दादू साहित्य के विविध आयामों पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ

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संस्कार सृजन राम गोपाल सैनी 

जयपुर (संस्कार सृजन) राजस्थान विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के दादू अध्ययन प्रकोष्ठ के तत्वावधान में ‘दादू साहित्य चिंतन के विविध आयाम’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन मानविकी सभागार में हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अल्पना कटेजा ने की, एवं हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार शर्मा ने स्वागत उद्बोधन दिया।

मुख्य वक्ता दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर बजरंग बिहारी तिवारी ने कहा कि दादू वाणी किसी एक पंथ तक सीमित नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के कल्याण का संदेश देती है। संत साहित्य को व्यापक दृष्टि से देखने की आवश्यकता है। विशिष्ट अतिथि विश्वगुरु दीप आश्रम, जॉर्डन के महामंडलेश्वर गुरु ज्ञानेश्वर गिरी महाराज ने कहा कि संत परंपरा को आगे बढ़ाने का कार्य स्वयं संत ही करते हैं, जिसका उदाहरण दादूजी महाराज के 152 शिष्य हैं। उन्होंने दादू साहित्य को विश्व की अमूल्य धरोहर बताया।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि उप महापौर पुनीत कर्णावत ने कहा कि मीरा, कबीर जैसे संत कवियों ने सदैव आमजन को केंद्र में रखकर अपनी वाणी दी, जिसमें समरस और भेदभाव रहित समाज की झलक मिलती है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्य मानवाधिकार आयोग के सदस्य अशोक कुमार गुप्ता ने भारतीय संस्कृति को वैज्ञानिक बताते हुए कहा कि व्यक्ति, परिवार और समाज ही भारतीयता की पहचान हैं।

अध्यक्षीय उद्बोधन में राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अल्पना कटेजा ने कहा कि जीवन की कठिनाइयाँ मनुष्य को अध्यात्म की ओर ले जाती हैं। राजस्थान की भूमि भक्ति की भूमि रही है और दादू दयाल करुणा के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि साधु बनने के लिए वेश परिवर्तन आवश्यक नहीं है। संगोष्ठी कार्यक्रम में दादूपंथी साहित्य शोध संस्थान, जयपुर के अध्यक्ष स्वामी रामसुखदास महाराज ने कहा कि दादूपंथी साहित्य हमेशा सामाजिक समरसता का संदेश देता है।

कार्यक्रम के दौरान ‘दादू दयाल और हमारा समय’ पुस्तक का विमोचन भी किया गया। इस दौरान हिंदी विभाग की सहायक आचार्य डॉ. तारावती शर्मा ने अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। 

इस मौके पर हिंदी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. मीता शर्मा, सहायक आचार्य डॉ. जितेंद्र कुमार सिंह, सहायक आचार्य वीरेंद्र सिंह, हरियाणा से प्रोफेसर डॉ. बहादुर सिंह, वाराणसी से प्रोफेसर डॉ. देवेंद्र कुमार सिंह, महाराजा शिवाजी राव विश्वविद्यालय, बड़ोदरा के हिंदी विभाग के प्रोफेसर दीपेंद्र कुमार जडेजा, दिल्ली से वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. ब्रजेंद्र कुमार सिंघल, सुखसागर सेवा धाम किशनगढ़ रेनवाल के संत सुखदेव महाराज, सांगानेर से संत पुरुषोत्तम दास महाराज आदि ने विचार व्यक्त किए।

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