पुरानी पेंशन बहाली और टीईटी अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों-कर्मचारियों ने निकाला मशाल जुलूस

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संस्कार सृजन राम गोपाल सैनी 

रुड़की (संस्कार सृजन) पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) बहाल करने, नई पेंशन योजना (एनपीएस) एवं एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) को समाप्त करने तथा आरटीई लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग को लेकर शनिवार को रुड़की में शिक्षक-कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। पुरानी पेंशन बहाली राष्ट्रीय आंदोलन, उत्तराखंड की प्रांतीय कार्यकारिणी के आह्वान पर सैकड़ों शिक्षक और कर्मचारी हाथों में मशालें और बैनर लेकर सड़कों पर उतरे। इस दौरान निकाले गए विशाल मशाल जुलूस में शिक्षकों और कर्मचारियों ने एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए सरकार से अपनी मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की मांग की।

शनिवार शाम करीब छह बजे अटल उत्कृष्ट पीएम श्री राजकीय इंटर कॉलेज, रुड़की के मुख्य द्वार पर विभिन्न विभागों के शिक्षक और कर्मचारी एकत्र हुए। हाथों में जलती मशालें और मांगों से संबंधित पट्टिकाएं थामे आंदोलनकारियों ने पुरानी पेंशन बहाली और टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग को लेकर नारेबाजी की। राजकीय इंटर कॉलेज के सामने से शुरू हुआ मशाल जुलूस दुर्गा चौक होते हुए गंगनहर के नए पुल तक पहुंचा। इस दौरान ‘पुरानी पेंशन बहाल करो’, ‘एनपीएस-यूपीएस वापस लो’ और ‘शिक्षक-कर्मचारी एकता जिंदाबाद’ के नारों से शहर का वातावरण गूंज उठा।

गंगनहर के नए पुल पर पहुंचने के बाद मशाल जुलूस सभा में परिवर्तित हो गया। सभा को संबोधित करते हुए पुरानी पेंशन बहाली राष्ट्रीय आंदोलन हरिद्वार के पदाधिकारियों और कर्मचारी नेताओं ने कहा कि पुरानी पेंशन कर्मचारियों के लिए कोई दया या दान नहीं, बल्कि उनके सुरक्षित भविष्य और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा अधिकार है। वक्ताओं ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन के लिए पुरानी पेंशन योजना को बहाल किया जाना आवश्यक है।

वक्ताओं ने कहा कि एनपीएस और यूपीएस जैसी व्यवस्थाएं कर्मचारियों को भविष्य की आर्थिक सुरक्षा की वह निश्चितता प्रदान नहीं करतीं, जिसकी अपेक्षा एक दीर्घकालिक सरकारी सेवा से की जाती है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों और कर्मचारियों के हित में पुरानी पेंशन योजना को पुनः लागू किया जाना चाहिए।

शिक्षकों की टीईटी अनिवार्यता के मुद्दे पर वक्ताओं ने कहा कि आरटीई लागू होने से पूर्व नियुक्त होकर वर्षों से शिक्षा व्यवस्था को अपनी सेवाएं दे रहे शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता व्यावहारिक और न्यायसंगत नहीं है। लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों की वरिष्ठता, अनुभव और पदोन्नति को ध्यान में रखते हुए इस अनिवार्यता को समाप्त किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षक की गुणवत्ता का मूल्यांकन केवल एक परीक्षा से नहीं, बल्कि उसके दीर्घ अनुभव, कार्यकुशलता और विद्यालय में किए जा रहे शैक्षिक योगदान से भी किया जाना चाहिए।

कर्मचारी नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि 25 जुलाई का यह मशाल जुलूस आने वाले समय में प्रदेशव्यापी और राष्ट्रीय स्तर के बड़े आंदोलन का शंखनाद है। शिक्षक-कर्मचारियों ने कहा कि वे अपने अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण ढंग से संघर्ष जारी रखेंगे।

इस अवसर पर गढ़वाल मंडल अध्यक्ष विकास कुमार शर्मा, संरक्षक मुकेश चौहान, मनोज सैनी, मोहित मनोचा, वीर सिंह पंवार, उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष अश्वनी चौहान, जिला मंत्री हेमेंद्र चौहान, कोषाध्यक्ष अरविंद शर्मा, माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष राजेश सैनी, उत्तरांचल पर्वतीय कर्म शिक्षक संगठन के जिला मंत्री अनिल चौधरी, एनएमओपीएस के जिलाध्यक्ष सुखदेव सैनी, जिला मंत्री दीपक चौहान, वरिष्ठ उपाध्यक्ष मनोज कुमार, खीमानंद भट्ट, प्रचार मंत्री जॉनी प्रसाद, कोषाध्यक्ष शिव कुमार पाल, रुड़की ब्लॉक अध्यक्ष सतेंद्र कुमार, मंत्री मोहम्मद इकराम सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

इसके अलावा राजीव कुमार शर्मा, संजय वत्स, पारुल त्यागी, वर्षा शर्मा, राजीव शर्मा, पूनम गिरी, मौ. तालिब, विनोद कुमार, शिखा गोयल, सरिता त्यागी, शलभ जैन, अनुराधा शर्मा, ठाठ सिंह, विवेक चौहान, पंकज चौहान, योगेश चौहान, वीरेंद्र कुमार, विपुल, विवेक राठी, पंकज विश्नोई, सीमा रानी, रविंद्र कुमार, सुभाष रतूड़ी, सचिन नागर और श्रद्धा शर्मा समेत बड़ी संख्या में शिक्षक-कर्मचारी, राजकीय कर्मचारी, पेंशनर्स संघ के पदाधिकारी एवं विभिन्न विभागों के कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम शांतिपूर्ण, अनुशासित और सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।


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