विश्व जल संरक्षण दिवस : जल संरक्षण आज की महत्ती आवश्यकता - डॉ. अशोक पाल सिंह

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संस्कार सृजन राम गोपाल सैनी 

उत्तराखंड (संस्कार सृजन) राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, बिझौली में 'विश्व जल संरक्षण दिवस' के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के संयोजक और पर्यावरण मित्र डॉ. अशोक पाल सिंह ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज पूरे विश्व में जल संरक्षण दिवस मनाया जा रहा है।

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि हमें आगामी पीढ़ी के लिए जल बचाना अनिवार्य है। हमें वर्षा जल का संचयन कर उसका सदुपयोग करना चाहिए। पृथ्वी पर मात्र 3 प्रतिशत जल ही पीने योग्य है, इसलिए जल ही संसार के प्रत्येक प्राणी के जीवन का आधार है।

जल संरक्षण का अर्थ है पानी की बर्बादी को रोकना और बुद्धिमानी से उपयोग करना है। इस लिए जल संचयन लिकेज, रोकना और पुनर्चक्रण जैसे उपाय अत्यन्त आवश्यक है। भारत में तेजी से जनसंख्या वृद्धि एव शहरी करण से जल स्तर में गिरावट हो रही है जो जल संकट की गम्भीर स्थिति को दर्शता है। दार्शनिक अर्थ 'ज' का अर्थ है-जन्म और 'ल' का अर्थ लय (लीन हो जाना / प्रलय) अर्थात जल की जन्म और जल ही लम, इस कारण उसे जीवन माना गया जल ही जीवन है। बुद्धिमानी से उपयोग करें जल है तो कल है जल के अभाव मे मनुष्य के शरीर में 75 प्रतिशत जल होता है सम्पर्ण सृष्ठि मे विधमान जड चेतन सभी पदार्थों की उत्पत्ति प्रकृति के पाँच तत्व से हुई है। रामचरित मानस में कहा गया है। छिति जल, पावक, गगन, समीरा, पँच रचित अति अधम सरीरा, समाधान एवं प्रभाव उपयोग दक्षता बढाने वाली तकनीकी जैसे ड्रिय सिंचाई वर्ष संचयन और जल निकायो की सफाई की

आवश्यकता, जल संरक्षण व्यवहार में सामाजिक एवं मनौवेज्ञानिक प्रोत्साहन से भी जल बचत सम्भाव है। दैनिक जीवन शैली दैनिक जीवन में बुश करते एव नहाते समय नल खुला न छोडे, बाल्टी का प्रयोग करें। घरेलु रख-रखाव नल तुरन्त टीक करें। वर्षा जल संचयन करे पर वर्षा जल को इक्टा कर पुनः उपयोग करे। जागरूकता बच्चो एव समुदाय, विधालायो, कॉलेजो एवं संस्थाओ के माध्यम से पानी के महत्व के बारे में जागरूक करें। पानी की हर एक बूँद कीमती है। यादि हमने आज जल संरक्षण नही किया तो भविष्य में पानी के लिए युद्ध संघर्ष जैसी स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है। छोटे-छोटे व्यक्तिगत प्रयास बडे बडे जल संकटो को हल कर सकते है। जीवन में जल जीवन का आधार है |

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