राधा स्वामी सत्संग सहजो में हुआ विशाल सत्संग एवं भंडारे का आयोजन

जीवन अनमोल है इसे आत्महत्या कर नष्ट नहीं करें !

सुबह की शुरुआत माता-पिता के चरण स्पर्श से करें !

संस्कार सृजन राम गोपाल सैनी        

चौमूं / जयपुर (संस्कार सृजन) राधा स्वामी सत्संग सहजो चौमूं , डेरा बाबा मेघादास महाराज तपोभूमि के तत्वावधान में महाराज सहजो बाई की 21वीं पुण्यतिथि पर विशाल सत्संग एवं भंडारे का आयोजन किया गया। संत सेवा दास महाराज ने अपने प्रवचनों में संत सहजोबाई के जीवन पर प्रकाश डाला। 

राधा स्वामी नाम की अलख जगाने वाले डेरे के संस्थापक बाबा मेघादास महाराज की आध्यात्मिक विरासत को आगे बढ़ाने में अपना संपूर्ण जीवन आध्यात्मिक सेवा में लगाकर दूर-दराज तक लोगों में जो अज्ञानता की धूल छाई हुई थी उसे हटाकर राधा स्वामी नाम की शरण में लेकर ज्ञान के एक दीपक को अनवरत रखा ,जिसके प्रकाश में वर्तमान में डेरे में संगत लाखों की तादाद में जुड़कर आज भी लोग इस लौकिक युग में व्याप्त आदि व्याधि से ग्रसित लोगों को राधा स्वामी दयाल की दया से संगत को सत्संग द्वारा उनके मन मस्तिष्क एवं वातावरण में छाई हुई धूल को दूर कर सही मार्ग की तरफ लगाया जिससे लोगों को मानसिक शांति होने के साथ-साथ आध्यात्मिकता की तरफ धीरे-धीरे कदम बढ़ते गए । 

यह मार्ग एक बहुत ही सहज एवं सरल है | एक वक्त गुरु की शरण लेकर उनके द्वारा बताए गए नाम पांच नाम के अभ्यास को जितना अधिक हम नाम रूपी माला को अपने हृदय में  अभ्यास करेंगे उतनी ही आध्यात्मिक प्रगति होती रहेगी | साथ ही इससे लौकिक युग के संतापो से भी जीव बचा रहेगा | दरबार में मेरे सतगुरु के दुख दर्द मिटाये जाते हैं, दुनिया की सताए लोग यहां सीने से लगाये जाते हैं। यह मत एक करनी का मार्ग है | सत्संग एक ऐसी छाया है जिसमें बैठने से जीव को शीतलता का अनुभव होता है | इस मायावी काल के देश में जीव पर काम ,क्रोध ,लोभ,मोह, अहंकार के वशीभूत होकर यह अपना अस्तित्व भूल जाता है | जब जीव को संत महात्माओं का सत्संग एवं शरण मिलती है तो यही मानसिक एवं शारीरिक विकार शील, क्षमा, संतोष, दया और प्रेम में परिवर्तित हो जाते हैं | जीव भी धीरे-धीरे विनम्र होकर अपने आप का स्वरूप पहचाने लगता है | सत्संग के साथ-साथ मानव जन्म मिलना भी एक कल्पवृक्ष के समान होता है | बडे भाग मानुष तन पाया, कोटी जन्म जब भटका खाया | 

मानव तन पाकर हम लौकिक क्रियाकलापों के साथ-साथ गुरु भक्ती भी आसानी से कर सकते हैं | 84 लाख भोग जोनियों में सबसे सर्वश्रेष्ठ मानव चोला बताया गया है | जिस प्रकार आज इस वैज्ञानिक युग की खोज की एक मिसाल मोबाइल है, जिससे हम दुनिया में कहीं भी बात कर सकते हैं | इस प्रकार मानव जन्म का भी मूल उद्देश्य मालिक की शरण में जाकर नाम की कमाई करना है | इस प्रकार सतगुरु से जुड़ने पर हम आध्यात्मिक क्षेत्र की पहली सीढी को वक्त के सतगुरु से नाम दान लेकर इस काल के देश की हद से बाहर जाकर दयाल देश में प्रवेश कर सकते हैं जहां आनंद ही आनंद है | जहां भजन सिमरन ध्यान से आत्मिक एवं आध्यात्मिक प्रगति होती है | जब वह मालिक का ध्यान करता है तो मालिक भी उसका पूरा ध्यान रखना है | 

राधास्वामी कोऑर्डिनेटर  गुरु चरण सैनी ने बताया कि भंडारे में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने पंगत प्रसादी ग्रहण की |

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