कांग्रेस अध्यक्ष पद की रेस में सामने आए अब 5 नाम

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संस्कार सृजन राम गोपाल सैनी

नई दिल्ली / जयपुर (संस्कार सृजन) कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव के लिए अब दावेदारों की संख्या बढ़ने लगी है। पहले ऐसा लग रहा था कि राहुल गांधी के नाम पर सहमति बन जाएगी, लेकिन शशि थरूर और बाद में अशोक गहलोत के चुनाव लड़ने की चर्चाओं के बीच अब दो पूर्व मुख्यमंत्री और एक पूर्व केंद्रीय मंत्री समेत तीन नए नाम और सामने आ रहे हैं।

इनमें मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, दिग्विजय सिंह आज दिल्ली पहुंचेंगे, जहां वे पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर सकते हैं। उन्होंने मीडिया से बातचीत में खुद को भी दावेदार बताया था।

इधर मनीष तिवारी से जुड़े करीबी सूत्रों ने बताया कि वे पार्टी के स्टेट डेलिगेट्स से मिलने के लिए अपने निर्वाचन क्षेत्र में गए थे। ये स्टेट डेलिगेट्स चुनाव में वोटर हैं। अध्यक्ष पद के हर उम्मीदवार को प्रदेश कांग्रेस कमेटी का चुनाव लड़ने के लिए 10 डेलिगेट्स की जरूरत होती है। ये डेलिगेट्स ही उम्मीदवार के नाम को प्रस्तावित करते हैं।

1. अशोक गहलोत :-

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का नाम अध्यक्ष की रेस में सबसे आगे हैं। इस सिलसिले में उन्होंने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से बुधवार शाम दो घंटे बातचीत की। दोनों नेताओं के बीच क्या बातचीत हुई, यह पता नहीं चल पाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सोनिया ने इतना ही कहा कि पार्टी अध्यक्ष पद के लिए इस चुनाव में वे किसी का फेवर नहीं करेंगींं। उधर, गहलोत गुरुवार को राहुल गांधी से मिलने कोच्चि भी गए। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, 'मैं एक बार और प्रयास कर रहा हूं राहुल गांधी को अध्यक्ष पद के लिए मनाने का। राहुल गांधी के हां या ना कहने पर ही मैं वापस आऊंगा। इसके बाद आगे का मूवमेंट तय होगा।

सीएम और अध्यक्ष दोनों पदों पर रहने के सवाल पर गहलोत ने कहा कि समय बताएगा कि मैं कहा रहूंगा, कहां नहीं रहूंगा। एक पद, एक व्यक्ति फॉर्मूले पर उन्होंने कहा कि मेरी इच्छा तो ये है कि मैं किसी पद पर न रहूं, क्योंकि मैं बहुत पद पर रह चुका हूं। मेरे उपस्थिति से पार्टी को फायदा होना चाहिए, कांग्रेस मजबूत होनी चाहिए, मैं यह चाहता हूं। गहलोत ने कहा कि इतने सालों में पार्टी ने मुझे बहुत कुछ दिया है।'

2 मनीष तिवारी :-

मनीष तिवारी कांग्रेस के उस G-23 ग्रुप का हिस्सा हैं, जिन्होंने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर पार्टी में सुधार की मांग की थी। इस साल 26 अगस्त को G-23 समूह के सदस्य गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस की संगठनात्मक चुनाव प्रक्रिया को तमाशा और दिखावा करार देते हुए इस्तीफा दे दिया था।

तिवारी पंजाब के श्री आनंदपुर लोकसभा सीट से सांसद हैं। सूत्रों के मुताबिक, त‍िवारी 24 स‍ितंबर को द‍िल्‍ली पहुंच रहे हैं। दिल्ली में ही वे अपने समर्थकों से चर्चा करेंगे। इसके बाद चुनाव लड़ने से जुड़ा फैसला लेंगे। त‍िवारी 5 साल तक NSUI और 2 साल तक यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

3. दिग्विजय सिंह :-

राज्यसभा सांसद और मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के महासचिव रह चुके हैं। साथ ही मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रह चुके हैं। बुधवार को NDTV को दिए एक इंटरव्यू में दिग्विजय सिंह ने राहुल गांधी से अध्यक्ष पद संभालने की अपील की थी।

जब उनसे पूछा गया कि क्या वह राहुल के अलावा अशोक गहलोत या शशि थरूर को नेतृत्व की भूमिका में पसंद करेंगे, तो दिग्विजय सिंह ने कहा- चलो देखते हैं। मैं खुद को भी खारिज नहीं कर रहा हूं, आप मुझे बाहर क्यों रखना चाहते हैं? दिग्विजय ने कहा कि हर किसी को चुनाव लड़ने का अधिकार है। आपको 30 तारीख की शाम को जवाब पता चल जाएगा।

4. शशि थरूर :-

पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर केरल के तिरुवनंतपुरम से लोकसभा सांसद हैं। वे ऑल इंडिया प्रोफेशनल कांग्रेस के अध्यक्ष भी हैं। वे कांग्रेस के G-23 नेताओं में से एक हैं। 19 सितंबर को कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने सोनिया से चुनाव लड़ने की इजाजत मांगी।

हालांकि सोनिया ने उन्हें साफ शब्दों में कहा कि चुनाव लड़ने का फैसला आपका है। यानी ये आपका कॉल है, पार्टी की चुनावी प्रक्रिया तय नियमों के हिसाब से ही होंगी। इसमें सभी को बराबर का अधिकार है। थरूर सुबह कांग्रेस मुख्यालय पहुंचे और सेंट्रल इलेक्शन ऑथोरिटी से मुलाकात की।

5. कमलनाथ :-

कमलनाथ मध्य प्रदेश के सीएम रह चुके हैं। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा लोकसभा सीट से 9 बार सांसद रहे कमलनाथ मनमोहन सरकार में शहरी विकास मंत्री के तौर पर काम कर चुके हैं। वे कांग्रेस के महासचिव और मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

कमलनाथ ने 2004 से लेकर 2014 तक कांग्रेस सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाले। इसमें उद्योग मंत्रालय, कपड़ा मंत्रालय, वन और पर्यावरण मंत्रालय, सड़क और परिवहन मंत्रालय प्रमुख हैं।

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