14 जुलाई अंतर्राष्ट्रीय चिंपांजी दिवस पर विशेष लेख

जीवन अनमोल है इसे आत्महत्या कर नष्ट नहीं करें !

सुबह की शुरुआत माता-पिता के चरण स्पर्श से करें !

संस्कार सृजन राम गोपाल सैनी

जयपुर (संस्कार सृजन) कुछ महत्वपूर्ण व ऐतिहासिक घटनाओं को यादगार बनाने के लिए हम उनको चिह्नित करके विशेष रूप से मानते है। इसके अलावा दुनिया में महत्वपूर्ण विषय जैसे कोई बीमारी, गरीबी,स्वच्छता,लैंगिक समानता आदि के लिए जागरूकता पैदा करने के लिए भी कुछ दिन मनाए जाते हैं। उसी प्रकार कुछ दिन पर्यावरण व उसकी समृद्ध जैव विविधता के प्रति लोगो को जागरूक करने के लिए भी मनाए जाते है। इन्हीं महत्वपूर्ण दिनों में से एक है विश्व चिंपैंजी दिवस। इसे पहली बार 2019 में मनाया गया था। 14 जुलाई लंबे समय से एक विशेष अवसर रहा है | 1960 में इसी दिन डॉ. जेन गुडॉल, डीबीई ने गोम्बे नेशनल पार्क, तंजानिया के जंगली चिंपांज़ी पर अपना अग्रणी शोध शुरू किया था। यह वर्ष चिंपांज़ी को बचाने के लिए एक प्रयास है।

दुर्भाग्य से चिंपैंजी IUCN की रेड लिस्ट में लुप्तप्राय हैं। 20 वीं सदी के अंत में, अफ़्रीका के 25 देशों में अनुमानित 1-2 मिलियन चिंपैंजी थे। वर्तमान अनुमान बताते हैं कि अब केवल 21 अफ्रीकी देशों में 350,000 चिंपांज़ी बचे हैं। वे प्राकृतिक आवासों के नुकसान, बीमारी, खंडित आबादी, अवैध वन्यजीव तस्करी जैसे खतरों से पीड़ित हैं और अभी भी दुनिया भर में कई जैव चिकित्सा अनुसंधान सुविधाओं के साथ-साथ सड़क के किनारे के आकर्षणों और गैर-मान्यता प्राप्त चिड़ियाघरों में अवैध पालतू जानवरों के रूप में रखे गए हैं। हमें मिलकर इन खतरों को रोकने और चिंपैंजी को बचाने के लिए जेन गुडॉल संस्थान महत्वपूर्ण कार्य कर रही है।

एप्स प्रजाति के सदस्यों में प्रमुख जीव मनुष्य व चिंपांजी हैं। साठ लाख वर्ष पूर्व मनुष्य व चिंपांजी के पूर्वज एक ही थे। चिंपांजी का मस्तिष्क मनुष्य की तुलना में आधे आकार का होता है। चिंपांजी की औसत आयु 40 वर्ष तक होती है। चिंपांजी पदानुक्रम में रहते हैं जिसमें एक से अधिक सदस्य प्रभावशाली हो सकते हैं जो नीचे वाले सदस्यों को शक्ति प्रदर्शन द्वारा दबाकर रखते हैं।

चिंपांजी की बुद्धिमता व रोचक तथ्य :- 

- चिंपांजी रणनीतियों व छल कपट में सक्षम होते हैं।

- चिंपांजी पत्थर व छड़ीनुमा उपकरणों का उपयोग खुदाई व दीमक निकालने के लिए करते हैं।

- यह संकेत व आवाजों के माध्यम से संपर्क करते हैं।

- चिंपांजी शोक प्रदर्शन, प्रेम व्यवहार, वर्षा नृत्य इत्यादि करते हैं।

- चिंपांजी फल, कीड़े, अंडे व मास खाते हैं। अतः सर्वाहारी होते हैं।

- चिंपांजी खसरा, दाद, हेपेटाइटिस बी इत्यादि बीमारियों से संक्रमित हो सकते हैं।

- समुदाय में स्पर्श का आदान प्रदान करते हैं।

-  चिंपांजी इंसानों से 6 से 7 गुना अधिक ताकतवर होते हैं।

- यह मानव संकेतिक भाषा सीख सकते हैं।

- बीमार होने पर यह औषधीय पौधों का सेवन करते हैं।

हूलॉक गिब्बन भारत में पाया जाने वाला एकमात्र एप्स है, जो हाइलोबैटिडे के गिब्बन परिवार के हूलॉक जीनस से संबंधित है। दुर्भाग्य से, गोरिल्ला और चिंपैंजी जैसे अन्य एप्स  नहीं पाए जाते।

लेखक : डॉ. मोनिका रघुवंशी व डॉ. सोनिका कुशवाह (भारतीय जैव विविधता संरक्षण संस्थान)

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