विश्व ARDS जागरूकता दिवस पर किया जेएमए ने सीएमई का आयोजन

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संस्कार सृजन राम गोपाल सैनी        

जयपुर (संस्कार सृजन) इंडियन मेडिकल एसोसिएशन जयपुर शाखा (जेएमए) व भारतीय क्रिटिकल केयर मेडिसिन सोसाइटी (ISCCM) के संयुक्त तत्वावधान में सीएमई का आयोजन 11अगस्त को सायं जेएमए सभागार में किया गया |

आयोजन का विषय ARDS ( एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम) था। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एसएम्एस मेडिकल कालेज के प्रिंसिपल डॉ. दीपक महेश्वरी ने बताया की ARDS, या एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम, एक गंभीर और जानलेवा फेफड़ों की बीमारी है जिसमें फेफड़ों में तरल पदार्थ जमा हो जाता है, जिससे ऑक्सीजन रक्त में जाने में कठिनाई होती है। यह विभिन्न कारकों के कारण हो सकता है, जैसे कि निमोनिया, सेप्सिस, या हानिकारक पदार्थों के साँस लेने से। सीएमइ के दौरान वक्ताओं ने  प्रेसेंटेशन के माध्यम से  इस बीमारी  के बारे में विस्तार से जानकारी दी  |

एआरडीएस के लक्षण :-
- श्वसन  समस्याएं: सांस लेने में कठिनाई, तेज़ और उथली साँसें
- ऑक्सीजन की कमी: त्वचा या नाखूनों का नीला पड़ना
- थकान और भ्रम : ऑक्सीजन की कमी के कारण मांसपेशियों में थकान और मानसिक भ्रम

एआरडीएस के कारण :-
- निमोनिया: फेफड़ों के संक्रमण के कारण
- सेप्सिस: शरीर में गंभीर संक्रमण के कारण
- हानिकारक पदार्थों का साँस लेना: धुएं, रासायनिक धुएं आदि के कारण
- चोट और सर्जरी: गंभीर चोट या सर्जरी के बाद

एआरडीएस का इलाज :-
- ऑक्सीजन थेरेपी: ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाने के लिए
- मैकेनिकल वेंटिलेशन: सांस लेने में मदद के लिए
- दवाएं: अंतर्निहित कारणों के इलाज के लिए

आयोजन के मुख्य अतिथि डॉ. दीपक माहेश्वरी, प्रधानाचार्य एवं नियंत्रक एसएमएस मेडिकल कालेज ने  कहा एआरडीएस एक गंभीर बीमारी है जिसका समय रहते इलाज जरूरी है । जेएमए के अध्यक्ष डॉ. जगदीश मोदी ने बताया कि यह फेफड़ो की एक गंभीर स्थिति है जिसमे मरीज़ का सांस लेना मुश्किल हो जाता है। 

जेएमए के सचिव डॉ. अनुराग तोमर ने बताया की इसमें फेफड़ो में तेज़ी से सूजन एवं तरल पदार्थ का निर्माण हो जाता है जिस से सांस में तकलीफ़ आने लगती है। आईएससीसीएम जयपुर के अध्यक्ष डॉ. मोहित रॉय ने बताया कि इस बीमारी में मरीज़ को आईसीयू में रखना पड़ सकता है। आईएससीसीएम जयपुर के सचिव डॉ. निखिल अजमेरा ने बताया कि अति गंभीर मरीजों को वेंटीलेटर सपोर्ट की भी ज़रूरत पड़ जाती है। आईएससीसीएम जयपुर के कोषाध्यक्ष डॉ.चंद्रशेखर गौड़ ने बताया की अंतिम उपचार के रूप में ईक्मो की आश्यकता भी होती है |

इस सीएमई में चार वक्ताओं डॉ. अजीत सिंह (श्वसन रोग विशेषज्ञ) , डॉ. योगेन्द्र सिंह गुर्जर, डॉ. वैभव भार्गव एवं डॉ. अरुण शर्मा (गहन चिकित्सा विशेषज्ञ) ने अपने व्याख्यान में इस बीमारी के बारे में विस्तार से जानकारी दी |

इस सीएमई में 150 से ज़्यादा चिकित्सकों ने भाग लिया। वक्ताओं ने कहा की एआरडीएस के बारे में जागरूकता बढ़ाना महत्वपूर्ण है ताकि समय पर इलाज शुरू किया जा सके और इस जानलेवा स्थिति से बचा जा सके । अंत में डॉ. अनुराग तोमर सचिव जेएमए ने सभी वक्ताओं व आगंतुकों को  धन्यवाद ज्ञापित किया ।

रिपोर्ट : आशा पटेल 

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