चूरू में तहसील स्तरीय दिव्यांग शिविर बना प्रशासन की लापरवाही का शिकार

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संस्कार सृजन राम गोपाल सैनी

चूरू (संस्कार सृजन) लोगों द्वारा कहा जा रहा है कि इन दिनों जिला मुख्यालय पर अधिकारियों के रूप में खात एकत्रित हो चुकी है,  यह बात आज जिला कलक्टर सिद्धार्थ सिहाग के निर्देशानुसार चूरू तहसील के दिव्यांगजनों के चिन्हीकरण शिविर के प्रातः 10 बजे की बजाय दोपहर 12 बजे तक भी शुरू नहीं होने से साबित भी हो गई है। इतना ही नहीं यहां चूरू पंचायत समिति परिसर में आयोजित इस शिविर में भारी अनियमितताएं देखने को मिली। 

कलेक्टर और सरकार के निर्देशों की जमकर धज्जियां उड़ाई गई। अधिकारियों और चिकित्सकों के बैठने की व्यवस्था हॉल में कर दी गई जबकि दिव्यांगजन सीढ़ियों के नीचे ही बैठे रहने को मजबूर रहे। दिव्यांगों के लिए बैठने के अलावा पेयजल की भी कोई व्यवस्था नहीं की गई। परेशान दिव्यांग अख्तर खान रुकनखानी, ओम प्रकाश कसवां, समाज सेवी महबूब खान आदि संस्थाओं के प्रतिनिधियों के नेतृत्व में जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। चिकित्सकों व अधिकारियों की शिविर में गैरमौजूदगी के कारण दूर दराज से आए दिव्यांगों को बहुत परेशानी हुई। 

मीडिया कर्मियों के पहुंचने के बाद तहसीलदार मौके पर पहुंचे लेकिन परेशान दिव्यांग जनों ने अधिकारियों को बाहर बैठाने या उन्हें अंदर पहुंचाने की व्यवस्था करने की मांग की। प्रशासन पर पूरी थू थू होने के बाद में एसडीएम सत्यनारायण सुथार भी शिविर में आए। शिविर में दिव्यांगों की पहचान कर दिव्यांग प्रमाण-पत्र बनाये जाने थे।  दिव्यांगों को किसी उपकरण की आवश्यकता का चिन्हीकरण किया जाना था। दिव्यांगजन तो निर्धारित समय पर पहुंच गए लेकिन यह काम करने वाले अधिकारियों का कोई अता पता ही नहीं था। लोहसना बड़ा निवासी मनीष कुमार प्रजापत ने बताया कि 4 साल से उसका यू डी आई टी कार्ड नहीं बन रहा है। 

लादडिया निवासी श्योपाल मेघवाल ने बताया कि 15000 खर्च करने के बाद भी आज तक उसका दिव्यांग प्रमाण पत्र नहीं बना है। इस कारण से उसे पेंशन भी नहीं मिलती है। वार्ड नंबर 24 चूरु निवासी धनराज मेघवाल ने बताया कि उसे 2 साल बाद भी नहीं बैसाखी वह ट्राई साइकिल नहीं मिली है। इसी प्रकार सिरसा निवासी राजेंद्र सिंह राठौड़ लोहा इतना बड़ा निवासी राम कुमार प्रजापत आदि भी अधिकारियों की लापरवाही के कारण परेशान हुए। दूरदराज से आए दिव्यांगजन प्रशासन की लापरवाही के कारण और दुखी हो गए। 

शिविर समाप्त होने से पहले प्रधान दीपचंद राहड़ और मनोरोग चिकित्सक के बीच जमकर फ फा हुई। यह सब तो यहां अधिकारियों के रूप में खात एकत्रित होने का पहला ट्रेलर मात्र है, फिल्म तो अभी बाकी पड़ी है। इस संबंध में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग चूरू के सहायक निदेशक अरविंद कुमार ओला ने कहा कि सारी जिम्मेवारी एसडीएम को सौंपी गई थी। समय पर शिविर की तैयारियां पूरी नहीं की गई और आनन-फानन में शिविर आयोजित किया गया। उन्हें भी इसकी शिकायतें मिल रही है।

रिपोर्ट - राजेंद्र सिंह 

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