जीवन अनमोल है , इसे आत्महत्या कर नष्ट नहीं करें !
सुबह की शुरुआत माता-पिता के चरण स्पर्श से करें !
संस्कार सृजन @ राम गोपाल सैनी
जयपुर (संस्कार सृजन) भारतीय जनमानस के ज़ेहन में भय, संकट, सुरक्षा व संरक्षण के प्रबल भाव व तत्संबंधी सुरक्षातंत्र की लेशमात्र भी आवश्यकता बस पैदा होने की देर है, फ़िर क्या ? बरबस एक ही मंत्र याद आता है, और वो मंत्र है- सबका मान जय हनुमान | परमात्मा जिसे अपना भाई समझते हैं, तो वो परमात्मा की रचनाओं का रक्षक तो स्वयंमेव है | सहज, सरल, भक्ति, सेवा व न्याय के मानक सर्वप्रिय व सर्वश्री हनुमान जी, भारतीय संस्कृति की वो ईश-कृति है, जो सर्व साधारण के लिए हर समय व हर जगह उपलब्ध है | इनके संबंध में एक और ख़ास बात है, इन्हें पुकारने मात्र से आत्मविश्वास और जोश जैसे जीवनयापन के आवश्यक घटक प्रथम प्रसाद के स्वरूप में बिन मांगे, अपने-आप उपहार स्वरुप में मिल जाते हैं | परमार्थ, सहायता व संकट-निदान के सबसे बड़े अनुकरणीय व्यक्तित्व व वैज्ञानिक-आइकॉन हमारे क्या, सबके हनुमान जी, भारतीय बच्चों से लेकर बूढों तक के वो सहारा है, जो उन्हें हर वक्त न हराने की उम्मीद व विजय के वरदान का रास्ता तय करने के विज्ञान को सदैव अपने चरित्र से बताते व जताते रहते हैं | भारतीय पौराणिक व ईश कथाओं में हनुमान जी की कहानी, केवल कहानी नहीं है, बल्कि उन अपेक्षित व आवश्यक शीलगुणों का वो गुलदस्ता है, जिसे भारतीय क्या, संसार के हर नागरिक को अपने व्यक्तित्व के वातायन में आवश्यक रूप से सजाना चाहिए, तब जाकर कहीं उचित व सुचित मानवता का उदय हो पायेगा |
भारतीय जन मानस में भूत-प्रेत सहित अंधेरे आदि का भय मिटाने के सर्व सुलभ, सबसे सच्चे व मानकीय देव है-बालाजी महाराज | बालाजी महाराज हमें सिखाते हैं कि हम आम बनकर कैसे रहे ? हमारे बल का प्रयोग सत्य और न्याय के लिए कैसे करें ? किसी भी हालात में हम अपना आत्मविश्वास न खोएं, अपने लक्ष्य के लिए सदैव अडिग रहे, अंत में, लेकिन अंतिम नहीं, अपने सर्वस्व को प्रभु (राम काज) के नाम समर्पित कर दे | वैसे भी बालाजी महाराज की कोई भी धारणा व हिमायत जन-कल्याण से परे है ही नहीं, इसलिए मित्रों बालाजी महाराज की कृपा सदैव उन लोगों पर रहती है, जो भले के लिए काम करते हैं, कमज़ोर लोगों का साथ देते हैं | हनुमान जी सम्पूर्ण मानवता के लिए ऐसी सम्यक् निधि है, जो कुमति के निवारक है और सुमति के संगी अर्थात साथी है | कहने का सीधा मतलब यह है कि- हनुमान जी तो अनगिनत प्रेरणाओं का स्रोत है, साथ ही वह बुद्धि, शक्ति और सरलता के अक्षय भंडार है, जो इन्हें पा गया, तो समझों वह तो इस भव सागर में छा गया | सबको ऐसा लगता है कि हनुमान जी तो सिर्फ़ और सिर्फ़ उनके ही देव है, शायद इसलिए ही भारत के हर गाँव व ढाणी में बालाजी की बंगली (देवरा) मौजूद है. और तो और, क्या मचाए शोर, हमारे देश का बच्चा- बच्चा तो क्या यहाँ का सिपाही भी यही बोलता है- जय बजरंग बली, तौड़ दे दुश्मन की नली |
अपनी सहजता व सर्वसुलभता के चलते हनुमान जी अभय और संरक्षण के देवता के रूप में प्रतिस्थापित हैं, उनकी शक्ति, बहादुरी और भगवान राम के प्रति समर्पण के लिए उन्हें हिंदू धर्म में बहुत मान दिया जाता है, इसलिए ही उन्हें हिन्दुधर्म के सबसे शक्तिशाली संरक्षकों में से एक संरक्षक माना जाता है, वो हमेशा अपने हर रूप में एक दिव्य रक्षक और वीरता के सच्चे मायने वाले रूप में हमारी सांस्कृतिक-विरासत रूपी जन-भावनाओं में पल-दर-पल, अर्थात हर पल स्पंदित होते रहते हैं | कहने का मतलब है- सुरक्षा हेतु हनुमान, भय भगाने को हनुमान, बाधा दूर करने को हनुमान, नकारात्मकता व अंधकार मिटाने को हनुमान, शत्रुनाश के लिए हनुमान, नुक़सान से बचाव को हनुमान और खतरों को बेअसर करने को भी हनुमान. ऊपर से यह और सर्वमान्य रूप से प्रचलित व घोषित है- तुम रक्षक तो काहु से डरना, जो भारतीय जनमानस में निर्भय-विज्ञान के प्रति विश्वास की पराकाष्ठा का सबसे बड़ा उदाहरण है | हनुमान जी विद्यावान है, गुनी है और साथ में अति चातुर भी है, सो बचाव व संरक्षण का विज्ञान तो उनके देवत्व के इर्द-गिर्द ही अपना स्थायी निवास बना के रहता है, बस अर्जी लगाने भर की देर है, मानसिक तौर पर भाव भरे बालाजी का सुरक्षा चक्र व अभय का विश्वास तुरंत हाज़िर |
रक्षा विधा के अधिष्ठाता भगवान के जन्मोत्सव की शुभ वेला पर, सार के श्रृंगार के रूप में, यह कहा जा सकता है कि- भारतीय-संस्कृति में जब भी अभय और संरक्षण के पाठ्यक्रम की बात चलेगी, तो उसमें सबसे पहला अध्याय सर्वश्री हनुमान जी का ही होगा, किसी और का नहीं | इसे लेकर जन-जन के मन में किसी प्रकार का कोई संदेह नहीं है, बल्कि यह तो उनके लिए आस्था-विज्ञान पर आधारित बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस विकार रूपी प्रबल विश्वास का एक विशिष्ट वंदन है |
लेखक : डॉ.जितेन्द्र लोढ़ा







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