सोशल मीडिया पर अश्लील चित्र व विडियो बंद करे सरकार - समाजसेवी कालूराम झाझडिया

जीवन अनमोल है इसे आत्महत्या कर नष्ट नहीं करें !

सुबह की शुरुआत माता-पिता के चरण स्पर्श से करें !

संस्कार सृजन राम गोपाल सैनी

चौमूं / जयपुर (संस्कार सृजन) आज अश्लील चित्र व वीडियो की भरमार ही हो गई है। दरअसल फेसबुक, यूट्यूब का वीडियो वाला विंडो ओपन करते ही अश्लील वीडियो व चित्र दिखने लगते हैं जिनको देखकर शर्मिंदगी महसूस होती है। सबसे बड़ी बात यह है कि उक्त अश्लील सामग्री ग्राहकों पर जबरदस्ती थोपी जा रही है। 


कहते हैं कि परिवर्तन ही जीवन है। यदि देश, समाज और आसपास के वातावरण में परिवर्तन न हो, तो व्यक्ति बहुत शीघ्र ही बोर हो जाएगा। हर दिन एक ही चीज खाना संभव नहीं है, भले ही वह खीर-पूड़ी या रसगुल्ले ही क्यों न हों। हर समय एक ही रंग-रूप के वस्त्र पहनने वाले को भी अजीब निगाहों से देखा जाता है। पर परिवर्तन का अर्थ क्या केवल इतना ही है ? परिवर्तन अच्छा भी हो सकता है और खराब भी। एक पीढ़ी के अंतराल में वातावरण कैसा बदला है,। आइए जानते हैं सोशल मीडिया क्या है

सोशल मीडिया महज नाम से ही सोशल है। सारे रिश्ते—नातों को अंगूठा दिखाया जा रहा है। सोशल मीडिया के भीतर सुख-दुःख, क्रोध, अपमान, निराशा का एक वृहद संसार रचा जा रहा है। समय के साथ चलना और बदलाव अवश्य ही बुद्धिमत्ता का परिचायक है, पर इसके विकराल होते जा रहे भ्रमजाल और मोहपाश में जकड़ते जाने के कारण हमारी संस्कृति-सभ्यता के मानदंडों, पारिवारिक, सामाजिक प्रतिष्ठा एवं नैतिक मूल्यों के क्षतिग्रस्त होने की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में पारिवारिक, सामाजिक, कानूनी नियंत्रण और सुझावों से ही इस समस्या का समाधान किया जा सकता है।

भ्रामक सूचनाओं का प्रसार - यह सही बात है कि सोशल मीडिया समाज के लिए खतरा बन गया है। इस पर दी जाने वाली जानकारी भ्रामक भी होती है। सूचना को किसी भी प्रकार से तोड़-मरोड़कर पेश किया जा सकता है। उसका स्वरूप बदला जा सकता है, जिससे समाज में तनाव पैदा हो सकता है। फोटो या वीडियो की एडिटिंग करके भ्रम फैला सकते हैं, जिनके कारण कभी-कभी दंगे जैसी आशंका भी उत्पन्न हो जाती है। सोशल मीडिया से ज्यादातर आज ब्लैक मेलिंग करके पैसे ऐंठने का काम जोर शोर से चल रहा है और आज जानकारों से व्हाट्सएप पर एक दूसरे के परिचित की फोटो लगा कर पैसे मांगे जा रहे हैं | साथ ही कई लोग जाल में फस भी चुके हैं | ऐसे में सावधान रहें, अपने परिचित से फोन पर बात बात करके ही डिसीजन ले। 

आज 21वीं सदी में लोग मदद की बजाय, बनाते हैं वीडियो - आज हर व्यक्ति किसी न किसी प्रकार से सोशल मीडिया से जुड़ा है। इसका नकारात्मक पक्ष यह है कि आजकल दुर्घटनाओं के समय लोग वीडियो बनाने में लग जाते हैं, पीड़ितों की तरफ से ध्यान हट जाता है। समय रहते पीड़ितों को सहायता मिल जाए, तो कई लोगों की जान बच सकती है। मुश्किल यह है कि लोग अपनी जागरूकता दिखाने के लिए घटन की सूचना प्रसारित करने को ज्यादा तरजीह देते हैं;,आजकल सम्प्रदायिक सदभाव को बिगाड़ने का काम भी सोशल मीडिया कर रहा है।

सोशल + मीडिया - सोशल अर्थात सामाजिक और मीडिया अर्थात माध्यम | इस प्रकार सोशल मीडिया एक ऐसा माध्यम है जो हमें समाज के विभिन्न वर्ग के लोगों से जोड़ता है |  तकनीक, हमेशा से ही लोगों की समस्याओं का समाधान ढूंढ निकालने के लिए अग्रसर रही है, सोशल मीडिया का आविष्कार भी इसी सोच के साथ किया गया था कि जो लोग किन्ही कारणों से अपनों से दूर है, अकेले हैं, उनकी इस समस्या का निवारण हो सके और आज इसी प्रकार तकनीक के माध्यम से लोग घर बैठे इंटरनेट के जरिए लोगों से जुड़ पा रहे हैं और दुनियाभर की जानकारियाँ आपस में साँझा कर रहे हैं। तो आइए आज से हम इसका सदुपयोग करें ना कि दुरुपयोग |

हम सभी किसी ना किसी रूप में जरूरतमंदों की सेवा कर सकते हैं | पड़ोसी भूखा नहीं सोए इसका ध्यान रखें |

" संस्कार सृजन " कोरोना योद्धाओं को दिल से धन्यवाद देता है |

विडियो देखने के लिए -https://www.youtube.com/channel/UCDNuBdPbTqYEOA-jHQPqY0Q 

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