प्रदेश का तृतीय श्रेणी शिक्षक संवर्ग आहत, उद्वेलित, आक्रोशित व आंदोलन को मजबूर

जीवन अनमोल है इसे आत्महत्या कर नष्ट नहीं करें !

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संस्कार सृजन राम गोपाल सैनी

जयपुर (संस्कार सृजन) राजस्थान प्रदेश में संचालित कुल 65000 सरकारी विद्यालयों में कार्यरत 2,16,889 तृतीय श्रेणी शिक्षकों में से तबादलों के इच्छुक लगभग 85,000 शिक्षकों ने अगस्त 2021 में तबादलों के लिए शाला दर्पण पोर्टल पर आवेदन कर दिए थे । लेकिन, सरकार के असंवेदनशील जनप्रतिनिधियों और स्वार्थी शिक्षक संगठनों का तृतीय श्रेणी शिक्षकों के प्रति दोगलेपन वाला रवैया और उनकी नियत में खोट स्पष्ट नजर आ रही है कि उन्हें तबादलों का तोहफा ना देकर तबादला नीति का बेसुरा राग अलापा जा रहा है । जबकि शिक्षा विभाग के अन्य कैडर्स जैसे वरिष्ठ अध्यापक, व्याख्याता, हेड मास्टर, प्रिंसिपल, शिक्षा अधिकारी, आदि के तबादले बिना किसी तबादला नीति के बंपर रूप से किए गए हैं । राज्य सरकार द्वारा तबादला आवेदन लिए जाने की 18 माह बीत जाने के पश्चात भी विशेषकर तृतीय श्रेणी शिक्षकों, प्रबोधको एवं शारीरिक शिक्षकों के तबादले ना करने से इस संवर्ग में सरकार,जनप्रतिधियो एवं स्वार्थी शिक्षक संगठनों के प्रति भारी रोष व्याप्त है । 

शिक्षक नेता कैलाश सामोता रानीपुरा ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में खरपतवार की तरह पनप चुके झोलाछाप, स्वार्थी शिक्षक संगठन तृतीय श्रेणी शिक्षकों की पीड़ा को नहीं समझ रहे हैं और सरकार की गोद में जा बैठे हैं । लेकिन उन्हें यह नहीं समझना चाहिए कि प्रदेश का लगभग 2.17 लाख संख्या वाला तृतीय श्रेणी शिक्षक संवर्ग आपके इस दोगले व्यवहार को अच्छी तरह से जवाब देने में सक्षम है और वक्त आने पर आपको एहसास भी करवाएगा । सामोता का आरोप है कि प्रदेश में खरपतवार की तरह फैल चुके विभिन्न शिक्षक संगठन और उनके शिक्षक नेता लोग विशेषकर तृतीय श्रेणी शिक्षकों पर दबाव और प्रभाव पूर्वक रसीदो के माध्यम से शुल्क वसूलते हैं तथा इस एकत्र चंदे को चाटकर अपनी राजनीति चमकाते हैं और जब तबादलों की बात आती है तो पॉलिसी का राग अलापते हैं । प्रदेश का तृतीय श्रेणी शिक्षक संवर्ग शिक्षक संगठनों के इस दोगले व्यवहार से आहत और आक्रोशित है तथा अब वक्त आने पर इन पक्ष विपक्ष के जनप्रतिनिधियों एवं स्वार्थी शिक्षक संगठनों का पुरजोर विरोध कर, वोट की चोट देकर उन्हें आईना जरूर दिखाएगा । 

सामोता का कहना है कि यदि शिक्षा विभाग के अन्य संवर्गों के तबादले बिना किसी तबादला नीति के हो सकते हैं तो तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादले करने में इनको परहेज क्यों है ! विशेषकर प्रदेश के घोषित डार्क जोन वाले जिलों में कार्यरत लगभग 72,000 शिक्षक जो वर्षों से अपने तबादलों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, उनको राहत देने के साथ-साथ, सभी इच्छुक तृतीय श्रेणी शिक्षकों, शारीरिक शिक्षकों एवं प्रबोधको के तबादले अतिशीघ्र किए जाएं और तबादलों की आड में फर्जी शिक्षक संगठनों और उनके शिक्षक नेताओं द्वारा तृतीय श्रेणी शिक्षकों से चंदा वसूले जाने पर संज्ञान लिया जाए । प्रदेश में फैले अवैध इन शिक्षक संगठनों जोकि शिक्षक हितों की मिथ्या बात करते हैं, उनकी किसी निष्पक्ष सरकारी एजेंसी से ऑडिट करवाई जाए ताकि शिक्षकों से वसूले गए काले धन मालूम चल सके । इन फर्जी शिक्षक संगठनों के गठन से लेकर अब तक तृतीय श्रेणी शिक्षकों से वसूले गए चंदे से संकलित राशि की ऑडिट करवाई जाए, ताकि इनकी इस गोरखधंधे, व दोगलेपन की सस्ती राजनीति से शिक्षकों को निजात मिल सके ।

राजस्थान प्रदेश में शिक्षा विभाग के तृतीय श्रेणी शिक्षक वर्ग को छोड़कर अन्य संवर्गो के बंपर तबादलों से स्थिति यह बन गई है कि प्रदेश के सैकड़ों सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी विद्यालयों के संचालन, शिक्षण एवं प्रबंधन का काम तृतीय श्रेणी शिक्षकों को करना पड़ रहा है । वहीं दूसरी ओर सरकारों की विभिन्न नित् नई फ्लैगशिप योजना जैसे पोषाहार वितरण, बाल गोपाल दुग्ध योजना, विभिन्न प्रकार की दवाओं का वितरण, पाठ्य पुस्तक वितरण, जन आधार अपडेशन, निशुल्क यूनिफॉर्म वितरण, छात्रवृत्ति वितरण, नामांकन अभिवृद्धि, सह शैक्षणिक गतिविधियों, परीक्षाओं का संचालन सहित निर्वाचन आयोग की मूलभूत कड़ी बीएलओ जैसा कार्य का निष्पादन भी तृतीय श्रेणी शिक्षकों के ही जिम्मे है । बावजूद इसके शिक्षा की नींव को मजबूत करने वाला यह तृतीय श्रेणी शिक्षक संवर्ग अपने गृह जिले में और इच्छित स्थान पर वर्षों से तबादलों का इंतजार कर रहा है । सरकार, शिक्षक संघो और विपक्ष सभी अपनी अपने इस दोगलेपन के व्यवहार के कारण तृतीय श्रेणी शिक्षकों तथा उनके लाखों शुभचिंतक आक्रोशित व आहत है । 

प्रदेश की वर्तमान सरकार ने दबाव अथवा संवेदनशीलता के चलते चिकित्सकों, वकीलों, बेरोजगारों, किसानों, युवाओं, आदि सभी संवर्गो की मांगे मानी है । लेकिन, प्रदेश में शिक्षा का उजियारा फैलाने वाले और शिक्षा की नींव की ईंट का काम करने वाले लाखों तृतीय श्रेणी शिक्षकों को नजरअंदाज कर उन्हें निराश व आहत किया है तथा असंवेदनशीलता का परिचय दिया है । प्रदेश का तृतीय श्रेणी शिक्षक संवर्ग इस प्रकार के पक्षपातपूर्ण रवैये के कारण उद्वेलित है, आंदोलन के लिए मजबूर है, सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से सरकार व स्वार्थी शिक्षक संघों के खिलाफ कैंपेन चलाने को मजबूर है । लेकिन, अब इनकी सब्र का बांध टूटने को है और इनका गुस्सा सरकार के खिलाफ निकलेगा, जिसकी परिणीति शिक्षा, शिक्षार्थी,जनप्रतिनिधियों एवं शासन के विरुद्ध देखने को मिलेगी। (ये लेखक के अपने विचार हैं)

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