छोटे भाई का बड़े भाई के प्रति क्या हैं कर्तव्य - आचार्य सत्यनारायण पाटोदिया

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संस्कार सृजन राम गोपाल सैनी 

जयपुर (संस्कार सृजन) जयपुर निवासी आध्यात्मिक चिन्तक और नैतिक प्रेरक आचार्य सत्यनारायण पाटोदिया ने बताया कि ऐसा कोई हिंदू नहीं होगा जिसने रामायण नहीं पढ़ी हो।


रामचरितमानस में लक्ष्मण जी भगवान श्री राम की सेवा करने के लिए वन में उनके साथ चले जाते हैं। उनका छोटा भाई भरत अयोध्या का सिंहासन त्याग करके अयोध्या के नागरिकों की सेवा करता है। भाइयों का आपस में प्यार रामायण में दिखाया गया है। 

विभीषण भी अपने भाई रावण को समझाने की कोशिश करता है, परंतु असफल रहता है। कुंभकरण भी अपने बड़े भाई के लिए युद्ध करते-करते जान दे देता है। द्वापर युग में भी श्री कृष्ण भगवान अपने बड़े भाई श्री बलराम जी का पूरा आदर करते हैं।

परंतु कलियुग में छोटा भाई बड़े भाई को पूछता ही नहीं है और आशा यह करता है कि वह छोटा भाई है इसलिए उसको सब लोग प्यार करें। उसकी देखभाल करें, उसको लाड़ प्यार से रखें। परंतु छोटे भाई को यह समझ में ही नहीं आता है कि उसका बड़े भाई के प्रति कोई कर्तव्य भी है या नहीं है। 

बड़े बुजुर्ग कहते थे कि बड़ा भाई बाप बराबर होता है, क्योंकि माता-पिता के जीवित रहते हुए और उनके गुजर जाने के बाद बड़ा भाई ही छोटे भाई की देखभाल करता है, उसकी सार - संभाल करता है। इसलिए बड़े भाई पर अधिक जिम्मेदारी होती है और छोटे भाई की अधिक मौज रहती है। कोई भी मुसीबत आने पर छोटा भाई दौड़ा-दौड़ा बड़े भाई के पास आता है, अपनी समस्याओं को बड़े भाई से कहकर राहत की सांस लेता है। 

उधर बड़ा भाई बेचारा अपनी समस्याओं के साथ जूझता रहता है, परंतु छोटा भाई उसे कभी पलट कर नहीं पूछता है कि उसकी समस्या में वह क्या सहायता कर सकता है? 

यहां तक देखा गया है कि छोटा भाई अपने बड़े भाई से सप्ताह में एक बार भी फ़ोन करके हाल-चाल पूछने की कोशिश नहीं करता है, परंतु अपने मन में यह चाहता है कि सब उसको प्यार करें, चाहे वह कितने ही उल्टे सीधे काम करें, सब उसको सपोर्ट करें। मुसीबत आने पर उसका साथ देवें और सहायता करें।

चूंकि बचपन से ही उसको दूसरों से ज्यादा प्यार मिला और ज्यादा देखभाल मिली, इसलिए वह आलसी हो जाता है और यह चाहता है कि जैसा व्यवहार उसे बचपन में मिला, वैसा ही जिंदगी भर मिलता रहे, परंतु बचपन में छोटा होने के कारण बड़े भाई की कुछ सेवा नहीं कर पाता था, तो उसकी आदत पड़ जाती है की बड़े भाई का ख्याल नहीं रखा जावे।

परंतु छोटे भाइयों को यह समझना चाहिए कि बड़े भाई के प्रति उनके भी कुछ कर्तव्य हैं और यदि वे अपने कर्तव्य को पूरा नहीं करेंगे, तो बड़े भाई के गुजर जाने यानी उनका स्वर्गवास हो जाने के बाद उनको गहरा पछतावा होगा कि उन्होंने अपने बड़े भाई की कोई भी सेवा नहीं की।  

वैसे तो भाइयों में आपस में बहुत प्रेम होता है और कभी उस प्रेम में बाधा नहीं आती है, परंतु जब भाइयों का विवाह हो जाता है और उनकी पत्नियां उनके कान भरने के लिए तैयार रहती है, तब सारा प्रेम समाप्त हो जाता है और दोनों भाइयों के बीच में स्वार्थ का जन्म हो जाता है। इस स्वार्थ के कारण भाइयों में मनमुटाव हो जाता है। छोटे भाई को लगता है कि बड़ा भाई बदल गया है और बड़े भाई को लगता है कि छोटा भाई बिल्कुल बदल गया है। 

छोटे भाई को यह समझ लेना चाहिए कि दुनिया में जो पहले आता है, वह पहले जाता है। ऐसा साधारणतः होता है। बड़ा भाई जल्दी स्वर्गलोक को चला जाएगा और उसके बाद छोटे भाई को जो अकेलापन खाएगा और उस समय उसे जो अपनी गलतियां याद आएगी, उनका प्रायश्चित वह कभी नहीं कर पाएगा। 

अधिक अच्छा तो यह होगा कि छोटे भाई को उन लोगों से संपर्क करना चाहिए जिनके बड़े भाई गुजर गए हैं और उनकी इस समय क्या मानसिक स्थिति है,  इसका अध्ययन करके अपना व्यवहार समय रहते सुधार लेना चाहिए, जिससे कि उनको बाद में पछताना नहीं पड़े। 

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