हनुमान जन्मोत्सव कब है? ये है पूजा विधि और चोला चढ़ाने का तरीका

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संस्कार सृजन राम गोपाल सैनी 

जयपुर (संस्कार सृजन) तारा ज्योतिष साधना केंद्र के अध्यक्ष और अंतर्राष्ट्रीय भविष्यवक्ता पंडित रविंद्र आचार्य ने बताया कि हनुमान जी का जन्मोत्सव हर साल चैत्र पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है | पंचांग के अनुसार पूर्णिमा 1 अप्रैल की सुबह शुरू होकर 2 अप्रैल की सुबह तक रहेगी। हालांकि हिंदू परंपरा में त्योहार उदया तिथि के आधार पर मनाए जाते हैं, इसलिए इस साल हनुमान जन्मोत्सव 2 अप्रैल को मनाया जाएगा।

क्या है इस दिन का महत्व :-

मान्यता है कि इसी दिन अंजनी पुत्र हनुमान का जन्म हुआ था। हनुमान जी को शक्ति, साहस और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। उन्हें भगवान शिव का अंश भी कहा जाता है। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से संकट दूर होने और मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता है।

पूजा विधि :-

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।

घर के मंदिर या पूजा स्थान को साफ करें।

हनुमान जी की मूर्ति या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं।

उन्हें सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करें।

लड्डू, गुड़ या चने का भोग लगाएं।

इसके बाद हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करें।

पूजा के दौरान मन शांत रखें और ध्यान भगवान पर रखें।

हनुमान जी को चोला चढ़ाने की विधि :-

हनुमान जन्मोत्सव के दिन हनुमान जी को चोला चढ़ाना बेहद ही शुभ माना जाता है। चोला चढ़ाने से पहले सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें। इसके बाद मंदिर या घर के पूजा स्थान पर दीपक जलाएं। सबसे पहले हनुमान जी का गंगाजल से अभिषेक करें और साफ कपड़े से मूर्ति को हल्के हाथ से पोंछ लें। इसके बाद सिंदूर में घी या चमेली का तेल मिलाकर तैयार करें और धीरे-धीरे हनुमान जी को चोला चढ़ाएं। आमतौर पर शुरुआत पैरों से की जाती है और फिर पूरे शरीर पर लगाया जाता है। चोला चढ़ाने के बाद जनेऊ पहनाया जाता है और फिर सोने या चांदी के वर्क से हनुमान जी का श्रृंगार किया जाता है और अंत में भोग लगाकर आरती की जाती है। हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ भी इस दौरान किया जाता है।

चोला चढ़ाने की सामग्री :-

 हनुमान जी को चोला चढ़ाने के लिए ज्यादा सामान की जरूरत नहीं होती, लेकिन जो चीजें हैं, उन्हें सही तरीके से रखना जरूरी है। इसमें सिंदूर, घी या चमेली का तेल, वस्त्र, जनेऊ और वर्क (चांदी या सोने का) शामिल होता है। इसके अलावा प्रसाद के लिए लड्डू या गुड़-चना रखा जा सकता है। पूजा के समय दीपक और अगरबत्ती भी जलाएं।

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