दो दिवसीय राजयोग शिविर में कोटा संभाग सहित बूंदी, बारां व आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे साधक

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संस्कार सृजन राम गोपाल सैनी 

कोटा (संस्कार सृजन) प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, शक्ति सरोवर कमला उद्यान, कुन्हाड़ी में दो दिवसीय  तीव्र पुर शार्थ  की उड़ान राजयोग शिविर एवं योग-तपस्या भट्ठी का आयोजन किया गया। शिविर में माउंट आबू से पधारे वरिष्ठ राजयोग शिक्षक राजयोगी ब्रह्माकुमार सूरज भाई एवं वरिष्ठ राजयोगिनी शिक्षिका गीता दीदी ने साधकों को राजयोग, श्रेष्ठ संकल्प और कर्मों की गहनता से अवगत कराया।


कार्यक्रम में कोटा संभाग प्रभारी राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी उर्मिला दीदी ने माउंट आबू से आए अतिथियों का तिलक एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। योग-तपस्या भट्ठी में कोटा, बूंदी, बारां सहित आसपास के क्षेत्रों से आए बड़ी संख्या में भाई-बहनों ने सहभागिता कर राजयोग का लाभ लिया।

राजयोगी सूरज भाई ने कहा कि सुबह नींद से जागने के बाद के शुरुआती तीन मिनट अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। उस समय मन में किए गए संकल्प हमारी दिनचर्या और जीवन की दिशा को प्रभावित करते हैं। इसलिए हमें वही सोचना चाहिए, जो हम अपने जीवन में वास्तव में चाहते हैं। यदि दिन की शुरुआत सकारात्मक और श्रेष्ठ संकल्पों से होगी तो पूरा दिन उसी ऊर्जा के साथ आगे बढ़ेगा।

उन्होंने कहा कि मनुष्य अपने कर्मों से ही अपने भविष्य का निर्माण करता है। हम जीवन में जो भी कर्म करते हैं, उसका फल हमें अवश्य प्राप्त होता है। इसलिए प्रत्येक कर्म को करने से पहले उसके परिणाम के बारे में विचार करना चाहिए और सदैव श्रेष्ठ एवं कल्याणकारी कर्म करने का प्रयास करना चाहिए।

राजयोगिनी गीता दीदी ने कहा कि हमारे हर संकल्प का ब्रह्मांड में एक चित्र बनता है और उसी के अनुरूप हमारी सृष्टि का निर्माण होता है। यदि मन में सकारात्मक, पवित्र और श्रेष्ठ विचार होंगे तो जीवन में भी सकारात्मकता का अनुभव होगा। उन्होंने साधकों को अपने विचारों पर ध्यान देने तथा व्यर्थ संकल्पों से मन को मुक्त रखने की प्रेरणा दी।

सूरज भाई ने साधकों को दिनभर शुद्ध एवं सकारात्मक संकल्पों का अभ्यास करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि हमें बार-बार स्मृति में रखना चाहिए-“मैं स्वस्थ आत्मा हूं, मैं निर्विघ्न आत्मा हूं, मैं शांत आत्मा हूं।” ऐसे श्रेष्ठ संकल्प मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और व्यक्ति के आत्मबल को मजबूत बनाते हैं।

उन्होंने कहा कि राजयोग केवल ध्यान की विधि नहीं, बल्कि अपने विचारों, भावनाओं और कर्मों को श्रेष्ठ बनाने की जीवनशैली है। जब मन श्रेष्ठ संकल्पों से भरता है तो उसका सकारात्मक प्रभाव हमारे व्यवहार और जीवन पर भी दिखाई देने लगता है।

दो दिवसीय शिविर के दौरान साधकों ने राजयोग मेडिटेशन, योग-तपस्या एवं आध्यात्मिक चिंतन के माध्यम से स्वयं को सकारात्मक ऊर्जा से भरने का अनुभव किया।


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