राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की महती भूमिका - डॉ. श्रीनिवास महावर

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संस्कार सृजन राम गोपाल सैनी 

उदयपुर (संस्कार सृजन) विश्व महिला दिवस के उपलक्ष्य में जनमत मंच द्वारा  ऑनलाइन संगोष्ठी हुई | संगोष्ठी का उद्द्देश्य महिलाओं की सामाजिक,आर्थिक, राजनीतिक एवं सांस्कृतिक स्वतंत्रता पर विचार विमर्श रहा | विश्व महिला दिवस महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ने एवं महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने वाला पर्व है।

जनमत मंच के अध्यक्ष डॉ .श्रीनिवास महावर ने अपने उद्बोधन में कहा की  हमारे आदि – ग्रंथों में नारी के महत्त्व को मानते हुए यहाँ तक बताया गया है कि “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:” अर्थात जहाँ नारी की पूजा होती है, वहाँ देवता निवास करते है। लेकिन आज के समय को देखते हुए देखिए नारी में इतनी शक्ति होने के बावजूद भी उसके सशक्तिकरण की अत्यंत आवश्यकता महसूस हो रही है। डॉ. महावर ने यह भी की कहा की राष्ट्र के विकास में महिलाओं के महत्त्व और अधिकार के बारे में समाज में जागरुकता लाने के लिये मातृ दिवस, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस आदि जैसे कई सारे कार्यक्रम सरकार द्वारा चलाए जा रहे हैं जिससे महिलाये सशक्त  बने | 

भारत में, महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए सबसे पहले समाज में उनके अधिकारों और मूल्यों को मारने वाली उन सभी राक्षसी सोच को मारना जरुरी है, जैसे – दहेज प्रथा, अशिक्षा, यौन हिंसा, असमानता, भ्रूण हत्या, महिलाओं के प्रति घरेलू हिंसा, वैश्यावृति, मानव तस्करी आदि। अपने देश में उच्च स्तर की लैंगिक असमानता है। जहाँ महिलाएँ अपने परिवार के साथ ही बाहरी समाज के भी बुरे बर्ताव से पीड़ित है।

नारी सशक्तिकरण का असली अर्थ तब समझ में आयेगा जब भारत में उन्हें अच्छी शिक्षा दी जाएगी और उन्हें इस काबिल बनाया जाएगा कि वो हर क्षेत्र में स्वतंत्र होकर फैसले कर सकें। स्त्री को सृजन की शक्ति माना जाता है अर्थात स्त्री से ही मानव जाति का अस्तित्व माना गया है। इस सृजन की शक्ति को विकसित-परिष्कृति कर उसे सामाजिक, धार्मिक ,आर्थिक, राजनैतिक और न्यायिक क्षेत्र में समान अवसर प्रदान करना ही नारी सशक्तिकरण है।

महिला सशक्तिकरण का अर्थ नारी के सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार लाना है। ताकि उन्हें रोजगार, शिक्षा, आर्थिक तरक्की के बराबरी के मौके मिल सके, जिससे वह सामाजिक स्वतंत्रता और तरक्की प्राप्त कर सके। यह वह तरीका है, जिसके द्वारा महिलाएँ भी पुरुषों के समान अपनी हर आकंक्षाओं को पूरा कर सकेगी।

आसान शब्दों में महिला सशक्तिकरण को इस प्रकार परिभाषित किया जा सकता है कि इससे नारी में उस शक्ति का प्रवाह होता है, जिससे वो अपने जीवन से जुड़े हर फैसले स्वयं ले सकती हैं एवं परिवार और समाज में अच्छे से रह सकती हैं। समाज में उनके वास्तविक अधिकारों को प्राप्त करने के लिए उन्हें सक्षम बनाना ही महिला सशक्तिकरण है। 

प्राचीन काल की अपेक्षा मध्य काल में भारतीय महिलाओं के सम्मान और स्तर में काफी कमी आयी है। जितना सम्मान उन्हें प्राचीन काल में दिया जाता था, मध्य काल में वह सम्मान घटने लगा था। महिलाएँ कई सारे महत्वपूर्ण राजनैतिक तथा प्रशासनिक पदों पर पदस्थ हैं, फिर भी सामान्य ग्रामीण महिलाएँ आज भी अपने घरों में रहने के लिए बाध्य है और उन्हें सामान्य स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सुविधाएँ भी उपलब्ध नहीं होती है।

महिला सशक्तिकरण के बिना देश व समाज में नारी को वह स्थान नहीं मिल सकता, जिसकी वह हमेशा से हकदार रही है। महिला सशक्तिकरण के बिना वह सदियों पुरानी परम्पराओं और दुष्टताओं से लोहा नहीं ले सकती। स्त्री सशक्तिकरण के अभाव में वह इस योग्य नहीं बन सकती कि स्वयं अपनी निजी स्वतंत्रता और अपने फैसलों पर आधिकार पा सके।

महिला अधिकारों और समानता का अवसर पाने में, महिला सशक्तिकरण ही अहम भूमिका निभा सकती है। क्योंकि स्त्री सशक्तिकरण महिलाओं को सिर्फ गुजारे-भत्ते के लिए ही तैयार नहीं करती, बल्कि उन्हें अपने अंदर नारी चेतना को जगाने और सामाजिक अत्याचारों से मुक्ति पाने का माहौल भी तैयारी करती है।

जिस तरह से भारत आज दुनिया के सबसे तेज आर्थिक तरक्की प्राप्त करने वाले देशों में शुमार हुआ है, उसे देखते हुए निकट भविष्य में भारत को महिला सशक्तिकरण के लक्ष्य को प्राप्त करने पर भी ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। भारतीय समाज में सच में महिला सशक्तिकरण लाने के लिए महिलाओं के विरुद्ध बुरी प्रथाओं के मुख्य कारणों को समझना और उन्हें हटाना होगा जो समाज की पितृसत्तामक और पुरुष युक्त व्यवस्था है। यह बहुत आवश्यक है कि हम महिलाओं के विरुद्ध अपनी पुरानी सोच को बदलें और संवैधानिक तथा कानूनी प्रावधानों में भी बदलाव लाए।

भले ही आज के युग  में महिलाएँ राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, प्रशासनिक अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी, वकील आदि बन चुकी हो, लेकिन फिर भी कुछ वर्ग की महिलाओ को आज भी सहयोग और सहायता की आवश्यकता है। उन्हें शिक्षा, और आजादी पूर्वक कार्य करने, सुरक्षित यात्रा, सुरक्षित कार्य और सामाजिक आजादी में अभी और सहयोग की आवश्यकता है। महिला सशक्तिकरण का यह कार्य काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत की सामाजिक-आर्थिक प्रगति महिलाओं की  सामाजिक-आर्थिक प्रगति पर ही निर्भर करती है।

महिला सशक्तिकरण महिलाओं को वह मजबूती प्रदान करती है।  जो उन्हें उनके हक के लिए लड़ने में मदद करती है। हम सभी को महिलाओं का सम्मान करना चाहिए, उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देना चाहिए। इक्कीसवीं सदी नारी जीवन में सुखद सम्भावनाओं की सदी है। महिलाएँ अब हर क्षेत्र में आगे आने लगी हैं। आज की नारी अब जाग्रत और सक्रीय हो चुकी है। “नारी जब अपने ऊपर थोपी हुई बेड़ियों एवं कड़ियों को तोड़ने लगेगी, तो विश्व की कोई शक्ति उसे नहीं रोक पाएगी।” वर्तमान में नारी ने रुढ़िवादी बेड़ियों को तोड़ना शुरू कर दिया है। यह एक सुखद संकेत है। लोगों की सोच बदल रही है, फिर भी इस दिशा में और भी प्रयास करने की आवश्यकता है।

मुख्य सचिव शिरीष नाथ माथुर ने कहा की  महिलाएं अब हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। चाहे घर हो या दफ्तर, महिलाओं को अक्सर पुरुषों की तुलना में सूक्ष्म प्रबंधन की अधिक जिम्मेदारियां सौंपी जाती हैं। दुनिया मानती है कि महिलाओं में पुरुषों की तुलना में अधिक लचीलापन और सहनशक्ति होती है।

महिलाएं नव निर्माण की सृजनकर्ता हैं। आज की महिलाएं न सिर्फ घर संभालती हैं बल्कि देश और दुनिया की तरक्की में भी अहम योगदान देती हैं। महिला दिवस  का उद्देश्य महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति में सुधार के बारे में जागरूकता बढ़ाना एवं  उन्हें उनके अधिकारों के बारे में जानकारी देना आवश्यक है ।

सह सचिव डॉ. प्रियदर्शी ओझा ने कहा की महिलाएं प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन, पोषण सुरक्षा और समुदाय के समग्र कल्याण को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं | बच्चों के समग्र विकास और शिक्षा का स्तर माँ की शिक्षा से सीधे जुड़ा होता है। इसके अलावा, भारत में लगभग 70-80% स्वास्थ्य सेवाएँ महिलाओं द्वारा प्रदान की जाती हैं |

संगठन सचिव विशाल माथुर ने कहा की वर्तमान में राजस्थान सरकार द्वारा महिलाओं को सशक्त, स्वास्थ्य, शिक्षा में सुधार लाने और आत्मनिर्भर बनाने हेतु योजनाएं चलाई जा रही है जैसे मुख्यमंत्री राजश्री योजना ,लाडो प्रोत्साहन योजना,उड़ान योजना,मुख्यमंत्री एकल नारी सम्मान पेंशन योजना,लखपति दीदी योजना,मुख्यमंत्री नारी शक्ति उद्यम प्रोत्साहन योजना,मुख्यमंत्री वर्क फ्रॉम होम-जॉब वर्क योजना,राजस्थान महिला निधि जिसका उद्देश्य महिलाओं  के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना, उनके स्वास्थ्य और शिक्षा के स्तर में सुधार करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।

धन्यवाद् देते हुए समन्वयक विनोद चौधरी ने कहा की आज भी ग्रामीण क्षेत्र के कई परिवार की महिलाये जो शिक्षा से वंचित है एवं रोजगार की तलाश में रहती है उन्हें मुख्य धारा से जोड़ने की आवश्यकता है |

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