मणिपुर में दो और युवतियों के साथ हुई थी दरिंदगी

जीवन अनमोल है इसे आत्महत्या कर नष्ट नहीं करें !

सुबह की शुरुआत माता-पिता के चरण स्पर्श से करें !

संस्कार सृजन राम गोपाल सैनी

इम्फाल (संस्कार सृजन) मणिपुर में दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाए जाने के अलावा एक और घटना सामने आई है, जिसमें दो युवतियों के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया और फिर उनकी हत्या कर दी गई। इस मामले में भी 16 मई को पीड़िता की मां की ओर से कांगपोपकी जिले के सैकुल थाने में जीरो एफआईआर दर्ज कराई गई थी, लेकिन उसमें यौन हिंसा का कोई जिक्र नहीं किया गया था।


हमलावरों की भीड़ में 200 लोग शामिल - एक पीड़िता की मां ने बताया सैकुल थाना घटनास्थल से 35 किलोमीटर दूर है। पीड़िता की मां ने आरोप लगाया है कि चार मई को बहुसंख्यक समुदाय की भीड़ ने उनकी बेटी और उसकी सहेली के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और फिर नृशंस हत्या कर दी। हमलावरों की भीड़ में 100 से 200 लोग शामिल थे। 

दोनों युवतियां पूर्वी इंफाल जिले के कोनुंग ममांग क्षेत्र में किराए के मकान में रहकर कार की सफाई करने वाले गैराज में काम करती थीं। अभी तक परिवार को उनके शव नहीं सौंपे गए हैं।माना जा रहा है कि इनके शव इंफाल घाटी स्थित एक अस्पताल के शवगृह में रखे हुए हैं। जातीय हिंसा के कारण युवतियों के स्वजन वहां नहीं जा पा रहे हैं।

क्या होती है जीरो एफआईआर? - एक पुलिस अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि जीरो एफआईआर दर्ज होने के कारण पोरोंपैट पुलिस स्टेशन द्वारा जांच के दौरान अन्य धाराएं जोड़ी जा सकती हैं। जब किसी पुलिस स्टेशन को उसके अधिकार क्षेत्र के बाहर हुए किसी अपराध के संबंध में शिकायत मिलती है, तो वह जीरो एफआईआर दर्ज करता है।

किन धाराओं के तहत दर्ज हुआ मामला? - सैकुल पुलिस स्टेशन में दर्ज किए गए आरोपों में आईपीसी की धाराओं-153-ए (विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 397 और 398 (डकैती या घातक हथियार से लैस होकर डकैती का प्रयास), 427 (शरारत), 436 (घर को नष्ट करने के इरादे से आग या विस्फोटक पदार्थ द्वारा हमला), 448 (अतिक्रमण), 34 (सामान्य इरादा) और शस्त्र अधिनियम की धारा 25 (1 सी) (प्रतिबंधित हथियार रखना) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

चार मई को दो महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाने की घटना में पुलिस ने शनिवार को दो और आरोपितों को गिरफ्तार किया। इन दोनों में एक आरोपित 19 वर्ष का किशोर और दूसरा नाबालिग है। इसके साथ ही मामले में गिरफ्तार अभियुक्तों की संख्या छह हो गई है।

हिंसा में 160 लोगों की जा चुकी है जान - मैतेई समुदाय द्वारा अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने की मांग के विरोध में तीन मई को पहाड़ी जिलों में 'आदिवासी एकजुटता मार्च' निकाला गया था। इस दौरान जातीय हिंसा भड़कने के बाद से मणिपुर में 160 से अधिक लोगों की जान चली गई है और कई अन्य घायल हुए हैं।

बहुत जरूरी सूचना :- रात को दुर्घटना से बचने के लिए अपनी गाड़ी को लो बीम में चलाएँ !

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