यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट जयपुर ने मनाया 11वाँ दीक्षांत समारोह

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संस्कार सृजन राम गोपाल सैनी 

जयपुर (संस्कार सृजन) यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट, जयपुर ने  विश्वविद्यालय परिसर में अपना 11वाँ दीक्षांत समारोह अत्यंत गरिमा और उत्सवपूर्ण वातावरण में आयोजित किया। यह ऐतिहासिक अवसर वर्ष 2025 के स्नातक बैच के लिए उनकी शैक्षणिक यात्रा की सफल पूर्णता का प्रतीक बना। इस समारोह में पीएच.डी., इंजीनियरिंग, प्रबंधन, फिजियोथेरेपी तथा कंप्यूटर एप्लीकेशंस सहित विभिन्न विषयों के विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की गईं। 

समारोह में प्रतिष्ठित गणमान्य अतिथियों, विशिष्ट शिक्षाविदों, उद्योग जगत के अग्रणी व्यक्तित्वों, गौरवान्वित अभिभावकों तथा उत्साहित विद्यार्थियों की उपस्थिति ने इसे अत्यंत प्रेरणादायक और स्मरणीय बना दिया। समारोह की अध्यक्षता कुलाधिपति प्रो. बनानी चक्रवर्ती ने की। इस अवसर के मुख्य अतिथि प्रो. अनिल डी. सहस्रबुद्धे, अध्यक्ष, नेशनल एजुकेशनल टेक्नोलॉजी फोरम (NETF) एवं कार्यकारी समिति के अध्यक्ष, नेशनल असेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन काउंसिल (NAAC) रहे। उन्होंने दीक्षांत भाषण प्रदान करते हुए नवस्नातकों को नवाचार, सत्यनिष्ठा और आजीवन शिक्षण के महत्व पर प्रेरणादायक विचारों से प्रोत्साहित किया। 

अपने प्रेरक संदेश में प्रो. बनानी चक्रवर्ती ने स्नातकों को बधाई देते हुए नैतिक नेतृत्व, सामाजिक उत्तरदायित्व और दृढ़ता के महत्व पर बल दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने व्यावसायिक एवं व्यक्तिगत जीवन में सत्यनिष्ठा, उत्कृष्टता और संवेदनशीलता के मूल्यों को अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने यह भी कहा कि यूईएम जयपुर नवप्रवर्तकों, नेतृत्वकर्ताओं और जिम्मेदार नागरिकों के निर्माण के प्रति निरंतर प्रतिबद्ध है, जो समाज और राष्ट्र के विकास में सार्थक योगदान दें। 

पीएच.डी. की उपाधियाँ और स्वर्ण पदक प्रदान करते हुए प्रो. अनिल डी. सहस्रबुद्धे ने विद्यार्थियों को आजीवन शिक्षार्थी बने रहने और तीव्र गति से बदलते तकनीकी परिवेश के अनुरूप स्वयं को ढालने की प्रेरणा दी। उन्होंने अंतर्विषयक ज्ञान, सशक्त शोध दृष्टिकोण तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति की भावना के अनुरूप अपने शैक्षणिक और व्यावसायिक जीवन को संरेखित करने के महत्व पर प्रकाश डाला। 

उन्होंने विद्यार्थियों को चुनौतियों को अवसर के रूप में देखने और नैतिक मूल्यों की मजबूत नींव के साथ राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए कुलपति प्रो. (डॉ.) बिस्वजॉय चटर्जी ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों, शोध प्रकाशनों, प्लेसमेंट, उद्योग सहयोग, पेटेंट तथा वैश्विक पहुंच में उल्लेखनीय प्रगति पर प्रकाश डाला। 

उन्होंने स्नातक विद्यार्थियों को उनकी दृढ़ता और परिश्रम के लिए बधाई दी तथा विश्वास व्यक्त किया कि वे यूईएम जयपुर की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाएँगे। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समग्र विकास के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता दोहराई। प्रो. (डॉ.) सत्यजीत चक्रवर्ती, प्रो-कुलपति, यूईएम जयपुर ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को उत्कृष्टता की ओर अग्रसर रहते हुए मूल्यों से जुड़े रहने का संदेश दिया। 

उन्होंने कहा कि वास्तविक सफलता अनुशासन, नवाचार और टीमवर्क की मजबूत नींव पर आधारित होती है, जो व्यक्तियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के वातावरण में चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाती है। उन्होंने सहयोगात्मक सोच, नैतिक आचरण और निरंतर कौशल उन्नयन की आवश्यकता पर बल दिया। कुलसचिव प्रो. (डॉ.) प्रदीप कुमार शर्मा ने अपने स्वागत भाषण में दीक्षांत समारोह को परिश्रम, समर्पण और शैक्षणिक उत्कृष्टता का गौरवपूर्ण उत्सव बताया। 

उन्होंने समारोह के सफल आयोजन हेतु यूईएम परिवार के सभी सदस्यों के समन्वित प्रयासों के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि शैक्षणिक परिषद, प्रबंधन मंडल, अध्ययन मंडल, सह-डीन, संकाय सदस्यों और कर्मचारियों की उपस्थिति विद्यार्थियों की सफलता के पीछे सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है। 11वें दीक्षांत समारोह की गरिमा को और बढ़ाते हुए विश्वविद्यालय को देशभर से मंत्रालय तथा अनेक प्रतिष्ठित शिक्षाविदों एवं शैक्षणिक नेताओं से शुभकामना संदेश प्राप्त हुए। 

इन संदेशों में उच्च शिक्षा और शोध उत्कृष्टता में विश्वविद्यालय के निरंतर योगदान की सराहना की गई। समारोह का एक प्रमुख आकर्षण उपाधियों और पदकों का वितरण रहा। विभिन्न विषयों—इंजीनियरिंग, प्रबंधन, फिजियोथेरेपी, कंप्यूटर एप्लीकेशंस और शोध—में कुल 393 उपाधियाँ प्रदान की गईं। विश्वविद्यालय ने 6 पीएच.डी. उपाधियाँ प्रदान कर उत्कृष्ट शोध योगदानों को सम्मानित किया। साथ ही 17 स्वर्ण पदक मेधावी विद्यार्थियों को उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए प्रदान किए गए। 

मुख्य अतिथि, कुलाधिपति एवं वरिष्ठ विश्वविद्यालय अधिकारियों द्वारा उपाधियाँ और पदक प्रदान किए गए, जो विद्यार्थियों और उनके परिवारों के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण और भावनात्मक क्षण रहे। छात्र शपथ के माध्यम से स्नातकों ने व्यावसायिक नैतिकता, राष्ट्रीय विकास और मानवता की सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

समारोह की महत्ता को और बढ़ाते हुए विशिष्ट व्यक्तित्वों को मानद उपाधियों (Honoris Causa) से अलंकृत किया गया, जिनके असाधारण योगदानों ने शासन, लोक सेवा, उद्योग और अकादमिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रभाव डाला है। डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (पीएच.डी.) मानद उपाधि से सम्मानित किए गए: गोपाल कृष्ण पिल्लई– केरल कैडर के प्रतिष्ठित पूर्व आईएएस अधिकारी, जिन्होंने केंद्रीय गृह सचिव और वाणिज्य सचिव के रूप में सेवाएँ दीं। 

महेंद्र लाल कुमावत – प्रख्यात पूर्व आईपीएस अधिकारी और सीमा सुरक्षा बल के पूर्व महानिदेशक। महेंद्र खेतान – विख्यात उद्योगपति एवं वायर्स एंड फैब्रिक्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक, जिनके पास चार दशकों से अधिक का कॉर्पोरेट नेतृत्व अनुभव है। समरेन्दु सरकार – सम्मानित कॉर्पोरेट नेता एवं अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड में पूर्व अध्यक्ष (ग्रुप कॉर्पोरेट अफेयर्स)। डॉ. सौगाता मित्रा – प्रतिष्ठित प्रबंधन विशेषज्ञ एवं एनडीडीबी डेयरी सर्विसेज के प्रबंध निदेशक। 

डॉक्टर ऑफ इंजीनियरिंग (डी.इंज.) मानद उपाधि प्रो. दुर्ग सिंह चौहान – प्रख्यात शिक्षाविद एवं पूर्व कुलपति – को प्रदान की गई। इन महान हस्तियों को सम्मानित कर यूईएम जयपुर ने उत्कृष्टता, दूरदर्शी नेतृत्व और समाज व राष्ट्र के प्रति परिवर्तनकारी योगदानों को मान्यता देने की अपनी प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित किया। जैसे-जैसे समारोह आगे बढ़ा, वातावरण हर्ष, गर्व और भावनात्मक उत्सव से परिपूर्ण हो गया। 

विद्यार्थियों ने गणमान्य अतिथियों, सह-डीन, संकाय सदस्यों और कर्मचारियों की उपस्थिति में जोरदार तालियों के बीच अपनी उपाधियाँ प्राप्त कीं। प्रसन्नता के क्षण, परिवारों के साथ गौरवपूर्ण संवाद और स्मृति-चित्रों ने वर्षों की मेहनत और समर्पण की परिणति को दर्शाया। 

समारोह का समापन राष्ट्रगान और औपचारिक शैक्षणिक शोभायात्रा के साथ हुआ, जो अंत नहीं बल्कि एक सशक्त नई शुरुआत का प्रतीक था, जब स्नातक आत्मविश्वास के साथ अपने व्यावसायिक जीवन के अगले अध्याय की ओर अग्रसर हुए। ‎

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