संकल्प का विशेष विकल्प : गणतंत्र दिवस

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संस्कार सृजन राम गोपाल सैनी 

जयपुर (संस्कार सृजन) 26 जनवरी केवल एक तारीख नहीं, बल्कि भारत के लोकतांत्रिक स्वप्न का जीवंत उत्सव है। यही वह दिन है, जब भारत ने स्वयं को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में स्थापित किया था। यह दिन हमें याद दिलाता है कि- आज़ादी केवल सत्ता परिवर्तन नहीं थी, बल्कि एक ऐसी व्यवस्था की स्थापना थी, जिसमें अंतिम शक्ति जनता के हाथों में सौंपी गई। गणतंत्र दिवस का सबसे बड़ा संदेश है- संविधान का सम्मान। हमारा संविधान केवल कानूनों का संग्रह नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की आकांक्षाओं, संघर्षों और मूल्यों का प्रतिबिंब भी है। डॉ. अंबेडकर के नेतृत्व में निर्मित यह संविधान समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व के सिद्धांतों पर आधारित है। 26 जनवरी का पर्व हमें यह प्रेरणा देता है कि अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का निर्वहन भी उतना ही ज़रूरी है।

आज जब हम राजपथ (कर्तव्य पथ) पर होने वाली भव्य परेड देखते हैं, तो वह केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन नहीं होती, बल्कि देश की एकता में विविधता का उत्सव भी होती है। अलग-अलग राज्यों की झांकियां, लोकनृत्य, वेशभूषा और संस्कृति- ये सब मिलकर यह संदेश देते हैं कि भारत की ताकत उसकी विविधता में ही है। यह दृश्य हमें सिखाता है कि मतभेदों के बावजूद एक साझा लक्ष्य के लिए एकजुट रहना ही गणतंत्र की असली शक्ति है। गणतंत्र दिवस युवाओं के लिए विशेष रूप से प्रेरणादायी है। युवा ही किसी भी राष्ट्र का वर्तमान और भविष्य होते हैं। 

26 जनवरी का दिन युवाओं से यह अपेक्षा करता है कि वे केवल अधिकारों की बात न करें, बल्कि देश निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं। ईमानदारी, अनुशासन, परिश्रम और नवाचार, ये चार स्तंभ यदि युवा पीढ़ी अपना ले, तो भारत को विश्वगुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता। यह दिन हमें यह भी याद दिलाता है कि लोकतंत्र केवल मतदान तक सीमित नहीं है। लोकतंत्र का वास्तविक अर्थ है- जागरूक नागरिक। प्रश्न पूछना, सही-गलत में फर्क करना, सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध आवाज़ उठाना और संविधानिक मूल्यों की रक्षा करना, यही सच्चा गणतांत्रिक आचरण है। यदि हम चुप रहकर अन्याय को सहन करते हैं, तो गण का तंत्र केवल किताबों तक सिमट कर रह जाएगा।

आज के समय में जब समाज अनेक चुनौतियों- मसलन भ्रष्टाचार, असमानता, बेरोज़गारी और सामाजिक विभाजन से जूझ रहा है, तब 26 जनवरी का दिवस हमें आत्ममंथन का अवसर देता है। क्या हम उस भारत का निर्माण कर पा रहे हैं, जिसका सपना हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने देखा था ? यह प्रश्न हमें भीतर तक झकझोरता है और बेहतर बनने की प्रेरणा देता है। गणतंत्र दिवस केवल सरकारी आयोजन नहीं, बल्कि व्यक्तिगत संकल्प का दिन है। संकल्प- ईमानदार नागरिक बनने का, कानून का सम्मान करने का, दूसरों के अधिकारों की रक्षा करने का और देशहित को सर्वोपरि रखने का। छोटे-छोटे सकारात्मक प्रयास- स्वच्छता, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक सौहार्द-इन्हीं से राष्ट्र मजबूत होता है। फाइनली 26 जनवरी का उत्सवमयी दिवस हमें यह सिखाता है कि भारत की असली ताकत व पहचान उसकी सीमाओं, सेनाओं या इमारतों में नहीं, बल्कि उसके नागरिकों के चरित्र में है। जब हर नागरिक अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाएगा, तभी गणतंत्र सशक्त होगा, तो आइए, इस बार गणतंत्र दिवस पर हम केवल झंडा न फहराएं, बल्कि अपने भीतर भी संविधान के मूल्यों को फहराएं। यही सच्ची देशभक्ति है, यही गण के तंत्र की जीत है, इसमें कोई संदेह नहीं...

डाॅ. जितेन्द्र लोढ़ा - स्वतंत्र लेखक

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