वरिष्ठ अधिवक्ताओं के मनोनयन में अनियमितता के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में 47 वें दिन भी धरना प्रदर्शन

जीवन अनमोल है इसे आत्महत्या कर नष्ट नहीं करें !

मास्क लगाकर रहें ! सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखें !

संस्कार सृजन राम गोपाल सैनी

नई दिल्ली (संस्कार सृजन) राजस्थान हाईकोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ताओं के मनोनयन में अनियमितता को लेकर 25 जनवरी से धरना जारी है | आज 47 वें दिन भी धरना जारी रहा। अधिवक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में प्रदर्शन कर धरना दिया | उल्लेखनीय है कि वरिष्ठ वकील 47 दिन से शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं क्योंकि वरिष्ठ अधिवक्ताओं का अपमान हुआ है।

अब महिलाएं भी आंदोलन में आने लगी है। शांतिपूर्ण तरीके से ऐतिहासिक धरना चल रहा है आज धरने पर पूनमचंद भंडारी, चौमूं बार एसोसिएशन के पूर्व महासचिव पवन प्रजापति, चौमूं बार एसोसिएशन के पूर्व महासचिव कालूराम अग्रवाल, विजय मिश्रा, कमलेश सक्सेना व दीपेंद्र धरने पर बैठे।

वकीलों ने कहा वरिष्ठ अधिवक्ताओं का अपमान नहीं सहेंगे। वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने यह भी मांग की हाईकोर्ट कॉलेजियम वकीलों में से जजों की नियुक्ति करते है उसमें भी अधिवक्ताओं से प्रार्थना पत्र आमंत्रित करने चाहिए और जो सीनियर अधिवक्ता मनोनयन करने के लिए गाइडलाइंस है वही गाइडलाइंस जजों की नियुक्ति के लिए होनी चाहिए और उनके प्रार्थना पत्रों को दस्तावेज सहित वेबसाइट पर डालना चाहिए | ताकि समस्त अधिवक्ता यह जान सकें कि जो जज बनने जा रहे हैं उनमें कितनी काबिलियत है ,क्योंकि उनकी नियुक्ति से लाखों लोगों के भविष्य पर असर पड़ता है | जजों की नियुक्ति में महिलाओं की उपस्थिति नगण्य है | 50 जजों में से कम से कम 10 महिलाओं का चयन होना चाहिए और इसके अलावा जजों की नियुक्ति में कोलिजियम में लोकल जजेज का बहुमत होना चाहिए क्योंकि बाहर के जजों को यहां के अधिवक्ताओं के बारे में पूरी जानकारी नहीं होती है। 

वर्तमान समय में मुख्य न्यायाधीश जज एम एम श्रीवास्तव जी हैं राजस्थान के बाहर से आए हैं तो कॉलेजियम जल्दी नहीं होना चाहिए उन्हें कम से कम छह महीने तक विभिन्न रोस्टर में बैठकर वकीलों की बहस सुनकर चयन करना चाहिए। इसके अलावा वकीलों में इस बात का भी रोष है कि 26 वरिष्ठ अधिवक्ताओं का मनोनयन किया गया है उसमें सिर्फ एक महिला अधिवक्ता का मनोनयन हुआ है और एक महिला अधिवक्ता जिसका नाम कॉलेजियम ने सुप्रीम कोर्ट के लिए भेजा था उनको भी वरिष्ठ वकीलों के मनोनयन में चयनित नहीं किया गया है तथा एससी एसटी और ओबीसी कि अधिवक्ताओं के नाम भी नजरअंदाज किए गए हैं।


हम सभी किसी ना किसी रूप में जरूरतमंदों की सेवा कर सकते हैं | पड़ोसी भूखा नहीं सोए इसका ध्यान रखें |

" संस्कार सृजन " कोरोना योद्धाओं को दिल से धन्यवाद देता है |

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