्शन बेचें

बहुत जरूरी सूचना :- 

1. रात को दुर्घटना से बचने के लिए अपनी गाड़ी को लो बीम में चलाएँ !

2. खुले कुओं और नलकूप को जल्द से जल्द बंद करवाएं !

हमसे जुड़े :-

Facebook :- https://www.facebook.com/RamGopalSainiofficial

Tweeter :- https://twitter.com/RamgGopal

Instagram :- https://www.instagram.com/ram_gopalsaini/

Youtube :- https://www.youtube.com/channel/UCDNuBdPbTqYEOA-jHQPqY0Q


1. हम सभी किसी ना किसी रूप में जरूरतमंदो की सेवा कर सकते हैं | 

2. पड़ोसी भूखा नहीं सोए इसका ध्यान रखें |

3. जीवन में आप इस धरती पर अपने नाम का एक पेड़ जरूर लगाएँ |

4. बेजुबानों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था जरूर करें !

विडियो देखने के लिए -https://www.youtube.com/channel/UCDNuBdPbTqYEOA-jHQPqY0Q 

अपने आसपास की खबरों , लेखों और विज्ञापन के लिए संपर्क करें - 9214996258, 7014468512,9929701157.

सब्सक्रिप्शन बेचें

ज़्यादा जानें
धर्म चर्चा
टेक्नोलॉजी अपडेट
वेब सीरीज़ सब्सक्रिप्शन
स्वास्थ्य टिप्स
टेक्नोलॉजी गैजेट्स
मौसम अपडेट
क्रिकेट उपकरण
समाचार सदस्यता
विज्ञापन सेवाएँ
हास्य पुस्तक

इमरजेंसी नंबर :- पुलिस कंट्रोल रूम- 100, चौमूं थाना - 01423-221009, डीसीपी पूर्व- 0141-2203400, एसीपी चौमूं -01423-221456, गोविंदगढ़ थाना-01423-230023, डीएसपी गोविंदगढ़-01423-230905, जयपुर ग्रामीण एसपी-0141-2206869, एंबुलेंस-108, सीएचसी चौमूं -01423-221424, सीएचसी गोविंदगढ़ - 01423-230077, सीएचसी सामोद-01423-240105, बिजली हेल्पलाइन-6376917467, एक्स ईएन चौमूं-01423-220069 

Post a Comment

0 Comments