विज़न 2030: एजुकेशन एंड बिज़नेस लीडरशिप समिट का हुआ भव्य आयोजन

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संस्कार सृजन राम गोपाल सैनी 

नई दिल्ली  (संस्कार सृजन) देश की राजधानी में स्थित पाँच सितारा ली मेरिडियन के सभागार में नेशनल एजुकेशन कॉन्क्लेव: विज़न 2030 – एजुकेशन एंड बिज़नेस लीडरशिप समिट का भव्य आयोजन किया गया। यह सम्मेलन एजुकेशन डेवलपमेंट रिसर्च एंड सीएसआर रिसर्च फाउंडेशन, स्कॉटिश हाइलैंड्स यूनिवर्सिटी (यूके) और फेम फाइंडर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ। 

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के प्रभावी क्रियान्वयन, शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, संस्थानों की पहुंच का विस्तार, अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग, स्किल डेवलपमेंट में नवाचार, इंडस्ट्री-रेडी पाठ्यक्रम और रोजगारोन्मुखी वर्कफोर्स के निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर राष्ट्रीय स्तर पर विचार-मंथन करना था।

इस अवसर पर कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रणव कुमार, नेशनल स्मॉल इंडस्ट्री कॉरपोरेशन दिल्ली के जोनल हेड, जयपुरिया स्कूल ऑफ बिजनेस के डॉ. तपन कुमार नायक, भाजपा सीए प्रकोष्ठ नई दिल्ली के चेयरमैन सीए डीडी अग्रवाल, भाजपा नई दिल्ली (एमवी) के वाइस प्रेसिडेंट एडवोकेट मोहित कुमार शर्मा, डॉ. अमित भारद्वाज निदेशक, सीपीजे ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन), डॉ. नैनसी जुनेजा (सीईओ, मेंटोर एक्स), सूर्यकांत सारथी राय, डॉ. अनूप मित्तल ,वरिष्ठ पत्रकार मानवेंद्र कुमार ,मनीष सिंहा ,परविंदर सिंह सहित अनेक इंडस्ट्री एवं एकेडमिक लीडर्स, स्टार्टअप इनोवेटर्स और नीति विशेषज्ञ आमंत्रित किए गए ।

कोटा शिक्षा नगरी से आमंत्रित युवा मैनेजमेंट विश्लेषक और प्रख्यात पब्लिक पॉलिसी एक्सपर्ट डॉ. नयन प्रकाश गांधी ने गेस्ट ऑफ ऑनर और की नोट स्पीकर  एवं टेक्निकल सेशन पैनलिस्ट के रूप में कार्यक्रम में शिरकत की और अपने विचार प्रस्तुत किए एवं पेनल डिस्कशन में भी सहभागिता की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि लगभग सर्वाधिक युवा लाभांश के साथ भारत विश्व की सबसे बड़ी डेमोग्राफिक शक्ति है। 

यदि विश्वविद्यालय, महाविद्यालय, शिक्षाविद और उद्योग जगत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के विज़न के अनुरूप समन्वित प्रयास करें, तो भारत पुनः ज्ञान और बौद्धिक नेतृत्व का वैश्विक केंद्र बन सकता है। अपने प्रस्तुतीकरण में डॉ. गांधी ने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना और PM-SETU (पीएम सेतु) जैसी पहलों की सराहना करते हुए भारत को डेमोग्राफिक डिविडेंड से स्किल डिविडेंड की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए तीन महत्वपूर्ण नीतिगत सुझाव प्रस्तुत किए।

पहला सुझाव – “जिला कौशल कंसोर्टियम (District Skill Consortium – DSC)” डॉ. गांधी ने कहा कि प्रत्येक जिले में स्थानीय उद्योग, आईटीआई और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से एक जिला कौशल कंसोर्टियम बनाया जाना चाहिए। यह कंसोर्टियम क्षेत्रीय उद्योगों की आवश्यकता के अनुसार पाठ्यक्रम तैयार करेगा, जिससे प्रशिक्षण सीधे रोजगार से जुड़ सके और युवाओं को स्थानीय स्तर पर बेहतर अवसर मिलें।

दूसरा सुझाव – “डिजिटल आर्मी ऑफ इंडिया”

उन्होंने दस लाख युवाओं की ‘डिजिटल आर्मी’ तैयार करने का सुझाव दिया। यह युवा शक्ति गांवों के डिजिटलीकरण, डिजिटल सेवाओं के विस्तार और तकनीकी सशक्तिकरण के माध्यम से ग्रामीण भारत को आधुनिक बनाएगी। साथ ही इन युवाओं को इस कार्य के बदले अकादमिक क्रेडिट भी प्राप्त हो सकेगा।

तीसरा सुझाव – “यूनिवर्सल स्किल पासपोर्ट”

डॉ. गांधी ने राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क को और प्रभावी बनाने के लिए “यूनिवर्सल स्किल पासपोर्ट” की अवधारणा रखी। इसके अंतर्गत युवाओं के कौशल और कार्य-अनुभव को डिजिटल वॉलेट आधारित क्रेडिट सिस्टम में दर्ज किया जाएगा, जिससे डिग्री के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल को भी समान महत्व मिल सके। डॉ.गांधी ने कहा कि यदि इन नवाचारों को प्रभावी रूप से लागू किया जाए तो भारत का डेमोग्राफिक डिविडेंड वास्तविक “स्किल डिविडेंड” में परिवर्तित हो सकता है। उनके द्वारा प्रस्तुत ‘थ्री-पिलर मॉडल’ को सम्मेलन में उपस्थित शिक्षाविदों, उद्योग प्रतिनिधियों और नीति-निर्माताओं ने सराहा।

अपने संबोधन में डॉ. गांधी ने युवाओं और पेशेवरों के लिए सफलता का एक व्यावहारिक ब्लूप्रिंट भी प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति या संस्था की सफलता तीन मूलभूत सिद्धांतों पर आधारित होती है—Dedication (समर्पण), Discipline (अनुशासन) और Determination (दृढ़ संकल्प)। उन्होंने छात्रों, युवा उद्यमियों और कॉरपोरेट प्रोफेशनल्स को SMART तकनीक अपनाने की सलाह दी, जिसमें लक्ष्य स्पष्ट, मापनीय, प्राप्त करने योग्य, प्रासंगिक और समयबद्ध होना चाहिए।

डॉ. गांधी ने यह भी कहा कि किसी भी बड़े प्रोजेक्ट को सफल बनाने के लिए मिनट-टू-मिनट प्लानिंग, डेली, वीकली, मंथली, क्वार्टरली और एनुअल स्ट्रेटेजिक प्लानिंग आवश्यक होती है। इसी अनुशासित योजना से बड़े लक्ष्य प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने भारतीय युवाओं को एक महत्वपूर्ण संदेश देते हुए कहा कि हमें दूसरों की नकल करना बंद करना होगा। उनके अनुसार, “ईश्वर ने हर व्यक्ति को विशिष्ट प्रतिभा के साथ जन्म दिया है। 

हमें अपनी मौलिकता और नवाचार क्षमता को पहचानना होगा और उसी के आधार पर समाज में परिवर्तन लाना होगा।”अपने संबोधन के दौरान उन्होंने हाल ही में आयोजित ग्लोबल एआई इम्पैक्ट समिट में गलगोटिया यूनिवर्सिटी से जुड़े एक विवादित उदाहरण का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि हम अपनी गलतियों को स्वीकार करना सीख लें, तो हम कहीं अधिक आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि अक्सर लोग अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए गलती स्वीकार नहीं करते, जबकि सच्ची प्रगति ईमानदारी और आत्मस्वीकार से ही संभव होती है।

डॉ. गांधी ने युवाओं को यह भी सलाह दी कि वे अपने जीवन में नेटवर्किंग और सीखने की संस्कृति विकसित करें। उन्होंने कहा कि “यदि हमें बड़ी सफलता प्राप्त करनी है तो हमें अपने से अधिक अनुभवी लोगों, विशेषज्ञों और मार्गदर्शकों से पूछने और सीखने की आदत विकसित करनी होगी। जो व्यक्ति पूछना नहीं सीखता, वह जीवन में बड़ी सफलता हासिल नहीं कर पाता।”

सम्मेलन की सचिव डॉ. सुमित्रा सिंह ने डॉ. गांधी के सुझावों को युवाओं और देश की शिक्षा व्यवस्था के लिए मील का पत्थर बताते हुए कहा कि इन नवाचारी विचारों को ड्राफ्ट पॉलिसी के रूप में शिक्षा मंत्रालय को भेजने की पहल की जाएगी। कांफ्रेंस सेक्रेट्री डॉ सुमित्रा सिंह  ने अपने उद्बोधन में गांधी के प्रभावशाली व्यक्तव्य की प्रशंसा की , राष्ट्रीय स्तर के इस मंच पर कोटा शिक्षा नगरी से पधारे राजस्थान के प्रभावशाली व्यक्तित्व एवं भारत  देश के प्रख्यात अंतराष्ट्रीय लीडरशिप ,लाइफ ,एनएलपी एवं करियर कोच ,मैनेजमेंट एनालिस्ट ,युवा पब्लिक पॉलिसी एक्सपर्ट  डॉ. नयन प्रकाश गांधी के नीति-आधारित विचारों और नवाचारी सुझावों को मंच के माध्यम से अन्य सभी शिक्षा विद एक्सपर्ट पेनल के सुझावों के साथ शिक्षा मंत्रालय और कौशल विकास मंत्रालय को भेजा जाएगा।

देश की राजधानी नई दिल्ली के भव्य राष्ट्रीय शिक्षा सम्मेलन के मंथन में गांधी के व्यक्तव्य की मिली व्यापक सराहना को कोटा की शिक्षा नगरी के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है। यह पहल भारत को पुनः विश्व गुरु बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक कदम के रूप में देखी जा रही है।

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