गौ माता को लम्पी वायरस से बचाएँ!
जीवन अनमोल है , इसे आत्महत्या कर नष्ट नहीं करें !
सुबह की शुरुआत माता-पिता के चरण स्पर्श से करें !
संस्कार सृजन @ राम गोपाल सैनी
जयपुर (संस्कार सृजन) संत निरंकारी मिशन की ओर से विश्वभर के सभी भक्तों एवं प्रभु प्रेमियों के लिए वार्षिक निरंकारी संत समागम भक्ति, प्रेम एवं मिलवर्तन का एक ऐसा अनुपम स्वरूप है, जिसमें सभी भक्त सम्मिलित होकर आलौकिक आनंद की अनुभूति प्राप्त करते हैं। इसी दिव्यता की अविरल श्रृंखला को निरंतर जारी रखते हुए सत्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के पावन सान्निध्य में 75वां वार्षिक निरंकारी संत समागम दिनांक 16 से 20 नवम्बर को संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल समालखा, हरियाणा में आयोजित होने जा रहा है, जिसमें लाखों की संख्या में प्रभु प्रेमी भक्त सम्मिलित होकर सत्गुरु माता जी के पावन आशीष प्रवचनों को श्रवण करेंगे।
समागम परिसर एवं उसके आसपास के क्षेत्रों में सेवाएं आरम्भ हो चुकी है। दिल्ली एंव एन. सी. आर के अतिरिक्त, अन्य राज्यों से भी संतजन पहुँचकर इन सभी सेवाओं में अपना योगदान दे रहे हैं। फिर चाहे वह मैदानों की स्वच्छता हो, ट्रैक्टर की, राजमिस्त्री की, लंगर की सेवा हो अथवा किसी भी प्रकार की कोई अन्य सेवा ही क्यों न हो; सभी संत इन सेवाओं में सम्मिलित होकर हृदय से सत्गुरु का आभार प्रकट कर रहे हैं । इस अवसर पर बच्चे, युवा एवं वृद्ध सभी में एक नई ऊर्जा एवं उत्साह का संचार देखा जा सकता है। आज का युवा वर्ग इस भागदौड़ भरी जिंदगी में व्यस्त है, ऐसे समय में निरंकारी मिशन ब्रह्मज्ञान की दिव्य रोशनी द्वारा युवाओं को आध्यात्म से जोड़ रहा है, जिसका जीवंत उदाहरण यह दिव्य संत समागम है, जिसमें सभी वर्ग, जाति, धर्म के भक्त निस्वार्थ रूप से अपनी सेवाओं को निभाते हुए अपने जीवन को सफल बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
यह 75वां वार्षिक निरंकारी संत समागम ‘रूहानियत और इंसानियत संग संग’ विषय पर आधारित है जिसमें विश्वभर से वक्ता, गीतकार तथा कविजन अपने प्रेरक एंव भक्तिमय भावों को व्यक्त करेंगे। ‘रूहानियत के एहसास एंव आधार में ही इंसानियत का भाव निहित है। वास्तविक रूप में जब हम समर्पित रूप में निराकार परमात्मा के साथ जुड़ते है तब हमारे अंदर स्वतः ही इंसानियत रूपी दिव्य गुण दृश्यमान होने लगते हैं और हृदय में फिर सभी के लिए केवल परोपकार एंव प्रेम की ही भावना उत्पन्न होती है। सत्गुरू माता जी का भी यही दिव्य संदेश है कि मानव जीवन में रूहानियत एवं इंसानियत का संग-संग होना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि इनके आगमन से ही वास्तविक रूप में जीवन सार्थक बनता है। यही इस दिव्य संत समागम का उद्देश्य भी है।
हम सभी किसी ना किसी रूप में जरूरतमंदों की सेवा कर सकते हैं | पड़ोसी भूखा नहीं सोए इसका ध्यान रखें |
" संस्कार सृजन " कोरोना योद्धाओं को दिल से धन्यवाद देता है |
विडियो देखने के लिए -https://www.youtube.com/channel/UCDNuBdPbTqYEOA-jHQPqY0Q
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