जीवन अनमोल है , इसे आत्महत्या कर नष्ट नहीं करें !
सुबह की शुरुआत माता-पिता के चरण स्पर्श से करें !
संस्कार सृजन @ राम गोपाल सैनी
उदयपुर (संस्कार सृजन) आलोक सेकेंडरी स्कूल पंचवटी में गीता परिवार उदयपुर द्वारा गीता जयंती के अवसर पर विशेष व्याख्यान सत्र का आयोजन किया गया। सत्र का मुख्य उद्देश्य गीता के उपदेशों को नित्य जीवन में आत्मसात करने और उनमें निहित जीवन प्रबंधन के मूल सिद्धांतों को समझाना था।
मोटिवेशनल स्पीकर आशीष सिंहल ने योगक्षेम वहाम्यहम् विषय पर प्रेरक संबोधन दिया। उन्होंने गीता में अध्याय 7 के इस श्लोक की व्याख्या करते हुए बताया कि जब व्यक्ति अपने कर्तव्य को पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ करता है, तो भगवान या प्रकृति स्वयं उसकी आवश्यकताओं की पूर्ति और उसकी रक्षा का दायित्व लेते हैं। योगक्षेम का अर्थ होता है जो वस्तु अपने पास न हो, उसे प्राप्त करना और जो मिल चुकी हो, उसकी रक्षा करना। उन्होंने छात्रों को यह संदेश दिया कि गीता का यह सिद्धांत न केवल आध्यात्मिक जीवन के लिए, बल्कि व्यावहारिक जीवन के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने उदाहरणों और कहानियों के माध्यम से समझाया कि कैसे कर्म और विश्वास के संतुलन से जीवन में स्थायित्व और सफलता प्राप्त की जा सकती है।
गीता परिवार प्रचारक सदस्य गोपाल कनेरिया ने गीता के नित्य जीवन में महत्त्व पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला का अद्भुत ग्रंथ है। गीता के सिद्धांतों को अपनाकर मनुष्य कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य, आत्मविश्वास और संतुलन बनाए रख सकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गीता का अध्ययन युवाओं के लिए न केवल मानसिक शांति का साधन है, बल्कि यह उन्हें सही निर्णय लेने में भी मदद करता है।
सुभाष मेहता ने गीता प्रार्थना और एक प्रेरणादायक गीत प्रस्तुत किया। उन्होंने छात्रों से गीता के सिद्धांतों को जीवन में उतारने का आग्रह किया, ताकि वे जीवन के हर क्षेत्र में प्रगति कर सकें। कार्यक्रम के समापन पर प्रधानाचार्य नारायण चौबीसा ने सभी वक्ताओं और प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
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