विश्व पर्यावरण दिवस पर नाटकवाला कला मंच पर खेला गया नाटक पतंग और पेड़

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संस्कार सृजन राम गोपाल सैनी 

आमेर / जयपुर (संस्कार सृजन) विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर नाटकवाला कला मंच, आमेर द्वारा प्रकृति और मानवीय संवेदनाओं को समर्पित बाल नाटक "पतंग और पेड़" का सफल मंचन किया गया। इस मार्मिक नाटक का लेखन एवं निर्देशन रंगकर्मी ओम प्रकाश सैनी द्वारा किया गया।

नाटक दर्शकों को एक ऐसी भावनात्मक यात्रा पर ले गया, जिसमें एक ओर गरीब बालक राजू है, जिसके पास पतंग खरीदने तक के पैसे नहीं हैं, लेकिन उसे पतंग उड़ाने का हुनर आता है। दूसरी ओर अमीर बालक मोनू है, जिसके पास पतंग, डोर और चरखी सब कुछ है, लेकिन वह पतंग उड़ाना नहीं जानता। हर बार उसकी पतंग घर के बाहर खड़े विशाल नीम के पेड़ में फंस जाती है, जिससे परेशान होकर वह अपने माता-पिता से पेड़ कटवाने की जिद करता है।

उधर राजू उसी नीम के पेड़ को अपनी खुशियों का सहारा मानता है। वह भगवान से प्रार्थना करता है कि पेड़ में खूब पतंगें फंस जाएं ताकि वह उन्हें उतारकर उड़ा सके। लेकिन मोनू की जिद के आगे आखिरकार पेड़ काट दिया जाता है। अगले दिन जब राजू वहां पहुंचता है और पेड़ को कटा हुआ देखता है तो उसकी आंखें नम हो जाती हैं। वह दुखी होकर भगवान से शिकायत करता है कि उसने तो पेड़ में पतंग फंसने की प्रार्थना की थी, पेड़ कटने की नहीं।

नाटक का सबसे भावुक दृश्य तब आता है जब निराश होने के बजाय राजू उसी स्थान पर एक नया पौधा लगाने का निर्णय लेता है। उसका विश्वास होता है कि एक दिन यह पौधा बड़ा होकर फिर से पेड़ बनेगा और उसकी पतंगों का साथी बनेगा। राजू की यह सोच मोनू और उसके पिता को अपनी गलती का एहसास कराती है। अंततः मोनू अपने किए पर पछताता है, अपनी पतंग राजू को सौंप देता है और उससे पतंग उड़ाना सीखने का आग्रह करता है। इसके बाद दोनों बच्चे मिलकर पतंग उड़ाते हैं और एक नए मित्रता एवं पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ नाटक का समापन होता है।

नाटक के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि पेड़ केवल लकड़ी नहीं, बल्कि जीवन, स्मृतियों, खुशियों और आने वाली पीढ़ियों की उम्मीद होते हैं। एक बच्चा अपनी सुविधा के लिए पेड़ कटवा देता है, जबकि दूसरा बच्चा अपनी खुशी के लिए नया पेड़ लगाता है। यही सोच पर्यावरण संरक्षण की वास्तविक भावना को दर्शाती है।

लेखक एवं निर्देशक ओम प्रकाश सैनी के जीवन अनुभवों पर आधारित नाटक ने बच्चों और बड़ों को दिया पर्यावरण बचाने का संदेश :-

लेखक एवं निर्देशक ओम प्रकाश सैनी ने बताया कि इस नाटक का विचार उनके अपने बचपन के अनुभवों से जन्मा है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं बचपन में राजू की तरह पेड़ों पर चढ़कर पतंग उतारते थे और अक्सर यह सोचते थे कि काश पेड़ में और अधिक पतंगें फंस जाएं ताकि उन्हें एक साथ उतार सकें। उन्हीं स्मृतियों ने इस नाटक की कहानी को जन्म दिया।

नाटक में मुख्य अभिनय स्वयं ओम प्रकाश सैनी ने किया। बाल कलाकारों में दीपशिखा सैनी, खुशांक सैनी, लक्षित सैनी, आयुष्मान सैनी, युग सैनी एवं अवनी सैनी ने प्रभावशाली अभिनय कर दर्शकों की खूब सराहना प्राप्त की।

मंच सज्जा में अंजली सैनी मुख सज्जा हिमांशी सैनी, वस्त्र सज्जा में सुनीता सैनी, प्रकाश व्यवस्था - अनिरुद्ध सैनी, संगीत सयोजन मेँ आयुष सैनी तथा मंच प्रबंधक चंदी देवी द्वारा किया गया |

कार्यक्रम में क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक, अभिभावक, कला प्रेमी एवं बाल दर्शक उपस्थित रहे। सभी ने नाटक की भावनात्मक प्रस्तुति की सराहना करते हुए इसे पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने वाला एक प्रभावशाली प्रयास बताया।

नाटकवाला कला मंच द्वारा प्रस्तुत यह नाटक केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने और अधिक से अधिक वृक्ष लगाने का एक सशक्त संदेश लेकर आया।

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