जीवन अनमोल है , इसे आत्महत्या कर नष्ट नहीं करें !
सुबह की शुरुआत माता-पिता के चरण स्पर्श से करें !
संस्कार सृजन @ राम गोपाल सैनी
जयपुर (संस्कार सृजन) गुरु मनुष्य के अज्ञान को दूर कर ज्ञान का आलोक फैलाता है। गुरु सत मार्ग पर चलाता है। व्यक्तित्व विकास के लिए जो जो सद्गुण आवश्यक है वे सभी गुरु ही सिखाता है। गुरु का दर्जा ब्रह्मा विष्णु महेश से भी बड़ा बताया है। भगवान श्रीराम,भगवान श्री कृष्ण सभी के गुरु थे जिनसे उन्होंने शस्त्र व शास्त्र का ज्ञान प्राप्त किया ।
आषाढ़ मास की पूर्णिमा के दिन हम सभी गुरु पूर्णिमा हर्षोल्लास से मनाते हैं। इस दिन अपने अपने गुरु की पूजा करते हैं। जब वर्षा ऋतु शुरू होती है उसी समय गुरु पूर्णिमा आती है। बहुत से साधु संत चार मास तक चौमासा करते हैं। एक जगह रहकर सत्संग करते हैं ज्ञान की गंगा बहाते हैं। मौसम इन चार महीनों में सर्वश्रेष्ठ होता है। न तो इन महीनों में अधिक गर्मी पड़ती है न अधिक सर्दी ही लगती है। वेदव्यास जी का जन्मदिन भी गुरु पूर्णिमा को ही मनाया जाता है। वे संस्कृत के बहुत बड़े विद्वान थे। उन्हें आदिगुरु कहा जाता है। भक्तिकाल के प्रसिद्ध सन्त घीसाराम जी के जन्म को भी गुरु पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है।
अंधकार को हटाकर प्रकाश की ओर ले जाने का कार्य गुरु ही करते हैं इसलिए गुरु की पूजा की जाती है। कबीरदास जी कहते थे कि' निगुरा न मिले पापी मिले हज़ार। निगुरा वह है जिसके कोई गुरु नहीं है। गुरु के बिना ज्ञान नहीं मिल सकता। परिवार में सन्तान की प्रथम गुरु माँ होती है जो जन्म देती है। सांसारिक ज्ञान देने का काम माँ करती है। अतः प्रातःकाल उठि के रघुनाथा मात पिता गुरु नावहिं माथा। इसलिए भगवान श्रीराम भी सुबह उठकर माता पिता व गुरु के चरण छूते व प्रणाम कर आशीर्वाद लेते थे। सद्गुरु की कृपा से ईश्वर से साक्षात्कार भी हो सकता है। गुरु वह है जिसने उस तत्व को जाना है। जो तत्वदर्शी हो।गुरु की कृपा से हर कार्य सम्भव हो जाता है। आध्यात्मिक पथ में गुरु मार्गदर्शक के रुप में कार्य करते हैं। वर्षा ऋतु आते ही गरम तवे सी जलती धरती भी शीतल हो जाती है। बादल बरसते ही शांत हो जाती है उसमें फसल पैदा करने की शक्ति आ जाती है।
गुरु पूर्णिमा पर शिष्य जब अपने गुरु के पास जाता है तो उसमें योग शक्ति ज्ञान भक्ति आती है जो भी उसके प्रश्न होते है उनके उत्तर मिल जाते हैं। अज्ञान का कोहरा मिट जाता है ज्ञान का प्रकाश फैल जाता है । गुरु पूर्णिमा को हिन्दू, बौद्ध, जैन सभी धर्मों को मानने वाले मनाते हैं|
श्री गुरु पद नख मणि गण ज्योति।
सुमिरत दिव्य दृष्टि हिय होती।।
गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु गुरु देवो महेश्वरः।
गुरु साक्षात परम् ब्रह्म तस्मे श्री गुरुवे नमः।।
बन्दव गुरु पद,पदुम परागा।
सुरुचि सुबास सरस् अनुरागा।।
इस प्रकार से साधक गुरु की महिमा का गुरु पूर्णिमा के दिन सत्संग करते हैं।
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डॉ. राजेश कुमार शर्मा पुरोहित साहित्यकार भवानीमंडी |
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