प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और सतत विकास विषय पर ऑनलाइन व्याख्यान माला का हुआ आयोजन

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संस्कार सृजन @ राम गोपाल सैनी 

उदयपुर (संस्कार सृजन) जनमत मंच द्वारा 'प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और सतत विकास' विषय पर ऑन लाइन व्याख्यान माला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जनमत मंच के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. श्रीनिवास ने मुख्य वक्ता के रूप में जानकारी देते हुए  बताया कि पर्यावरण संरक्षण आज के समय की सबसे बड़ी और अनिवार्य आवश्यकता है। हमारे प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन और बढ़ता प्रदूषण मानव अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र और स्वस्थ भविष्य के लिए पर्यावरण को बचाना अत्यंत आवश्यक है |

डॉ. श्रीनिवास ने वर्त्तमान परिवेश में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और सतत विकास, ग्लोबल वार्मिंग एवं जैव विविधता पर आज की भावी पीढ़ी को जानकारी देना अत्यंत ही जरूरी है |  उन्होंने कहा कि आदिकाल से मानव और प्रकृति का अटूट संबंध रहा है, लेकिन आधुनिक युग में विकास की अंधी दौड़ ने इस संतुलन को बुरी तरह बिगाड़ दिया है। वनों की कटाई, अंधाधुंध औद्योगीकरण और प्लास्टिक के अत्यधिक उपयोग से हमारी पृथ्वी संकट में है।

पर्यावरण संरक्षण का अर्थ केवल पेड़ लगाना ही नहीं, बल्कि उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना और प्रदूषण को रोकना है। आज आवश्यकता इस बात की है की स्वास्थ्य के लिए स्वच्छ हवा और शुद्ध जल स्वस्थ जीवन की पहली शर्त हैं। प्रदूषित पर्यावरण गंभीर बीमारियों का कारण बनता है।जैव विविधता के लिए वनों और जीव-जंतुओं का संरक्षण पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन के लिए जरूरी है। भविष्य की पीढ़ियों के लिए आज प्राकृतिक संसाधन संरेखण आवश्यक है | जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए ग्लोबल वार्मिंग और अनियमित मौसम का मुख्य कारण पर्यावरण असंतुलन ही है।

पर्यावरण संरक्षण के उपाय: हम अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे कदम उठाकर बड़ा बदलाव ला सकते हैं। जैसे - अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना, पानी की बर्बादी रोकना, सिंगल-यूज प्लास्टिक का बहिष्कार करना, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग बढ़ाना, ऊर्जा की बचत करना और कचरे का सही निस्तारण करना। पर्यावरण संरक्षण किसी एक व्यक्ति या सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हम सबका सामूहिक दायित्व है। 

मंच के सचिव शिरीष नाथ माथुर ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए युवाओ को आगे आने का संकल्प लेना होगा | हमारे जीवन का आधार प्रकृति है, और यदि हम इसे सुरक्षित नहीं रखेंगे तो आने आने वाले समय में इसके दुष्परिणाम देखने को मिलेंगे । पर्यावरण संरक्षण के लिए हमें वृक्षारोपण को बढ़ावा देना चाहिए और प्रदूषण को कम करते हैं। हमे वैकल्पिक संसाधनों का उपयोग करना चाहिए जैसे सौर ऊर्जा ,लेक्ट्रिक वहां आदि का उपयोग लेना लेना चाहिए | 

इसके अलावा जल संरक्षण भी अत्यंत आवश्यक है। हमें जल का दुरुपयोग रोकना चाहिए और वर्षा जल संचयन जैसी तकनीकों को अपनाना चाहिए। हमें प्लास्टिक का उपयोग कम करना चाहिए क्योंकि यह पर्यावरण को बहुत नुकसान पहुंचाता है। प्लास्टिक कचरे को सही तरीके से नष्ट करना और पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना चाहिए। हमें ऊर्जा की बचत करनी चाहिए। इसके साथ ही, औद्योगिक प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कड़े नियम लागू करने होंगे। मंच के सहायक सचिव डॉ. प्रियदर्शी ओझा ने बताया कि आज मानव की प्रकृति बदल गई है।

अतः पर्यावरण संरक्षण के लिए जन जागरूकता भी जरूरी है। हमें लोगों को पर्यावरण की महत्ता समझानी चाहिए और उन्हें संरक्षण के लिए प्रेरित करना चाहिए। यदि हम सभी मिलकर ये कदम उठाएंगे तो हमारा पर्यावरण सुरक्षित रहेगा और हम एक स्वस्थ जीवन जी सकेंगे। पर्यावरण संरक्षण हमारा कर्तव्य है और इसे निभाना हम सभी की जिम्मेदारी है | पशु पक्षी जानवर तो वैसे के वैसे हैं लेकिन मानव बदल चुका उसे अपने आप को बदलना होगा।

डॉ कुणाल आमेटा ने कहा कि अगर कोई पेड़ों को काटता है या नुकसान पहुँचता है तो सरकार द्वारा उसे कठोर दंड दिया जाना चाहिए। विशाल माथुर ने पर्यावरण को अति आवश्यक बताते हुए प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करने पर जोर दिया। रिशु ओझा ने पर्यावरण संरक्षण के लिए कविता पाठ का वाचन किया।

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