जीवन अनमोल है , इसे आत्महत्या कर नष्ट नहीं करें !
सुबह की शुरुआत माता-पिता के चरण स्पर्श से करें !
संस्कार सृजन @ राम गोपाल सैनी
जयपुर (संस्कार सृजन) बाबू जगजीवनराम जब पढ़ते थे तभी वे अपने दलित वर्ग के बच्चों के भविष्य के लिए चिंतित थे। वे स्पष्ट कहते थे कि छुआछूत इन लोगों को उचित अवसर से वंचित करती है एवं समाज में दासता का पुट आ जाता है। उनका विश्वास था कि जब तक समाज व आर्थिक व्यवस्था में परिवर्तन नहीं किया जायेगा तब तक छुआछूत समाप्त नहीं होगी इसके लिए वे सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक दृष्टि से एक क्रांति लाने की आवश्यकता समझते थे। उनको छुआछूत के विरूद्ध केवल मांस, मदिरा त्याग कर शुद्ध जीवन व्यतीत करने का भाषण जले पर नमक छिडकने का काम करता था।
बाबू जगजीवन राम का जन्म 5 अप्रेल 1908 में बिहार के चन्दवा गांव में एक गरीब हरिजन परिवार में हुआ था। प्रारम्भ से ही शिक्षा ग्रहण करने में उनकी रूचि थी और बनारस व कलकत्ता विश्वविद्यालय में शिक्षा प्राप्त की। आजादी के आन्दोलन में महात्मा गांधी की प्रेरणा से उन्होंने भागीदारी भी की। सत्याग्रह आन्दोलन में सक्रिय रूप से भाग लेने के उद्देश्य से उन्होंने 1939 में बिहार मंत्रिमण्डल से त्यागपत्र दे दिया। युवावस्था में बाबू जगजीवनराम ने राष्ट्रवादी हरिजनों एवं मजदूरों को संगठित करने का महत्वपूर्ण कार्य किया एवं अपने जीवन के अंतिम संमय तक दलितों एवं पिछडे वर्गो के हितों के लिए कार्य करते रहे।
डाॅ. सत्यनारायण सिंह
अपने लेखों व भाषणों में वे रविदास, कालिदास के विचारों का भी उल्लेख करते थे। दोषारोपण करना उनकी आदत नहीं थी और वर्ग भेद, जाति प्रभा के लिए उन्होंने मनुस्मृति को दोष नहीं दिया। उन्होंने उच्च वर्ग के प्रति अपने मन में कभी राग द्वैष नहीं रखा। महावीर स्वामी व गौतम बुद्ध ने अनुष्ठान और कर्मकांड पर आधारित ब्राह्मण परंपराओं की जगह शुद्ध आचरण को महत्व दिया। स्वामी विवेकानन्द ने भी कर्मकांड, अनुष्ठानों, अर्थहीन उत्सवों की आलोचना की और यहां तक कहा कि पुरानी रूढिवादी परम्परायें बदलते युग में अपना अर्थ खो चुकी है। बाबू जगजीवनराम इन विचारों से भी प्रभावित हुए। रविदास के ‘‘जांत पांत पूछे नहीं कोई, हरि को भजे सो हरि को होई’’ में उनका विश्वास था।
राजा राममोहन राय ने पश्चिम के क्रांतिकारी विचारों को प्रस्तुत किया, स्वामी दयानन्द ने मानव-मानव में परस्पर भाईचारे की भावना पर बल दिया। लोकमान्य तिलक ने निष्काम कर्म का आव्हान किया परन्तु कठोर वर्ण व्यवस्था व अन्याय को पूर्ण रूप से समाप्त करने में उन्हें सफलता नहीं मिली। इन सुधारवादी महापुरूषों के विचारों ने नये मत मतान्तरों को जन्म दिया। महात्मा गांधी के विचारों से भी वे अत्यधिक प्रभावित हुए और उनका कहना था कि करोड़ों लोगों को गांधी जी उन ऋषियों की तरह लगे जिनका प्राचीन धार्मिक ग्रंथों में वर्णन है। गांधीजी कहते थे कि गुलामी का कारण अंग्रेजों की बंदूके नहीं बल्कि हमारे समाज की गलत व्यवस्थायें है। वे सभी धर्मो में विश्वास करते थे और श्रद्धालु हृदय के थे। बाबू जगजीवनराम वर्ग संघर्ष व आपसी वैमनस्यता में विश्वास नहीं करते थे।
गांधीजी के विचारों के अनुसार सवर्णो की मानसिकता में बदलाव लाकर एवं दलितों को विशेष अवसर प्रदान कर प्रगतिशील विचारों को अपनाते हुए विकास की ओर अग्रसर करने में उनका विश्वास था। धर्म परिवर्तन में उनका विश्वास नहीं था। वे कहते थे कि यद्यपि दलितों ने सवर्ण हिन्दुओं के हाथों अत्याचार सहे, तो भी मैं समझता हूं कि हिन्दू धर्म का परित्याग करके वे अपनी समस्याओं को हल नहीं कर सकते। जब तक जाति वर्ग को पूर्णतः निर्मूल नहीं कर दिया जा, भूमि का नये सिरे से बंटवारा नहीं होता और अछूत कहे जाने वाले लोगों को बराबर अवसर नहीं दिये जाते तब तक भारत फल फूल नहीं सकता। उनका कथन था कि अब नामों के साथ जातिसूचक नाम और पदों को लिखने पर पाबंदी लगा देनी चाहिए अन्यथा यह बात हमारे राष्ट्रीय और भावनात्मक एकीकरण में बाधक हो सकती है। बाबू जगजीवनराम के अनुसार अकेली जातिवाद को निर्मूल नहीं कर सकते, न ही कानून पास कर ऐसा करना संभव है। उनका मत था कि जब तक लोग जातिवाद के गंभीर खतरों को नहीं समझेंगे, सफलता की कोई आशा नहीं है और भारत तभी समृद्ध हो सकता है जब जातिवाद, छुआछूत समाप्त हों। बाबू जगजीवनराम ने आरक्षण का समर्थन करते हुए कहा था कि आरक्षण का विरोध करने वाले राष्ट्र को अपनी इजारेदारी मानते हैं और उन्हें डर है कि विशेष आरक्षणों से विघटनकारी शक्तियों को बल मिलेगा। उनका मानना था कि यह भय एकदम निराधार है और इसके विपरीत इन आरक्षणों से पिछड़ी जातियों में विश्वास पैदा होगा कि उन्हें प्रगति के अवसरों से वंचित नहीं रखा गया।
बाबूजी के अनुसार इस समस्या का हल केवल सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था के क्रांतिकारी परिवर्तनों से ही संभव है। उनके अनुसार लोगों की विचारधाराओं में परिवर्तन करते समय मूल रूप से सामाजिक, आर्थिक बुराईयों को समाप्त करना होगा जिनके कारण छुआछूत व जातिगत भेदभाव पैदा होता है।
समस्याओं को अनुसूचित जाति के दृष्टिकोण से नहीं बल्कि सारे देश के दृष्टिकोण से देखे तो यह समस्याएं समाप्त की जा सकेंगी। उनके अनुसार भारत वर्ष में वे लोग सबसे अधिक निर्धन है जो सामान उत्पादित करते है। गरीब, मजदूर, कारीगर इसके लाभों से वंचित रहते है और लाभ उन लोगों के हाथ में चला जाता है जिनके हाथों में शक्ति है। उनका यह भी मत था कि शोषण के उन्मूलन को एक आन्दोलन का रूप देना होगा।
बाबू जगजीवनराम पूर्णतः सहमत थे कि जाति, नस्ल, कबीले पर आधारित समूहों की आज के युग की कोई सार्थकता नहीं है। उनका मत था कि हमारा उद्देश्य अच्छा है और अच्छे उद्देश्य से ही हम मानवीय भावनाओं को बदल सकते है। संविधान की बातों से दृढ प्रतिज्ञ होकर संगठित ढंग से समाज में बदलाव आवश्यक है। जब पिछड़े वर्गो के आरक्षण की मांग करते है तो हिन्दुओं को यह नहीं सोच लेना चाहिए कि इससे राष्ट्रीय एकता खतरे में पड़ जायेगी बल्कि उनके प्रति अच्छी भूमिका निभानी चाहिए जिन्होंने आधारभूत सुविधाएं प्रदान की।
जो लोग सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक व सांस्कृतिक रूप से पिछड़े है, उनके लिए आरक्षण की व्यवस्था लोकतंत्र में अनमोल है। राजस्थान में छुआछूत को मिटाने के लिए उन्होंने दलित वर्ग संघ द्वारा आयोजित बीकानेर डिवीजन और उदयपुर डिवीजन के सम्मेलनों में भाग लिया और उन्हीं की प्रेरणा से दलित वर्ग संघ के तत्वाधान में हमने जयपुर में हरिजनों का मंदिर प्रवेश, सार्वजनिक स्थानों, होटलों, रेस्टोरेंट आदि में प्रवेश, हरिजनों पर किये जाने वाले अत्याचार का विरोध करना आदि कार्यक्रम बनायें जिसने काफी हद तक भेदभाव, राग द्वैष व कटुता को कम करने में मदद की।
लेखक : डाॅ. सत्यनारायण सिंह (रिटायर्ड आई.ए.एस.)
नोट : ये लेखक के अपने विचार हैं |
बहुत जरूरी सूचना :- रात को दुर्घटना से बचने के लिए अपनी गाड़ी को लो बीम में चलाएँ !
हम सभी किसी ना किसी रूप में जरूरतमंदों की सेवा कर सकते हैं | पड़ोसी भूखा नहीं सोए इसका ध्यान रखें |
" संस्कार सृजन " कोरोना योद्धाओं को दिल से धन्यवाद देता है |
विडियो देखने के लिए -https://www.youtube.com/channel/UCDNuBdPbTqYEOA-jHQPqY0Q
" संस्कार सृजन " कोरोना योद्धाओं को दिल से धन्यवाद देता है |
विडियो देखने के लिए -https://www.youtube.com/channel/UCDNuBdPbTqYEOA-jHQPqY0Q
अपने आसपास की खबरों , लेखों और विज्ञापन के लिए संपर्क करें - 9214996258, 7014468512,9929701157.
इमरजेंसी नंबर :- पुलिस कंट्रोल रूम- 100, चौमूं थाना - 01423-221009, डीसीपी पूर्व- 0141-2203400, एसीपी चौमूं -01423-221456, गोविंदगढ़ थाना-01423-230023, डीएसपी गोविंदगढ़-01423-230905, जयपुर ग्रामीण एसपी-0141-2206869, एंबुलेंस-108, सीएचसी चौमूं -01423-221424, सीएचसी गोविंदगढ़ - 01423-230077, सीएचसी सामोद-01423-240105, बिजली हेल्पलाइन-6376917467, एक्स ईएन चौमूं-01423-220069






0 Comments