जीवन अनमोल है , इसे आत्महत्या कर नष्ट नहीं करें !
सुबह की शुरुआत माता-पिता के चरण स्पर्श से करें !
संस्कार सृजन @ राम गोपाल सैनी
जयपुर (संस्कार सृजन) समर्पण सेवा संस्थान द्वारा आयोजित देहदान, अंगदान, नेत्रदान और रक्तदान विषयक सेमिनार में विशिष्ट अतिथि के तौर पर भाग लेते हुए अपने विचार व्यक्त करते हुए जोधपुर के वरिष्ठ पत्रकार डॉ. राकेश वशिष्ठ ने कहा कि दुनिया में देहदान, अंगदान, नेत्रदान और रक्तदान से बढ़कर कोई भी दान नहीं है,क्योंकि इस प्रकार हम अपने दिए दान से किसी मानव को जीवन दान दे रहे हैं | मृत्यु के पश्चात मृत शरीर को दाह या दफनाने की अपेक्षा हम शोध और प्रैक्टिकल के लिए अपना शरीर दान कर सकते हैं, ताकि गंभीर असाध्य रोगों के लिए नए उपचार ओर तरीकों की खोज की जाए | साथ ही नेत्र दान द्वारा किन्हीं दो इंसानों को नेत्र ज्योति दे सकते हैं।
गंभीर घायल अवस्था में ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद अपने शरीर के अंगों का दान कर हम अनेक इंसानों को नया जीवन दान दे सकते हैं और सबसे बड़ा रक्तदान जिसके द्वारा हमारे पास अवसर होता है स्वयं जीवित रहते हुए अनेक जीवित इंसानों की रगों में जीवनदान के रूप में जीवित रहना।
डॉ. राकेश वशिष्ठ ने बताया कि रक्तदान करने से किसी भी प्रकार की कोई कमजोरी नहीं आती | एक स्वस्थ इंसान एक वर्ष में 4 बार रक्तदान कर सकता है। समय-समय पर संस्थाओं द्वारा इस प्रकार की सेमिनार का आयोजन करना चाहिए जिससे समाज को अधिक से अधिक देहदान, अंगदान, नेत्रदान और रक्तदान के लिए प्रेरित किया जाए | ऐसे तमाम रक्तवीर, देहदानी, अंगदानी समाज के लिए प्रेरणा श्रोत हैं, युवाओं के लिए आदर्श है अतः उनको आगे आकर आमजन को जागरूक करने की जरूरत है ।
वरिष्ठ पत्रकार डॉ. राकेश वशिष्ठ ने इस सेमिनार में 101वां रक्तदान कर एक आदर्श प्रस्तुत किया | साथ ही पूर्व में स्वयं ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में देहदान और अंगदान के लिए पंजीकृत करवाया है और अभी तक अनेक लोगों को प्रेरित कर देहदान और अंगदान के लिए पंजीकृत करवा चुके हैं।
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