राईटर्स क्लब जयपुर ने आयोजित किया एक संवाद डॉ.परिक्षित सिंह के साथ

जीवन अनमोल है , इसे आत्महत्या कर नष्ट नहीं करें !

सुबह की शुरुआत माता-पिता के चरण स्पर्श से करें !

अब सिर्फ 150 रुपए में साल भर घर मंगवाएँ "संस्कार सृजन" न्यूज़ पेपर ! 

संस्कार सृजन राम गोपाल सैनी 

जयपुर (संस्कार सृजन) राईटर्स क्लब जयपुर के तत्वावधान में भारत व अमरीका के दर्शन, साहित्य, चिकित्सा सेवा तथा समाज के सांस्कृतिक परिवेश के वर्तमान एवं भविष्य पर चर्चा के लिए आयोजित "एक संवाद डॉ.परिक्षित सिंह के साथ " में जयपुर, (भारत) के मूल निवासी डॉ. परिक्षित सिंह ने संस्था के अध्यक्ष लोकेश कुमार सिंह साहिल के साथ संवाद में कहा कि आज का भारत विकसित भारत है और इसका भविष्य उज्जवल है मगर साहित्य की दृष्टि से देखें तो आज भारत पहले के भारत से बहुत पिछड़ रहा है। इसका ग्राफ नीचे गया है। यह देश कभी ज्ञानियों, ऋषियों, महर्षियों के मार्गदर्शन पर चलता था, इसका आज अभाव है। भारत आज नई पाश्चात्य सभ्यता की ओर बढ़ रहा है।

लोकेश कुमार साहिल के एक प्रश्न के जबाब में परिक्षित सिंह ने बताया कि आज का जयपुर अपना पुराना वैभव खोता जा रहा है जिस स्मार्ट सिटी की हम बात करते हैं वह जयपुर स्थापना के समय से ही पहला स्मार्ट सिटी था। हम विकास की चाह में अपना सौन्दर्य संभाल नहीं पाये। इसी प्रकार अब के अमेरिका में पहले के मुकाबले उदारवाद कम हुआ है। जिससे पहले अमेरिका एक विश्व शक्ति था आज उसके मुकावले में कई देश खड़े हो गये हैं।


धर्म और आध्यात्म में क्या अन्तर है के संवाद में डॉ.परिक्षित सिंह ने कहा कि जो धर्म को धारित करे वह धर्म है। राजनीति एक अल्पकालीन धर्म है जबकि धर्म दीर्घकालीन है। वे अरविन्दों के राष्ट्रधर्म और भारतीय संस्कृति के पोषक होने के कारण उनकी ओर बढ़े।

इस अवसर पर डॉ. सिंह के पिता स्व. सत्यनारायण सिंह के उपर लिखी उनकी कविताओं के संग्रह "सत्य" नामक पुस्तक का विमोचन डॉ. परिक्षित सिंह, लोकेश कुमार सिंह साहिल, अध्यक्ष राईटर्स क्लब, आर. एस. जाखड, पूर्व आई ए एस, फारूख आफरीदी साहित्यकार, सुनील प्रकाश शर्मा ए.सी.पी., सुभाष शर्मा पत्रकार, सीताराम सैनी अभियंता तथा डॉ. रिपुन्जय सिंह द्वारा किया गया।

डॉ. परिक्षित सिंह : स्वास्थ्य सेवक, कवि एवं लेखक :-

डॉ. परिक्षित सिंह, एम.डी., इंटरनल मेडिसिन में बोर्ड-प्रमाणित चिकित्सक हैं। आपने मात्र 15 वर्ष की आयु में दूसरों की सहायता करने की भावना से चिकित्सा अध्ययन का संकल्प लिया व चिकित्सकीय शिक्षा सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज, जयपुर से प्राप्त की, जहाँ इन्हें इंटरनल मेडिसिन और फिजियोलॉजी में सम्मान (ऑनर्स) प्राप्त हुआ। आप न्यूयॉर्क से रेज़िडेंसी पूर्ण करने के बाद फ्लोरिडा चले गए और कई वर्षों से यहाँ कार्य कर रहे है। यही पर इन्होंने 2001 में एक्सेस हेल्थ केयर, एल.एल.सी. की स्थापना की।

डॉ. सिंह प्रतिदिन अपने रोगियों और एक्सेस परिवार की वास्तविक सहायता करते हैं। दूसरों के कल्याण के प्रति उनकी सच्ची चिंता रोगियों के साथ उनके व्यवहार में स्पष्ट दिखाई देती है। ये स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और दीर्घकालिक रोगों के सफल प्रबंधन के लिए रोगियों को शिक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। जिसके कारण इन्हें बेफ्रंट हेल्थ स्प्रिंग हिल, बेफ्रंट हेल्थ, ब्रुक्सविल अस्पताल, ओक हिल अस्पताल तथा रीजनल मेडिकल सेंटर बेयोनेट पॉइंट में भर्ती अधिकार (एडमिटिंग प्रिविलेज़) प्राप्त हैं।

पेशेवर गतिविधियों के अतिरिक्त, डॉ. सिंह की रुचियों में कविता लेखन, साहित्य, धर्म तथा दर्शन शामिल हैं। डॉ. सिंह परोपकारी कार्यों के लिए भी अपना पर्याप्त समय समर्पित करते हैं आप द्वारा जयपुर में एक्सेस हेल्थ केयर, औरोवेद इंटीग्रल फाउंडेशन, प्राथे हेल्थ केयर आदि संस्थान के संस्थापक हैं और हर्नांडो काउंटी (यू.एस.ए.) में वृंडेड वॉरियर प्रोजेक्ट के समर्थन को लेकर विशेष रूप से उत्साही हैं।

परिक्षित सिंह मूलतः एक कवि और दार्शनिक हैं- हालांकि आप किसी अकादमिक साँचे में ढले हुए नहीं है। उन्होंने जीवन और कर्म का अपना एक दर्शन विकसित किया है, जो निरंतर विकसित हो रहा है, और जिसे वे अपनी अत्यंत निजी कविता तथा उतनी ही निजी चिकित्सकीय प्रैक्टिस के माध्यम से अभिव्यक्त करते हैं।

इनका साहित्य "आंतरिक खोज" की अभिव्यक्ति है व पदार्थ में आत्मा की पूर्णता की तलाश है और इसलिए यह रूप (पदार्थ) के उस शाश्वत संघर्ष का साक्ष्य है, जिसमें वह विषयवस्तु (आत्मा) की परम प्रवाहशीलता को प्राप्त करना चाहता है; और विषयवस्तु का संघर्ष, जिसमें वह रूप में अपनी पूर्ण अभिव्यक्ति चाहती है।

इसी कारण, इनके लेखन- उनकी कविताओं, कहानियों, साहित्यिक समीक्षाओं तथा उनके विपुल अनुवादों (हिंदी, संस्कृत, फ़ारसी, उर्दू से) में आपको रूप और विषय, तकनीक और कथा, शैली और सार का एक अत्यंत मौलिक और सृजनात्मक अंतः क्रिया दिखाई देगी। साथ ही, उदात्त काव्यात्मकता और अत्यंत साधारण संयोजन भी मिलेगा।

विषयवस्तु की दृष्टि से डॉ. सिंह का विस्तार अद्भुत है- 

प्राचीन भारतीय योग और चीनी ताओ की रहस्यमय परंपराओं से लेकर समकालीन जन तक, क्वांटम भौतिकी से लेकर चिकित्साविज्ञान तक यह अर्थों और निरर्थकताओं का एक ताना-बाना सहजता से बुनते हैं। रूप की दृष्टि से डॉ. सिंह पारंपरिक सॉनेट्स से मुक्त छंद तक, रचनात्मक हाइकू से कोआन-सदृश द्विपंक्तियों तक, संरचित कथन से नव-आधुनिक चेतना-प्रवाह वाली अर्ध-काव्यात्मक गद्य-शैली तक प्रयोगधर्मी विस्तार के साथ निर्भीकता से विचरण करते हैं।

डॉ. सिंह भविष्य के कवि हैं। समकालीन समय के एक बहुआयामी रचनाकार हैं, जिनकी पहचान एक संवेदनशील कवि, गंभीर चिंतक और प्रतिबद्ध लेखक के रूप में स्थापित हुई है। विगत कुछ वर्षों में उन्होंने हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में अनेक महत्वपूर्ण पुस्तकों की रचना की है, जो साहित्य, दर्शन, आध्यात्म, भारतीय ज्ञान-परंपरा और मानवीय संवेदनाओं का गहन समन्वय प्रस्तुत करती हैं।

उनकी रचनाओं में श्री अरबिंद के दर्शन और विचार-जगत पर केंद्रित कृतियों विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं- Sri Aurobindo and the Literary Renaissance of India, Sri Aurobindo and Philosophy तथा The Age of Sri Aurobindo जिनमें भारतीय नवजागरण, चेतना-विकास और दार्शनिक उत्कर्ष का सूक्ष्म विश्लेषण मिलता है। भारतीय ज्ञान-परंपरा को सरल और जनसुलभबनाने की उनकी प्रतिबद्धता The Veda Made Simple तथा The Literary Genius of the Bhagavad Gita जैसी कृतियों में स्पष्ट दिखाई देती है।

काव्य के क्षेत्र में डॉ. परिक्षित सिंह की संवेदना अत्यंत व्यापक और आत्मानुभूति से भरी हुई है। Radha Geet, Paramhansa (Selected Poems), Satya: Poems to My Father, The Fawn और There Was a Girl I Loved Once जैसी कृतियों प्रेम, विरह, आध्यात्मिक उत्कंठा, पिता-पुत्र संबंध और जीवन की क्षणभंगुरता को मार्मिक रूप में अभिव्यक्त करती हैं।

हिंदी साहित्य में उनकी रचनाएँ- स्वय का घुसपैठिया, छुट्टी के दिन (जिसका राजस्थानी अनुवाद डॉ. कल्याण सिंह शेखावत द्वारा किया गया), तथा स्वष से परिचय- आत्मबोध, सामाजिक यथार्थ और आंतरिक संवाद की सशक्त प्रस्तुति हैं।

डॉ. परिक्षित सिंह का लेखन केवल साहित्य तक सीमित नहीं है; Health Care Prime (Fundamental Components of a New Revolution in Health Care) जैसी कृति में वे अपने चिकित्सकीय अनुभव और मानवीय दृष्टि को जोड़ते हुए स्वास्थ्य सेवा के नए प्रतिमान प्रस्तुत करते हैं।

समग्रतः डॉ. परिक्षित सिंह का रचना-संसार भाषा, विषय और दृष्टि-तीनों स्तरों पर समृद्ध है। वे परंपरा और आधुनिकता, विज्ञान और अध्यात्म, आत्म और समाज के बीच एक सृजनात्मक मेतु निर्मित करते हैं। उनका लेखन न केवल पाठक को बौद्धिक रूप से समृद्ध करता है, बल्कि आत्मचिंतन और मानवीय करुणा की ओर भी प्रेरित करता है।

किसी भी कार्यक्रम को लाइव दिखाने के लिए संपर्क करें - 9214996258,7014468512,9587061004.

सब्सक्रिप्शन बेचें

बहुत जरूरी सूचना :- 

1. रात को दुर्घटना से बचने के लिए अपनी गाड़ी को लो बीम में चलाएँ !

2. खुले कुओं और नलकूप को जल्द से जल्द बंद करवाएं !

हमसे जुड़े :-

Facebook :- https://www.facebook.com/RamGopalSainiofficial

Tweeter :- https://twitter.com/RamgGopal

Instagram :- https://www.instagram.com/ram_gopalsaini/

Youtube :- https://www.youtube.com/channel/UCDNuBdPbTqYEOA-jHQPqY0Q


1. हम सभी किसी ना किसी रूप में जरूरतमंदो की सेवा कर सकते हैं | 

2. पड़ोसी भूखा नहीं सोए इसका ध्यान रखें |

3. जीवन में आप इस धरती पर अपने नाम का एक पेड़ जरूर लगाएँ |

4. बेजुबानों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था जरूर करें !

विडियो देखने के लिए -https://www.youtube.com/channel/UCDNuBdPbTqYEOA-jHQPqY0Q 

अपने आसपास की खबरों , लेखों और विज्ञापन के लिए संपर्क करें - 9214996258, 7014468512,9929701157.

सब्सक्रिप्शन बेचें

ज़्यादा जानें
धर्म चर्चा
टेक्नोलॉजी अपडेट
वेब सीरीज़ सब्सक्रिप्शन
स्वास्थ्य टिप्स
टेक्नोलॉजी गैजेट्स
मौसम अपडेट
क्रिकेट उपकरण
समाचार सदस्यता
विज्ञापन सेवाएँ
हास्य पुस्तक

इमरजेंसी नंबर :- पुलिस कंट्रोल रूम- 100, चौमूं थाना - 01423-221009, डीसीपी पूर्व- 0141-2203400, एसीपी चौमूं -01423-221456, गोविंदगढ़ थाना-01423-230023, डीएसपी गोविंदगढ़-01423-230905, जयपुर ग्रामीण एसपी-0141-2206869, एंबुलेंस-108, सीएचसी चौमूं -01423-221424, सीएचसी गोविंदगढ़ - 01423-230077, सीएचसी सामोद-01423-240105, बिजली हेल्पलाइन-6376917467, एक्स ईएन चौमूं-01423-220069

Post a Comment

0 Comments