समाज में दिव्यांगो के प्रति दृष्टिकोण बदलना जरूरी-विश्व विकलांग दिवस पर विशेष लेख

जीवन अनमोल है इसे आत्महत्या कर नष्ट नहीं करें !

सुबह की शुरुआत माता-पिता के चरण स्पर्श से करें !

संस्कार सृजन राम गोपाल सैनी

जयपुर (संस्कार सृजन) प्रत्येक वर्ष 3 दिसम्बर को विश्वभर में 'अन्तर्राष्ट्रीय विकलांगता दिवस' मनाया जाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य है शारीरिक अथवा मानसिक रूप से अशक्त लोगों की सोच को सकारात्मक कर एवं उनके साथ-साथ समाज के सभी वर्गों की भागीदारी व सहयोग को प्रोत्साहन देकर उन्हें विकास की आम धारा में लाना ।

विकलांगता के कारण :-

विकलांगता या अंग विकृति जन्म जात भी होती है, कोई दुर्घटना भी अंग भंग का कारण बन सकती है और सेना में युद्ध के दौरान या किसी दुर्घटना के कारण भी अंग विच्छेद करना पडता है कभी कभी समाज विरोधी तत्त्व भी बच्चों को विकलांग बना देते हैं–  स्वास्थ्य के प्रति उपेक्षा या ठीक ठीक उपचार करने की असमर्थता विकलांगता में वृद्धि करते हैं।

विश्व विकलांग दिवस को मनाने का लक्ष्य विकलांगजनों की अक्षमता के मुद्दे की ओर लोगों की जागरुकता और समझ को बढ़ाना है। समाज में उनके आत्म-सम्मान, लोक-कल्याण और सुरक्षा की प्राप्ति के लिये विकलांगजनों की सहायता करना।जीवन के सभी पहलुओं में विकलांगजनों के सभी मुद्दों को बताना। इस बात का विश्लेषण करें कि सरकारी संगठन द्वारा सभी नियम और नियामकों का सही से पालन हो रहा है या नहीं। समाज में उनकी भूमिका को बढ़ावा देना और गरीबी घटाना, बराबरी का मौका प्रदान कराना, उचित पुनर्सुधार के साथ उन्हें सहायता देना। उनके स्वास्थ्य, सेहत, शिक्षा और सामाजिक प्रतिष्ठा पर ध्यान केन्द्रित करना।

समाज में विकलांगों के प्रति दृष्टिकोण को बदलना उनके प्रति महान्‌ उपकार होगा। विकलांग दया के पात्र नहीं, रहमो करम के काबिल नहीं, वे भी तो समाज के अंग हैं। सम्मानपूर्ण जीवन जीने का उन्हें भी अधिकार है । यह तब ही सम्भव है जब हम उनके प्रति सच्ची सहानुभूति की दृष्टि रखें। यथासम्भव उन्हें सहयोग दें। अन्धे को सड़क पार करवाकर, उसके मार्ग को सुलभ बनाकर हम अपना कर्तव्य पूरा कर सकते हैं। विक्षिप्त और अर्ध पागल की बड़बड़ाहट की ओर ध्यान न दें, उसे रोकें नहीं। गूँगे बहरे का मजाक न उड़ाएँ। दूसरी ओर, समाज द्रोही तत्त्वों को, जो बच्चों से भीख मँगवाने के लिए उनका अंग भंग कर देते हैं,

विकलांग प्रमाण पत्र :-

कोई भी व्यक्ति अपनी जिंदगी में विकलांग होना नहीं चाहता लेकिन हमारी जिंदगी में कुछ ऐसी घटनाएं घट जाती है जिससे हमारे किसी अंग को चोट पहुंच जाती है और व्यक्ति विकलांग हो जाता है। कुछ बच्चे जन्म से ही विकलांग होते हैं तो कुछ व्यक्ति किसी घटना से विकलांग हो जाते हैं। जब विकलांग व्यक्ति के घर में उसके अलावा कोई और कमाने वाला ना हो तो बहुत ज्यादा दिक्कत होती है। अगर इस दौरान विकलांग व्यक्ति को कुछ आर्थिक सहायता मिल जाए तो वह अपना जीवन यापन अच्छे से कर सकता है।

विकलांग प्रमाण पत्र के फायदे :-

विकलांग प्रमाण पत्र के होने से आप को सरकार द्वारा चलाई जा रही विकलांग योजनाओं का सीधे तौर पर लाभ प्राप्त है।रोडवेज बस, ट्रेन और अन्य प्रकार के परिवहन साधनों में भी विकलांग प्रमाण पत्र होने पर विकलांगता के प्रतिशत के हिसाब से आपको छूट प्रदान की जाती है । इसके साथ ही सरकार द्वारा चलाई जा रही सभी योजनाओं  के बारे में विकलांग प्रमाण पत्र के माध्यम से आरक्षण प्राप्त किया जा सकता है।

विकलांग प्रमाण पत्र के लिए आवश्यक दस्तावेज :-

आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, राशन कार्ड, स्थायी पता प्रमाण पत्र।, आयु प्रमाण पत्र,बोनाफाइड प्रमाण पत्र। विकलांग व्यक्तियों को अपने विकलांगता की दो फोटो भी देनी होती है जिसमें दिव्यांगता साफ़ तोर पर दिखाई दे।

यूडीआईडी कार्ड के बारे में :-

दिव्यांगों को विशिष्ट पहचान पत्र के रूप में स्मार्ट यूडीआईडी कार्ड दिया जा रहा है। इस कार्ड से दिव्यांग देशभर में कहीं भी अपनी पहचान बताकर इलाज करा सकते हैं। समाज कल्याण विभाग दिव्यांगों की समस्या को देखते हुए अब आल इंडिया लेवल पर उनके लिए यह कार्ड जारी कर रहा है |

यूडीआईडी यानी कि 'यूनिक आईडी फॉर परसन्स विद डिसेबलिटीज' भारत सरकार की एक कोशिश है ताकि देश में दिव्यांगजनों का एक डेटाबेस तैयार किया जा सके | इस आधार पर उन्हें सरकारी योजनाओं में शामिल कर मदद दी जा सके | इसके तहत हर दिव्यांगजन को एक यूनिक नंबर जारी किया जाता है |

स्वावलंबन कार्ड बनवाने से दिव्यांग से संबंधित सभी जानकारी एक यूनिक आईडी कार्ड  में होगी। यह एक बहुउद्देश्य स्मार्ट कार्ड हैं । इससे दिव्यांगजनो को किसी भी प्रकार का प्रमाण पत्र लेकर नहीं घुमना पड़ेगा।

लेखक : उदयवीर सिंह यादव

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