अहिल्याबाई होलकर की जन्म त्रिशताब्दी के उपलक्ष्य में व्याख्यान का हुआ आयोजन

जीवन अनमोल है इसे आत्महत्या कर नष्ट नहीं करें !

सुबह की शुरुआत माता-पिता के चरण स्पर्श से करें !

संस्कार सृजन राम गोपाल सैनी

चौमूं / जयपुर (संस्कार सृजन) अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (राजस्थान) उच्च शिक्षा की स्थानीय इकाई राजकीय कन्या महाविद्यालय, चौमूं  में पुण्यश्लोका लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की जन्म त्रिशताब्दी के उपलक्ष्य में व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के अखिल भारतीय प्रकाशन प्रकोष्ठ प्रमुख एवं शैक्षिक मंथन के सम्पादक प्रो. शिवशरण कौशिक ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत के इतिहास में पुण्य श्लोका लोकमाता, राजमाता अहिल्याबाई होलकर का भारत की गौरवशाली सांस्कृतिक परम्परा के संरक्षण एवं संवर्धन में महत्त्वपूर्ण स्थान है । उनके शिक्षा दर्शन, समाज चिंतन, आर्थिक चिंतन , कौशल विकास तथा समरसता के सिद्धान्त आज भी प्रासंगिक हैं। लोकमाता अहिल्याबाई होलकर द्वारा महिला शिक्षा, वंचित वर्ग तथा आर्थिक रूप से अभावग्रस्त बच्चों की शिक्षा के लिए खोले गए संस्थान तथा उनके द्वारा दी गयी आर्थिक सहायता उल्लेखनीय है।  

उन्होंने भारत के चारों ओर स्थापित धार्मिक स्थलों , नदियों के किनारे बने घाटों, शिक्षण संस्थाओं, धर्मशालाओं ,सड़कों, नहरों, जलाशयों आदि का निर्माण करवा कर अपने राज्य ही नहीं बल्कि समूचे देश को विकसित बनाने में अपना योगदान दिया।

राजमाता अहिल्याबाई होलकर के शुचितापूर्ण तथा महान जीवन दर्शन से हमारे राजनीतिज्ञों ,शिक्षकों, समाजसेवियों, विद्यार्थियों आदि को शिक्षा ग्रहण करने की आवश्यकता है। कार्यक्रम में दौसा जिला सचिव डाॅ. सुरेश कुमार शर्मा ने विषय प्रवर्तन करते हुए संगठन की रीति -नीति एवं विचारात्मक कार्यक्रमों के आयोजनों पर अपने विचार प्रकट किये।उन्होंने अहिल्याबाई होलकर के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि राजमाता अहिल्याबाई होल्कर का जीवन वर्तमान में समाज- जीवन के सभी क्षेत्रों में प्रासंगिक है। 

अध्यक्षीय उद्बोधन में महाविद्यालय की कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. उषा परनामी ने राजमाता अहिल्याबाई के जीवन से छात्राओं को प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एक सामान्य परिवार से राजमाता बनने तक की जीवन यात्रा सभी छात्राओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनके जीवन संघर्ष को अपना कर विद्यार्थी भी अपने जीवन के लक्ष्य की प्राप्ति कर सकते हैं। सहायक आचार्य भगवान सहाय शर्मा ने सभी का आभार प्रकट किया। 

कार्यक्रम का संचालन महाविद्यालय के सह आचार्य एवं स्थानीय इकाई सचिव डाॅ. चन्द्र मोहन राजोरिया ने किया। महाविद्यालय के आचार्य डॉ .मीनाक्षी जैन, डाॅ. हेमलता आकोदिया, शमशेर खान, डाॅ. माधुरी गोस्वामी, डॉ. हंसा लुणायच, डाॅ. सुरेश कुमार वर्मा, डाॅ. उमेश कुमार, डाॅ. रामधन सैनी, डाॅ. रीना शक्तावत, नीलम शर्मा, अजय कुमार, कमल श्योरान, शिव सैनी सहित छात्राओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही।

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