डिजिटल हरित क्रांति मूल्यांकन में 12,300 पौधों को मिला जीवन दान

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संस्कार सृजन राम गोपाल सैनी

नई दिल्ली (संस्कार सृजन) राष्ट्रीय डिजिटल हरित क्रांति, उदयपुर के जनक ललित नारायण आमेटा, निदेशक, फॉस्टर भारतीय पर्यावरण सोसाइटी ने कोरोना काल में घर बैठे पर्यावरण प्रेमियों के उत्साहवर्धन हेतु हरित भारत निर्माण के लिए डिजिटल हरित क्रांति का माननीय अतिरिक्त मुख्य नायक मजिस्ट्रेट वल्लभनगर के द्वारा शुभारंभ 2020 में करवाया। सत्र 2023 डिजिटल हरित क्रांति के अध्यक्ष आर. के. सिंह, मुख्य वन संरक्षक, उदयपुर के अनुसार : सभी को वृक्षारोपण के महत्व के बारे में जागरूक होना चाहिए और दूसरों को भी अधिक से अधिक पेड़ लगाने के लिए प्रेरित करना चाहिए।


डॉ मोनिका रघुवंशी, जिला अध्यक्ष, भारतीय जैव विविधता संरक्षण सोसाइटी बतातीं हैं कि पेड़ एक भौतिक फिल्टर के रूप में काम करते हैं, धूल को रोकते हैं और हवा से प्रदूषकों को अवशोषित करते हैं। वे सौर विकिरण से छाया भी प्रदान करते हैं और शोर भी कम करते हैं। शोध साबित करता है कि पेड़ों और हरे भरे स्थानों से घिरे रहने के कुछ ही मिनटों के भीतर रक्तचाप कम हो जाता है, हृदय गति धीमी हो जाती है और तनाव का स्तर कम हो जाता है।

डॉ सुनील दुबे, पारिस्थितिकी वैज्ञानिक के शोध के अनुसार एक परिपक्व बड़ा वृक्ष 500 से अधिक विभिन्न प्रजातियों का घर हो सकता है। प्रौद्योगिकी के साथ भी, अधिकांश लोग अभी भी दवा के लिए समग्र पेड़ों पर निर्भर हैं। पेड़ अधिकांश बीमारियों का इलाज करते हैं।

ओ. पी. शर्मा, सेवानिवृत्त भारतीय वन अधिकारी एवं सदस्य कहते हैं कि पेड़ अर्थव्यवस्था को बढ़ाते हैं। लोग हरे-भरे परिवेश में रहना, काम करना और निवेश करना चाहते हैं। शोध से पता चलता है कि जब संपत्ति परिपक्व पेड़ों के करीब होती है तो घर की औसत कीमतें 5-20% अधिक होती हैं। यदि आस-पास पार्क और पेड़ हों तो कंपनियों को स्वस्थ, खुशहाल कार्यबल से लाभ मिलता है। डॉ लक्ष्मीनारायण आमेटा, राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय पर्यावरण एवं खनिज संरक्षण मंच कहते हैं कि पेड़ समुदायों को मजबूत बनाते हैं। पेड़ किसी स्थान के विशिष्ट चरित्र को बनाए रखते हैं और स्थानीय गौरव को बढ़ावा देते हैं। 

हितेष श्रीमाल, वरिष्ठ अध्यापक व जिला अध्यक्ष , बायोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डेवलपमेंट सोसाइटी अरावली क्षेत्र से बीजों का संग्रहण कर मिट्टी, खाद और पानी से सीड बॉल बना कर पुनः आस -पास के वन क्षेत्र में विसरित कर प्रकृति को हरितम बनाने में हर वर्ष योगदान देते हैं। इस वर्ष भी 1800 के लगभग बीजारोपण किया। आजाद नेहरू युवामंडल, शंभूपुरा, चित्तौड़गढ़ ने 3000 पौधे तैयार कर, 2000 पौधे निशुल्क वितरित किए व 65 स्थानीय प्रजातियों के सीड बैंक बनाकर कुल 5065 पौधारोपण किए। अध्यापक पवन कुमार टेलर के संचालन में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय के विद्यार्थियों ने मिलकर लगभग 2100 सीड बॉल (स्थानीय परिवेश के बीज जैसे नीम, इमली, किकर, जामुन, करंज, खजूर ) बनाकर अपने परिक्षेत्र में फेकने का निर्णय लिया।

वर्तमान समय में डिजिटल माध्यम हर क्षेत्र में कारगर साबित हो रहा है। ऐसे में डिजिटल हरित क्रांति के तहत विभिन्न क्षेत्रों के लोगों ने पौधारोपण कर, वीडियो सांझा कर सबको प्रेरित किया। एक दर्जन से अधिक पौधारोपण करने वालों को ई- सर्टिफिकेट प्रदान कर सम्मानित किया गया। इसके फलस्वरूप 12300 पौधा रोपण हो चुका है और अधिक से अधिक सफलता की उम्मीद है। 

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