जीवन अनमोल है , इसे आत्महत्या कर नष्ट नहीं करें !
सुबह की शुरुआत माता-पिता के चरण स्पर्श से करें !
संस्कार सृजन @ राम गोपाल सैनी
अमेरिका (संस्कार सृजन)यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की अमेरिका गए थे एक अहम खनिज सौदे पर मुहर लगाने लेकिन ये दौरा उम्मीदों के उलट टकराव और नाकामी का सबब बन गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वान्स के साथ उनकी बातचीत इतनी गरमा गई कि जेलेंस्की को बैठक छोड़कर बाहर आना पड़ा। उनके साथ गए यूक्रेनी प्रतिनिधियों को भी बैठक से निकल जाने का निर्देश दिया गया। इसके बाद जेलेंस्की तुरंत अमेरिका छोड़कर अपने देश के लिए रवाना हो गए।
अमेरिका और यूक्रेन के बीच इस खनिज समझौते की चर्चा बीते कुछ दिनों से जोरों पर थी। यह सौदा खुद जेलेंस्की ने प्रस्तावित किया था, जिस पर ट्रंप की भी दिलचस्पी थी। दरअसल, यूक्रेन दुर्लभ खनिजों का बड़ा स्रोत है और अमेरिका की नजर खास तौर पर उन खनिजों पर थी, जिनका उपयोग रक्षा और हाई-टेक इंडस्ट्री में किया जाता है। इस सौदे के तहत अमेरिका को यूक्रेन की खदानों से खनिज निकालने की छूट मिलती, जबकि बदले में यूक्रेन को सुरक्षा गारंटी मिलने की उम्मीद थी। लेकिन बात बनी नहीं और दोनों नेताओं के बीच की तनातनी ने इस डील को धराशायी कर दिया।
डील क्यों बनी विवाद की वजह?
यूक्रेन ने अमेरिका को दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति का वादा किया था लेकिन जेलेंस्की चाहते थे कि इसके बदले में अमेरिका यूक्रेन की सुरक्षा सुनिश्चित करे। खासकर, जब जो बाइडेन की सरकार के दौरान अमेरिका ने यूक्रेन को सैन्य मदद दी थी, तो जेलेंस्की को उम्मीद थी कि ट्रंप प्रशासन भी वही रुख अपनाएगा। मगर ट्रंप का नजरिया बिल्कुल अलग निकला। उन्होंने साफ कर दिया कि अमेरिका केवल उन सौदों में रुचि रखेगा, जिससे उसे सीधा फायदा हो।
ट्रंप की रणनीति स्पष्ट थी कि यूक्रेन से खनिज लेना, लेकिन बदले में सुरक्षा की कोई ठोस गारंटी न देना। ट्रंप प्रशासन ने प्रस्ताव रखा कि अमेरिका 50,000 करोड़ डॉलर मूल्य के खनिज चाहता है, लेकिन जेलेंस्की ने इसे खारिज कर दिया। मंगलवार को ट्रंप ने बयान दिया कि अमेरिका अब तक 30,000 करोड़ डॉलर की आर्थिक मदद यूक्रेन को दे चुका है, और अब वह इस खनिज समझौते के जरिए अपनी भरपाई करना चाहता है।
यूक्रेन और अमेरिका के अपने अलग हित
बैठक के दौरान ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया कि यूक्रेन की सुरक्षा का जिम्मा अब यूरोप के अन्य देशों का है। उन्होंने यह भी दोहराया कि अमेरिका के कुछ सैनिक यूक्रेन में मौजूद हैं और वे जितनी सुरक्षा दे सकते हैं, उतनी ही देंगे उससे ज्यादा नहीं। दूसरी ओर जेलेंस्की ने साफ कहा कि अगर अमेरिका सुरक्षा गारंटी नहीं देगा, तो वे यह सौदा नहीं करेंगे। उनका मानना था कि अगर अमेरिका पीछे हटता है, तो रूस के खिलाफ यूक्रेन की जंग और मुश्किल हो जाएगी।
यूक्रेन दुनिया के सबसे अहम खनिज भंडारों में से एक है। वहां लगभग 1.90 करोड़ टन ग्रेफाइट मौजूद है, जो इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बैटरियों में इस्तेमाल होता है। इसके अलावा, टाइटेनियम और लिथियम का भी बड़ा भंडार है, जो रक्षा और हाई-टेक उपकरणों के लिए जरूरी होता है। यही कारण है कि अमेरिका की दिलचस्पी यूक्रेन की खदानों में थी। लेकिन युद्ध के चलते यूक्रेन के कई खनिज भंडार क्षतिग्रस्त हो चुके हैं और कुछ हिस्सों पर रूस ने कब्जा कर लिया है।
सौदा टूटने से किसकी हार-किसकी जीत?
इस समझौते के टूटने से सबसे बड़ा झटका यूक्रेन को लगा, क्योंकि उसे अमेरिकी सुरक्षा समर्थन की उम्मीद थी। दूसरी ओर,अमेरिका को भी दुर्लभ खनिजों से हाथ धोना पड़ा,जो उसकी तकनीकी और रक्षा इंडस्ट्री के लिए अहम थे। लेकिन ट्रंप के सख्त रवैये से यह साफ हो गया कि वे बिना किसी ठोस अमेरिकी लाभ के कोई भी कदम उठाने के पक्ष में नहीं हैं।
किसी भी कार्यक्रम को लाइव दिखाने के लिए संपर्क करें - 9214996258,7014468512.




