फुटपाथ पर सैलून चलाने वाले पिता का बेटा बनेगा डॉक्टर

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संस्कार सृजन राम गोपाल सैनी 

जयपुर (संस्कार सृजन) कहते हैं कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि इंसान के भीतर आगे बढ़ने का जुनून और मेहनत करने का जज्बा हो तो सफलता जरूर मिलती है। इस कहावत को सच कर दिखाया है नवीन सैन ने। जयपुर में फुटपाथ पर सैलून चलाकर परिवार का पालन-पोषण करने वाले राजकुमार सैन के बेटे नवीन ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा में 720 में से 603 अंक हासिल कर परिवार और समाज का नाम रोशन किया है। अब नवीन डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना चाहते हैं।


नवीन की सफलता इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने बेहद सीमित आर्थिक संसाधनों और कठिन पारिवारिक परिस्थितियों के बीच अपनी पढ़ाई जारी रखी। उनके पिता राजकुमार सैन स्वयं संघर्षों से निकलकर यहां तक पहुंचे हैं। पिता की संघर्षपूर्ण जिंदगी और मेहनत को देखकर नवीन ने भी कभी परिस्थितियों के सामने हार नहीं मानी।

राजकुमार सैन मूल रूप से बांदीकुई के रहने वाले हैं। उनके जीवन में उस समय बड़ा संकट आया जब उनके पिता का निधन हो गया। परिवार की परिस्थितियां ऐसी थीं कि पिता की मृत्यु के समय अपने लोगों का अपेक्षित सहयोग भी नहीं मिल पाया। यहां तक कि राजकुमार को अपनी बहन को स्वयं कंधा देना पड़ा।

इस घटना ने राजकुमार के जीवन को गहराई से प्रभावित किया, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के आगे घुटने नहीं टेके। इसके बाद वे जयपुर आए और डॉ. एस.के. शर्मा के यहां काम किया। कुछ वर्षों तक मेहनत करने के बाद उन्होंने स्वयं सैलून का काम शुरू किया। धीरे-धीरे फुटपाथ पर एक छोटे से सैलून के माध्यम से परिवार का पालन-पोषण करने लगे।

राजकुमार सैन आज भी फुटपाथ पर सैलून चलाकर परिवार की जरूरतें पूरी करते हैं। बारिश हो या तेज धूप, उनका संघर्ष लगातार जारी रहा। सीमित आमदनी के बावजूद उन्होंने बच्चों की पढ़ाई को हमेशा प्राथमिकता दी।

उनकी सबसे बड़ी इच्छा थी कि उनके बच्चे शिक्षा हासिल कर उनसे बेहतर जीवन जिएं। यही कारण है कि आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने नवीन की पढ़ाई में किसी तरह की कमी नहीं आने दी। परिवार के सहयोग और पिता के संघर्ष ने नवीन को लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

नवीन ने आदर्श नगर स्थित महावीर स्कूल से 12वीं कक्षा तक पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी शुरू की। लगभग तीन वर्षों तक लगातार मेहनत और अनुशासन के साथ तैयारी की। नवीन के सामने संसाधनों की कमी जरूर थी, लेकिन उनका लक्ष्य स्पष्ट था। उन्होंने परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। नियमित अध्ययन और निरंतर प्रयास के बाद उन्होंने NEET में 603 अंक प्राप्त किए।

NEET परीक्षा के पेपर लीक होने की खबर सामने आने के बाद नवीन कुछ समय के लिए निराश हो गए थे। उन्हें लगा कि उनकी वर्षों की मेहनत पर असर पड़ सकता है। लेकिन परिवार ने उनका हौसला बढ़ाया। नवीन ने भी निराशा को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया और आगे की तैयारी तथा अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखा। आखिरकार परीक्षा परिणाम आया और नवीन ने 720 में से 603 अंक हासिल कर अपनी मेहनत को सफलता में बदल दिया।

नवीन की सफलता के पीछे केवल उनकी मेहनत नहीं, बल्कि उनके पिता राजकुमार का संघर्ष भी छिपा है। जिस पिता ने अपने जीवन में पिता की मृत्यु के बाद कठिन परिस्थितियों का सामना किया, दूसरे शहर में जाकर काम किया और फिर फुटपाथ पर सैलून लगाकर परिवार को संभाला, उसी पिता ने बेटे को पढ़ाकर डॉक्टर बनने का सपना देखा।

नवीन ने भी पिता की मेहनत को समझा और पढ़ाई को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया। उनकी सफलता इस बात का उदाहरण है कि गरीबी और संसाधनों की कमी किसी व्यक्ति की प्रतिभा को रोक नहीं सकती, यदि परिवार का विश्वास और विद्यार्थी की मेहनत साथ हो।

NEET में सफलता हासिल करने के बाद नवीन का अगला लक्ष्य डॉक्टर बनना है। उनका सपना है कि चिकित्सा क्षेत्र में आगे बढ़कर वे समाज के जरूरतमंद लोगों की सेवा करें। नवीन अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों के मार्गदर्शन और लगातार की गई मेहनत को देते हैं। उनका कहना है कि कठिन परिस्थितियों ने उन्हें रोकने के बजाय आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

नवीन सैन की कहानी उन हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के कारण अपने सपनों को छोटा समझने लगते हैं। नवीन ने साबित किया है कि सफलता के लिए सबसे जरूरी चीज महंगे संसाधन नहीं, बल्कि लक्ष्य के प्रति समर्पण, अनुशासन और निरंतर मेहनत है।

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