जीवन अनमोल है , इसे आत्महत्या कर नष्ट नहीं करें !
मास्क लगाकर रहें ! सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखें !
संस्कार सृजन @ राम गोपाल सैनी
जयपुर (संस्कार सृजन) विश्व प्रसिद्ध जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के प्रथम दिन आरम्भिक सत्र में दो महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन हुआ । पहली पुस्तक है रविन्द्र नाथ टैगोर की नोबल पुरस्कार प्राप्त ,काल जयी कृति, गीतांजलि का राजस्थानी भाषा में काव्यात्मक दोहा शैली में, अद्भुत, अभिनव अनुवाद जिसका शीर्षक है "अंजली गीतां री |" अनुवादक हैं राजस्थानी भाषा के सुप्रसिद्ध कवि, गीतकार इकराम राजस्थानी ।
ये अनुवाद इतना प्रभाव शाली बन पड़ा है कि अनुनाद प्रतीत होता है | जैसे स्वयं टैगोर राजस्थानी भाषा में गीतांजलि पढ़ रहे हों । ये बात इकराम जी को सुनकर स्वयं ममता दीदी ने पहले लोकार्पण समारोह में कोलकाता में कही थी |
दूसरी पुस्तक है हिंदी काव्य संग्रह है जिसके कवि हैं पेशे से चिकित्सक किंतु साहित्य में गहरी पैठ रखने वाले डॉ परिक्षित सिंह जो इस समय अमेरिका में निवास करते हैं । इस काव्य संग्रह का शीर्षक है "स्वयं से परिचय " । डॉ परीक्षित सिंह ने इन कविताओं में जीवन के गूढ़ रहस्यों को तलाश करने की कोशिश की है और मनुष्य स्वयं मिलने के आध्यात्मिक चिंतन को प्रस्तुत किया है।





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