भागवत में सृष्टि की रचना का अर्थ है कि हम कहां से आये हैं और हमें कहां जाना है

जीवन अनमोल है , इसे आत्महत्या कर नष्ट नहीं करें !

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संस्कार सृजन राम गोपाल सैनी 

चौमूं / जयपुर (संस्कार सृजन) ग्राम उदयपुरिया में अर्चना हिंमाशु शर्मा द्वारा आत्मकल्याण व सर्वजनहिताय आयोजित भागवत कथा में तीसरे दिन कथा व्यास पं.रामपाल शर्मा शास्त्री जैसलान ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया कि परब्रह्म परमात्मा ही अपने ब्रह्मा विष्णु महेश तीन रूप में संसार की रचना, पालन व संहरण अपनी माया शक्ति के जरिए करता है। भागवत में सृष्टि निर्माण का कथानक हमें यह सीख देता है कि हमारे जीवन का लक्ष्य क्या है। हम इस संसार में अपने जीवन को सत्कर्मों के जरिए सफल करने आए हैं।


कर्म प्रधान विश्व रचि राखा जो जस करहि सो तस फल चाखा जीव का बार बार अनेकों जूण में जन्म लेना सिर्फ अपने किये कर्मों का फल है। अतः कर्मों को करने में सावधानी आवश्यक है। अहंकार व कर्तापन का भाव ही मनुष्य को कर्म बंधन में बांधता है। हम अपने सत्कर्म अनासक्त भाव से भगवान् को समर्पित करते रहें इसी का नाम जीते-जी मुक्ति है। सारा संसार कर्ममय है। भगवान् भी जब धरती पर अवतार लेते हैं तो उनके लिए तीनों लोकों में पाने को कुछ भी नहीं होता फिर भी वे व्यवहार में सारे शुभकर्म करते हैं ताकि लोग उनका अनुसरण कर सकें। अपने किए का फल सबको भोगना पड़ता ही है इससे भगवान् भी अछूता नहीं है। परब्रह्म परमात्मा राम के पिता दशरथ को भी अपने किये का फल भोगना पड़ा था।

कथा व्यास शास्त्री ने बताया कि जो संतान अपने मां बाप बड़े बुजुर्गो आदि प्रत्यक्ष देवों की सेवा नहीं करते वे मंदिरों में जाकर भी क्या करेंगे। वराह अवतार का वैज्ञानिक व पौराणिक अर्थ बताया कि धरती से प्रेम ही भगवत्ता है। वराह यज्ञ स्वरूप हैं। यज्ञ का अर्थ ही परोपकार है। भागवत में कपिल भगवान् ने अपनी मां देवहूति को आत्मकल्याण का उपदेश दिया जिसे कपिल गीता कहते हैं।

स्वायंभुव मनु, उनकी तीन बेटियों के वंश का वर्णन, दक्ष चरित, दक्ष के यज्ञ में सती का प्राणोत्सर्ग, शिव पार्वती का विवाह आदि प्रसंगों को संगीत स्वर लहरी व आकर्षक झांकियों के साथ अध्यात्म व लौकिक बातों से जोड़कर बताया गया। साथ ही ध्रुव चरित का वर्णन किया गया कि यदि दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो छोटी उम्र में भी भगवान को दर्शन के लिए मजबूर किया जा सकता है।

आरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया। आज कथा में चौथे दिन भरत चरित, प्रह्लाद चरित, वामनावतार आदि अन्य प्रसंगों के साथ रामावतार के बाद कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जायेगा। कथा में उदयपुरिया व आसपास के गांवों से श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है।


1. हम सभी किसी ना किसी रूप में जरूरतमंदो की सेवा कर सकते हैं | 

2. पड़ोसी भूखा नहीं सोए इसका ध्यान रखें |

3. जीवन में आप इस धरती पर अपने नाम का एक पेड़ जरूर लगाएँ |

4. बेजुबानों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था जरूर करें !

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