Ad Code

मंजू शेखावत अपनी कला से दे रही समाज को नई दिशा

जीवन अनमोल है , इसे आत्महत्या कर नष्ट नहीं करें !

मास्क लगाकर रहें ! सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखें !

संस्कार न्यूज़ @ राम गोपाल सैनी / जयपाल सिंह 

श्रीमाधोपुर (संस्कार न्यूज़) आज हम आपको कला के क्षेत्र में अपनी विशेष पहचान बनाने वाली एक ऐसी से रूबरू करा रहे हैं, जो खेल -खेल में मिट्टी के गुड्डे-गुडिया बनाते-बनाते आज चित्रकारी तक जा पहुंची हैं । 

जी हाँ हम बात कर रहे हैं श्रीमाधोपुर तहसील की ग्राम पंचायत नांगल निवासी छात्रा मंजू शेखावत की जो 23 साल की उम्र में ही मूर्तियों व अपनी कलम से बनाये गए चित्रों से समाज सुधार का संदेश दे रही है। कला के क्षेत्र में देश-प्रदेश में अपना नाम कमाया है। क्षेत्र की महिलाओं व छात्राओं के लिए वह प्रेरणास्रोत है। मंजू बिना प्रशिक्षण के मिट्टी की हूबहू मूर्तियां बनाती है। 

आपने पढ़ा क्या - पट्टी पर नाम के लिए नहीं, जनता के विकास के लिए कार्य करूंगा - विष्णु कुमार सैनी

पेंटिंग में बीए करने के बाद मंजू वर्तमान में जयपुर में रहकर बीबीए कर रही है । होनहार व प्रतिभाशाली मंजू शेखावत के बचपन मे ही हुनर व प्रतिभा को करीब दस वर्ष पूर्व अजीतगढ़ के पत्रकार दिनेश कुमार सैनी ने देख कर बालिका का उत्साहवर्धन किया तथा अपनी कला को निखार कर केरियर बनाने की सलाह दी।  बालिका मंजू शेखावत  लगातार अपनी कला में निखार लाते हुए कई मंचो पर कला के कद्रदानों के हाथों सम्मानित भी हुई। पत्रकार दिनेश सैनी के हँसमुख व मिलनसार व्यक्तित्व को अपनी कलम से उकेर कर छाया चित्र तैयार कर पत्रकार दिनेश सैनी को भेंट किया।  

 गांव को दिलाई पहचान 

पैतृक गांव नांगल को मंजू की वजह से ही नई पहचान मिली है। मंजू के पिता शम्भूसिंह शेखावत ने बताया कि उनके परिवार का कोई भी सदस्य मूर्तिकार या चित्रकार नहीं रहा है। बचपन में मिट्टी के गुड्डे-गुडियां बनाती थी | जवाहर कला केन्द्र पर 21वें राष्ट्रीय कला मेले में ऑन द स्पॉट ड्राइंग कॉम्पीटिशन में अपनी कला का प्रदर्शन कर कला के कद्रदानों की वाहवाही बटोरी है। कला कुटुम्ब संस्था एवं आर्ट मीनिया फाउंउेशन पुष्कर में तीन दिवसीय कला महोत्सव में अपनी कला का प्रदर्शन किया है। 

 चिलम पीते किसान को देखकर महिलाएं निकाल लेती घूंघट 

मूर्तियों में नारी चेतना व ग्रामीण परिवेश को मुख्य रूप से दिखाया है।  अपनी मूर्तियों के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों पर भी प्रहार किया है। गांव में घर के बाहर चिलम पीते किसान की मूर्ति इतनी जीवंत है कि उसे देखकर ग्रामीण महिलाएं  घूंघट निकाल लेती है।


हम सभी किसी ना किसी रूप में जरूरतमंदों की सेवा कर सकते हैं | पड़ोसी भूखा नहीं सोए इसका ध्यान रखें |

" संस्कार न्यूज़ " कोरोना योद्धाओं को दिल से धन्यवाद देता है |

विडियो देखने के लिए -https://www.youtube.com/channel/UCDNuBdPbTqYEOA-jHQPqY0Q 

अपने आसपास की खबरों , लेखों और विज्ञापन के लिए संपर्क करें - 9214996258, 7014468512,9929701157.

Post a comment

0 Comments